What is Debenture in Hindi – जानिये आसान शब्दों में

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What is debenture in hindi

What is Debenture (Bonds) and types in Hindi | डिबेंचर (ऋण पत्र) क्या है और इसके प्रकार

दोस्तो आप भी यदि शेयर मार्किट में निवेश (Invest) करना चाहते हैं तो आपको शेयर मार्किट के प्रोडक्ट की जानकारी होनी चाहिए|

यदि आप नौकरी कर रहे हैं या कोई बिज़नस कर रहे हैं, तो आप अपने पैसे को शेयर मार्किट में लगा कर, घर बेठे ही पैसा कमा सकते हैं, बस आपको अपनी सेविंग का एक हिस्सा बाज़ार में लगाना होगा|

लेकिन ये तो आप जानते ही हैं बिना जानकारी के किसी भी फील्ड में पैसा लगाना एक जोखिम है| इन्वेस्ट करने से पहले शेयर मार्किट की जानकारी होना बहुत जरुरी है|

यहाँ हम शेयर मार्किट के एक प्रोडक्ट डिबेंचर (Debenture) की चर्चा करेंगे | डिबेंचर क्या है और यह कितने प्रकार का होता है (What is Debenture and its Types in Hindi) इस कंसेप्ट को विस्तार से समझने की कोशिश करेंगे

What is Debenture and its Types in Hindi

डिबेंचर के बारे में जानने से पहले विस्तार से जान लेते हैं की किस तरह की फर्म (बिज़नस) से आप डिबेंचर खरीद कर निवेश कर सकते हैं|

क्योंकि यह जानना बहुत जरुरी है, जब तक आपके फंडामेंटल क्लियर नहीं होंगे आप इस कांसेप्ट को नहीं समझ पाएंग

बिज़नेस (धंधा) आप तीन तरीके से कर सकते हैं

Types of Business in Hindi

Proprietorship Firm (Single Owner Firm):-

इस तरह की फर्म में सिर्फ एक ही owner (मालिक) होता है| यदि आप कोई छोटा बिज़नेस कर रहे हैं जिसमे कम पूँजी की जरूरत है, और जो व्यक्ति बिज़नस चला रहा है उसे उस बिज़नेस की पूरी जानकारी है|

इस तरह के बिज़नेस को Proprietorship Firm के द्वारा चलाया जा सकता है| Proprietorship Firm को डिबेंचर (Debenture) पब्लिक को issue करने का अधिकार नहीं होता है|

Partnership Firm:-

पार्टनरशिप फर्म में एक से ज्यादा मालिक होते हैं| इस तरह की फर्म तब खोली जाती है जब ज्यादा पैसे (निवेश) या पूँजी की जरुरत होती है|

पार्टनरशिप फर्म में एक से ज्यादा मालिक होते हैं यदि बिज़नस में ज्यादा नॉलेज और Man Power की जरुरत हो तब पार्टनरशिप फर्म में काम किया जा सकता है|

इस तरह की फर्म को भी डिबेंचर issue करने का अधिकार नहीं होता है|

Company:-

कंपनी बना के बिज़नस करने का मुख्य कारण पूँजी और Men Power की बहुत ज्यादा जरुरत है| यदि आप बहुत बड़े स्तर पर बिज़नेस कर रहे हैं तो आपको कंपनी बना कर ही बिज़नेस करना होगा|

कम्पनी भी दो तरह की होती हैं|

प्राइवेट लिमिटेड और पब्लिक लिमिटेड

Private Ltd Company:-

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी डिबेंचर issue कर सकती है| इस तरह की कंपनी में कुछ लोग जुड़ जाते हैं और वे ही लोग इस बिज़नस में पैसा लगाते हैं|

इस तरह की कंपनी में कम से कम 2 और ज्यादा से ज्यादा 200 लोग मेंबर हो सकते हैं|

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में कम से कम 1 लाख की कैपिटल हो सकती है ऊपर की कोई लिमिट नहीं है|

