गणेश चतुर्थी पूजा विधि और व्रत कथा | How to do Ganesh Chaturthi pooja in Hindi

गणेश चतुर्थी व्रत कथा एवं पूजा (पूजन) विधि इन हिंदी | Story of Ganesh Chaturthi fast Vidhi (procedure) in Hindi | Ganesh Chaturthi Vrat Katha or Vidhi in Hindi

गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार है| भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को यह मनाया जाता है| महाराष्ट्र में इसका अपना अलग महत्त्व है|

यहाँ बड़े बड़े पंडालों में गणेश जी की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाती है और पुरे 10 दिन तक पूजा अर्चना होती है और अनंत चतुर्थी के दिन पास की नदी और समुद्र में गणेश प्रतिमा को विसर्जित कर दिया जाता है|

माना जाता है विसर्जन के बाद भगवान् गणेश अपने धाम कैलाश चले जाते हैं|

यह त्यौहार अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार करीब सितम्बर और अगस्त के महीने में आता है| 2019 में गणेश चतुर्थी 2 सितम्बर को है|

आज हम चर्चा करेंगे गणेश चतुर्थी की पूजा विधि और व्रत कथा के बारे में| इसके आलावा संक्षिप्त में गणेश स्थापना विधि की भी वैदिक प्रक्रिया बताएँगे|

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मध्यनाह के समय विघ्नविनायक भगवान् गणेश का जन्म हुआ था| अतः इस तिथि में दोपहर को ही भगवान् गणेश की पूजा की जाती है|

इस दिन यदि रविवार और मंगलवार हो तो दिन और भी शुभ माना जाता है| गणेशजी हिन्दुओं के प्रथम पूज्य देवता है|

हिन्दुओं के घर में किसी भी शुभ कार्य और पूजा में सर्वप्रथम भगवान् गणेश जी की पूजा की जाती है|

गणपति विघ्नों को दूर करने वाले देवता है| इनका मुख हाथी का, उदार लम्बा तथा शेष शरीर मनुष्य के सामान है| मोदक इन्हें विशेष रूप से प्रिय है|

महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी एक राष्ट्रिय पर्व के रूप में मनाया जाता है|

गणेश चतुर्थी के दिन एक वार भोजन करने का विधान है| भोजन सायंकाल ही करने का प्रावधान है, तथापि पूजा यथासम्भव मध्याह्नमें ही करनी चाहिये, क्योंकि

पूजाव्रतेषु सर्वेषु मध्याह्नव्यापिनी तिथिः।

अर्थात् सभी पूजा-व्रतोंमें मध्याह्नव्यापिन, तिथि लेनी चाहिये।

वह आपके ऊपर निर्भर करता है आप भोजन में क्या लेना चाहते हो| लेकिन किसी भी प्रकार के तामसिक और गरिष्ठ भोजन नहीं करना चाहिए जिससे मन में कोई भी नकारात्मक भाव उत्पन्न हो|

प्याज,लहसुन शराब और मासाहार तो बिलकुल न करें|

गणेश चतुर्थी 2019 में कब मनाई जायेगी व् शुभ मुहुर्त कब है

गणेश पूजा 2 सितम्बर 2019, सोमवार
गणेश पूजा का मुहुर्त 11:11 से 13:41

आइये अब चर्चा करते हैं गणेश जी की प्रतिमा को अपने घर में कैसे स्थापित करें

गणेश स्थापना विधि

गणेश चतुर्थी के दिन स्नान करके समर्थ अनुसार मिट्टी, सोने चाँदी के गणेश जी बनवाएं और एक लाल चुन्नी ऊपर उड़ाकर घर में प्रवेश करवाएं|

घर की दरवाजे पर गणेशजी को प्रवेश कराने से पहले दरवाजे के दोनों और गंगाजल छिडकें| प्रवेश कराने से पहले ही गणेश जी स्थापित करने के लिए एक पूजा स्थान तैयार कर लें|

पूजा स्थान को तैयार करने की विधि इस प्रकार है|

गणेश जी का पूजा स्थान तैयार करने की विधि और सामग्री

सबसे पहले घर के ईशान कोण में स्वच्छ जगह पर रंगोली बनाएं

उस पर एक लड़की के पाटे या चौकी पर एक लाल अथवा पिला कपडा बिछाएं|

उस कपडे पर केले के पत्ते रख कर उस पर गणेशजी की मूर्ति स्थापित करें| ध्यान रहे गणेशजी को को इस तरह से घर में स्थापित करें की गणेशजी की पीठ आँखों के सामने न पड़े|