यहाँ आप पब्लिक से पैसा नहीं मांग सकते हैं|

Public Ltd Company:-

पब्लिक लिमिटेड कंपनी में कम से कम 7 मेंबर होते हैं और maximum लिमिट नहीं है| पब्लिक लिमिटेड कंपनी में कम से कम 5 लाख की कैपिटल होती है, Maximum लिमिट कोई नहीं है|

इस तरह की कंपनी को तब शुरू किया जाता है जब बहुत ज्यादा पैसे और Man Power की जरुरत होती है| पब्लिक लिमिटेड कंपनी ही शेयर और डिबेंचर issue करती है|

सरल शब्दों में कहें तो पब्लिक लिमिटेड कंपनी को यह अधिकार होता है की वह साधारण पब्लिक (जनता) से अपने बिज़नस के लिए पैसा मांग सकती है|

जैसे रिलायंस, टाटा, बिडला पब्लिक लिमिटेड कंपनी हैं

यह पैसा शेयर और डिबेंचर के रूप में जनता से माँगा जाता है|

शेयर को समझने के लिए एक छोटा सा उदहारण लेके समझ लेते हैं, इसके बाद डिबेंचर की विस्तार से चर्चा करेंगे| डिबेंचर को समझने के लिए शेयर का आधार समझना भी जरुरी है|

यदि आपको शेयर की जानकारी है तो आप स्किप करके आगे बढ़ सकते हैं|

What is Share in Hindi

शेयर को समझने के लिए एक उधाहरण लेते हैं|

मान लेते हैं कंपनी 1,00,000 रूपए जनता से इकठ्ठा करना चाहती है, 1,00,000/100 करें तो 1,000 आता है| इसका मतलब यह है 1,00,000 रूपए के 1,000 भाग (शेयर) कर दिए हैं| इसका अर्थ है 100 रूपए का एक शेयर हैं|

यदि आप इस कंपनी का एक शेयर खरीदेंगे तो आपको 100 रूपए देने होंगे| और 100 शेयर खरीदेंगे तो आपको 100*100, 10,000 रूपए देने होंगे|

सरल शब्दों में शेयर कम्पनी की Paid up कैपिटल का एक छोटा सा हिस्सा होता है|

आप कंपनी के जितने शेयर खरीदते हैं उसी हिसाब से शेयर होल्डर (शेयर मालिक) को profit (लाभ) में हिस्सा मिल जाता है| share holder अपने द्वारा ख़रीदे गए शेयर के आधार पर कंपनी का आंशिक रूप से मालिक होता है|

यदि आपके पास कंपनी के 30% शेयर हैं तो आप कंपनी के 30% तक के मालिक हैं|

यदि आप शेयर के बारे में ज्यादा जानकारी चाहते हैं तो यह आर्टिकल पढ़ लें (What is Share in Hindi).

What is Debenture in Hindi

Definition of Debenture:-

“A debenture is an instrument issued by the company under its common seal as acknowledgment of a debt. It contains the face value or nominal value of debenture, rate of interest, mode of payment of interest, tenure, and terms of redemption.”

कंपनी पैसा इकठ्ठा करने के लिए शेयर के अलावा डिबेंचर (ऋण पत्र) भी जारी कर सकती है| जहाँ शेयर में शेयर होल्डर को लाभ में हिस्सा मिलता है, वहीं डिबेंचर खरीदने वाले को कंपनी एक फिक्स्ड रेट ऑफ़ इंटरेस्ट (निश्चित ब्याज) देती है|

आइये विस्तार से जानते हैं डिबेंचर के बारे में (What is Debenture in Hindi).

सरल शब्दों में डिबेंचर एक सर्टिफिकेट और डॉक्यूमेंट है जो एक पब्लिक कंपनी के द्वारा जारी किया जाता है जिस पर कंपनी की सील लगी होती है|

यह एक तरह का ऋण पत्र है जिस पर डिबेंचर की फेस वैल्यू लिखी होती है, कंपनी, डिबेंचर होल्डर को कितना interest देगी, interest पेमेंट का तरीका क्या होगा, और कितने समय में डिबेंचर होल्डर को डिबेंचर का amount वापस होगा और पैसा वापस करने का तरीका क्या होगा| यह सब कुछ इस डिबेंचर के सर्टिफिकेट के शर्तों के पेज पर लिखा होता है|