क्योंकि शास्त्रों के अनुसार गणेशजी की पीठ नहीं देखनी चाहिए|

इसके साथ एक पान पर सवा रूपया रख कर पूजा की सुपारी रखी जाती है|

इस नारियल को 10 दिन की पूजा के बाद प्रसाद के रूप में बाँट दिया जाता है|

इसके साथ साफ पानी भरकर ताबें के कलश की स्थापना की जाती है| ताबें के कलश पर आम के पत्ते रखकर एक पानी वाला नारियल रखा जाता है|

गणेश चतुर्थी पूजा सामग्री

  1. चौकी
  2. लाल कपड़ा
  3. गणेश प्रतिमा
  4. जल कलश
  5. पंचामृत
  6. रोली
  7. अक्षत
  8. कलावा
  9. जनेऊ
  10. गंगाजल
  11. सुपारी
  12. इलाइची
  13. नारियल
  14. चांदी का वर्क
  15. लौंग
  16. पंचमेवा
  17. घी कपूर

गणेश चतुर्थी पूजा विधि

Ganesh Chaturthi Pooja Procedure in Hindi

गणेश चतुर्थी पूजा विधि और व्रत कथा इन हिंदी

सबसे पहले कलश की पूजा की जाती है|

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथिको प्रात:काल स्नानादि नित्यकर्मसे निवृत्त होकर अपनी शक्तिके अनुसार सोने, चाँदी, ताँबे, मिट्टी, पीतल अथवा गोबरसे गणेशकी प्रतिमा बनाये या बनी हुई प्रतिमाका पुराणोंमें वर्णित गणेशजीके गजानन, लम्बोदरस्वरूपका ध्यान करे |

स्थापना के पश्चात गणेश जी को सिंदूर लगाएं और चांदी का वर्क लगाएं, जनेऊ, दूब, बूंदी के लड्डू, नारियल आदि सामग्री भगवान् को अर्पित करें

गणेश जी की प्रतिमा के सामने खड़े होकर निम्न मन्त्र पढ़ें|

गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्।
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥

और अक्षतपुष्प लेकर निम्न संकल्प करे|

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः अद्य दक्षिणायने सूर्ये वर्षतौं
भाद्रपदमासे शुक्लपक्षे गणेशचतुर्थ्यां तिथौ अमुकगोत्रोऽमुकशर्मा
/ वर्मा / गुप्तोऽहं विद्याऽऽरोग्यपुत्रधनप्राप्तिपूर्वकं सपरिवारस्य
मम सर्वसंकटनिवारणार्थं श्रीगणपतिप्रसादसिद्धये
चतुर्थीव्रताङ्गत्वेन श्रीगणपतिदेवस्य यथालब्धोपचारैः पूजनं करिष्ये

हाथमें लिये हुए अक्षत-पुष्प इत्यादि गणेशजीके पास छोड़ दे। इसके बाद

विघ्नेश्वरका यथाविधि ‘ॐ गं गणपतये नमः’

से पूजन कर दक्षिणाके पश्चात् आरती कर गणेशजी को नमस्कार करे एवं गणेशजीकी मूर्तिपर सिन्दूर चढ़ाये! मोदक और दूर्वाकी इस पूजामें विशेषता है।

अत: पूजा के अवसरपर इक्कीस दूर्वादल भी रखे तथा उनमेंसे दो-दो दूर्वा निम्नलिखित दस नाममन्त्रोंसे क्रमश: चढ़ाये

  1. ॐ गणाधिपाय नमः
  2. ॐ उमापुत्राय नमः
  3. ॐ विघ्ननाशनाय नमः
  4. ॐ विनायकाय नमः
  5. ॐ ईशपुत्राय नमः
  6. ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः
  7. ॐ एकदन्ताय नमः
  8. ॐ इभवक्त्राय नमः
  9. ॐ मूषकवाहनाय नमः
  10. ॐ कुमारगुरवे नमः

पश्चात् दसों नामों का एक साथ उच्चारण कर अवशिष्ट एक दूब चढ़ाये। इसी प्रकार इक्कीस लड्डू भी गणेश पूजामें आवश्यक होते हैं।

इक्कीस लड्डू का भोग रखकर पाँच लड्डु मूर्ति के पास चढ़ाये, और पाँच ब्राह्मण को दे एवं शेष को प्रसादस्वरूप स्वयं ले ले तथा परिवार के लोगों में बाँट दे।