सरल शब्दों में बात करें यदि आप किसी कंपनी का डिबेंचर डॉक्यूमेंट खरीद रहे हैं तो एक तरह से आप कंपनी को लोन दे रहे हैं जिस पर आपको एक निश्चित दर (Rate) पर ब्याज (Interest) मिलेगी, चाहे कंपनी को Profit (लाभ) और या loss (हानि)|

Features or Characteristics of Debentures in Hindi

डिबेंचर की विशेषताएं

  • डिबेंचर एक डॉक्यूमेंट और सर्टिफिकेट है जो यह दर्शाता है की डिबेंचर होल्डर का कंपनी पर ऋण है|
  • इस डॉक्यूमेंट पर कंपनी की सील लगी होती है, इस डॉक्यूमेंट पर रेट ऑफ़ इंटरेस्ट, ऋण वापस करने का समय और ऋण वापस करने का तरीका लिखा होता है|
  • डिबेंचर कंपनी के द्वारा जनता से लिया गया दीर्घ कालीन (Long Term) ऋण होता है| यानि 1 साल से ऊपर का कर्ज
  • डिबेंचर पर दी जाने वाली इंटरेस्ट (ब्याज) को कूपन रेट (Coupan Rate) कहा जाता है|
  • डिबेंचर पर इंटरेस्ट कंपनी को डिबेंचर होल्डर को पे करना ही पड़ेगा चाहे लाभ हो या हानि
  • डिबेंचर होल्डर को वोटिंग राईट का अधिकार नहीं होता है|
  • डिबेंचर का पैसा यदि कंपनी वापस नहीं करती है तो डिबेंचर होल्डर कंपनी पर कोर्ट केस करके वापस ले सकता है|

What is Face Value or Market Value of Debenture in Hindi

डिबेंचर की फेस वैल्यू और मार्किट वैल्यू क्या है

What is Face Value of Debenuture in Hindi

इसको एक उधाहरण से समझते हैं, यदि आप किसी कंपनी के डिबेंचर खरीदते हैं, डिबेंचर के डॉक्यूमेंट पर जो मूल्य लिखा रहता है उसे फेस वैल्यू कहते हैं|

मान लेते हैं आप 1,000, 10% Debenture Rs. 100 per Debenture के रेट से खरीदते हैं| आपने कंपनी को 1,00,000 रूपए दे दिए|

कंपनी आपको हर साल 1,00,000 का 10% interest हर साल देती रहेगी| कंपनी जिस प्राइस पर इंटरेस्ट देती है उसे ही फेस वैल्यू कहते हैं|

What is Market Value of Debenture in Hindi

यदि आप यह डिबेंचर किसी और को बेचना चाहते हैं तो आप इन्हें मार्किट वैल्यू पर बेच सकते हैं| मार्किट वैल्यू, फेस वैल्यू से कम ज्यादा और बराबर कुछ भी हो सकती है|

Difference between Bonds and Debentures in Hindi

आइये चर्चा करते हैं बांड्स और डिबेंचर में क्या अंतर है|

भारत में डिबेंचर और बांड्स को एक ही माना जाता है, लेकिन इन दोनों में हल्का सा अंतर है|

  1. यदि सरकारी एजेंसीज और कम्पनीज Financial Instrument कैपिटल इकठ्ठा करने के लिए जारी करती हैं तो उसे Bonds कहा जाता है| लेकिन पब्लिक और प्राइवेट कम्पनीज जारी करती है तो इसे Debenture कहा जाता है|
  2. बांड्स ज्यादा सिक्योर होते हैं और डिबेंचर कम सिक्योर
  3. डिबेंचर पर इंटरेस्ट रेट ज्यादा होता है लेकिन बांड्स पर कम
  4. बांड्स का मालिक बांड्स होल्डर और डिबेंचर का मालिक डिबेंचर होल्डर कहलाता है
  5. डिबेंचर पर इंटरेस्ट पहले से फिक्स्ड होती है और एक निश्चित समय के बाद लगातार दी जाती है, लेकिन बांड्स पर निश्चित समय के बाद भी दी जा सकती है और बांड्स का टाइम पीरियड पूरा होने के बाद भी दी जा सकती है

सरल शब्दों में यदि आपको समझाऊं यदि सरकार डिबेंचर जाती करती है तो इसे बांड्स कहा जाता है और कोई प्राइवेट कंपनी और पब्लिक कंपनी जारी करती है तो इसे डिबेंचर कहा जाता है|

Types of Debentures in hindi (डिबेंचर के प्रकार)

डिबेंचर भी कई तरह के होते हैं, इनमें लिखी गई शर्त के आधार पर इसका प्रारूप बदल जाता है| आइये चर्चा करते हैं अलग अलग तरह के डिबेंचर के बारे में|

Redeemable Debentures:-

इस तरह के डिबेंचर का पैसा निश्चित अवधि के बाद वापस करना होता है| यदि कंपनी ने पांच साल के लिए डिबेंचर जारी किये हैं तो पांच साल के बाद डिबेंचर का पैसा डिबेंचर होल्डर को वापस करना होता है|

Irredeemable Debentrues:-

इस तरह के डिबेंचर का पैसा कंपनी के द्वारा कम्पनी बंद होने के टाइम पर ही वापस किया जाता है|

Secured Debentures:-

इस तरह के डिबेंचर कंपनी के किसी न किसी assets के द्वारा सिक्योर किये जाते हैं| यदि कंपनी डिबेंचर का पैसा वापस करने में असमर्थ है, इस परिस्थिति में डिबेंचर होल्डर कंपनी की सम्पत्ति बेचकर बराबर कर सकता है|

Unsecured Debentures:-

इस तरह के डिबेंचर कंपनी assets के द्वारा सिक्योर नहीं होते हैं| यदि कंपनी बंद हो जाती है तो उस समय कंपनी डिबेंचर होल्डर का पैसा वापस करने के लिए बाध्य नहीं है|

Convertible Debentures:-

इस तरह के डिबेंचर maturity के टाइम पर कन्वर्ट किये जा सकते हैं| कहने का तात्पर्य यह है की यदि डिबेंचर का पैसा वापस करने का समय आ गया है तो कंपनी डिबेंचर होल्डर को cash की जगह अपने शेयर और अलग रेट ऑफ़ इंटरेस्ट वाले डिबेंचर दे सकती है|

Non-Convertible Debentures:-

इस तरह के डिबेंचर में पेमेंट के समय सिर्फ cash ही दिया जा सकता है|

Registered Debentures:-

रजिस्टर्ड डिबेंचर पर डिबेंचर होल्डर का नाम लिखा रहता है, जिसका नाम लिखा है इंटरेस्ट उसे ही मिलता है| यह आसानी से ट्रान्सफर नहीं हो सकता|

Bearer Debentures:-

इस तरह के डिबेंचर में डिबेंचर होल्डर का नाम नहीं लिखा होता है यह बेनामी होता है| यह डिबेंचर जिस व्यक्ति के पास होगा इंटरेस्ट और maturiy पर डिबेंचर का पैसा उसे ही मिलेगा

Coupon Rate Debentures:-

इस तरह के डिबेंचर पर रेट ऑफ़ इंटरेस्ट फिक्स्ड होता है, जैसे 10% Debenture

Zero Cupon Rate:-

इस तरह के डिबेंचर पर कोई फिक्स्ड रेट ऑफ़ इंटरेस्ट नहीं होता है| जारी करने के समय लिया गया अमाउंट और बापसी के समय दी जाने वाली राशी का अंतर ही इंटरेस्ट माना जाता है| इस तरह के डिबेंचर को Deep Discount Bonds बोला जाता है|

दोस्तों आशा करते हैं हमारे द्वारा दी गई डिबेंचर की जानकारी (What is Debenture and it types in hindi) आपको पसंद आई होगी|

यदि आपके कुछ doubts हैं तो आप कमेंट में बता सकते हैं| आपके पास कोई सुझाव हो तो viralfactsindia@gmail.com पर भेज सकते हैं|

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