पूजनकी यह विधि चतुर्थी के मध्याह्न में करे। ब्राह्मण भोजन कराकर दक्षिणा दे और स्वयं भोजन करे।

पूजनके पश्चात् नीचे लिखे मन्त्रसे वह सब सामग्री ब्राह्मणको निवेदन करे

दानेनानेन देवेश प्रीतो भव गणेश्वर।
सर्वत्र सर्वदा देव निर्विघ्नं कुरु सर्वदा।
मानोन्नतिं च राज्यं च पुत्रपौत्रान् प्रदेहि मे।

इस व्रतसे मनोवाञ्छित कार्य सिद्ध होते हैं|

गणेशजी का यह पूजन बुद्धि, विद्या तथा ऋद्धि-सिद्धिकी प्राप्ति एवं विघ्नोंके नाशके लिये किया जाता है

कई व्यक्ति श्रीगणेशसहस्रनामावली के एक हजार नामा से प्रत्येक नाम के उच्चारण के साथ लड्डू अथवा दूर्वादल आदि श्रीगणेशजी को अर्पित करते हैं। इसे गणपतिसहस्रार्चन कहा जाता है।

गणेश चतुर्थी व्रत विधि

Ganesh Chaturthi vrat procedure in Hindi

गणेश चतुर्थी का व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को रखते हैं| इस दिन मध्यान्ह (दोहपर) में पूजा करने का विधान है| और एक व्रत रखने वाले एक समय ही खाना खाएं|

व्रत के खाने में तामसिक और गरिष्ट भोजन जैसे प्याज, लहसुन, शराब तम्बाकू, और मासाहार पूरी तरीके प्रतिबंधित है| आप व्रत के भोजन में सात्विक और हल्का भोजन ही लें और गणेश जी के मनपसंद लड्डू को प्रसाद रूप में जरुर लें|

खाने में दही, दूध, मीठा कुछ भी ले सकते हैं|

लेकिन इस व्रत में मीठा खाने का प्रावधान हैं| कई भक्त केवल बेसन और बूंदी के लड्डू से ही व्रत तोड़ते हैं|

अब प्रश्न यह आता है कितने दिन तक व्रत रखें| वैसे तो यह आपको श्रद्धा पर निर्भर है| आप केवल गणेश चतुर्थी का ही व्रत रख सकते हैं |

या फिर पुरे 10 तक अनंत चतुर्थी तक व्रत रखें आपकी श्रद्धा के ऊपर है| लेकिन यदि आपका स्वास्थय ठीक है तो पुरे 10 दिन तक व्रत रख सकते हैं|

गणेश चतुर्थी व्रत कथा

Ganesh Chaturthi Fast Story in Hindi

एक समय भगवान् शंकर स्नान हेतु कैलाश पर्वत से भोगवती नामक स्थान पर गये। उसी समय घर पर पार्वती ने स्नान करते समय अपने मैल का एक पुतला बनाकर सजीव कर दिया।

उस का नाम देवी ने गणेश रखा। गणेश को देवी ने आज्ञा दी कि तुम द्वार पर पहरा दो| किन्तु यह ध्यान रखें कि अन्दर कोई प्रवेश ना कर पावें।

थोड़ी ही देर में शंकर जी आ गये और घर के अन्दर जाना चाहा तभी गणेश ने उन्हें रोक दिया।

इससे क्रोधित होकर शंकर जी ने त्रिशूल से उनका सिर काट दिया।

टेढी भृकुटि वाले शिव जब अन्दर पहुँचे तो शैलजा ने समझा भोजन में विलंब के कारण कुपित हैं। इसलिए शीघ्र ही भोजन करने का निवेदन किया।

दो पात्रों में भोजन लगा देख दिगम्वर शिव ने पार्वती से पूछा कि यह दूसरा पात्र किसके लिए लगाया गया है?

पार्वती बोली द्वार पर पहरा देने वाले लाडले पुत्र गणेश के लिए है। यह सुनकर शिव ने कहा कि मैंने तो उनकी जीवन लीला समाप्त कर दी। तब पार्वती बहुत दुःखी हुई।

देवी को प्रसन्न करने के लिए शिव ने तुरंत पैदा हुए हाथी के बच्चे का सिर काट कर बालक के धड़ से जोड़ भोजन करके स्वयं भोजन किया|

यह घटना भाद्र शुक्ल चतुर्थी को घटित हुई थी, इससे इसका नाम गणेश चतुर्थी पड़ा.

बोलो गणेश भगवान की जय

आशा करते हैं गणेश चतुर्थी की पूजा विधि और व्रत कथा (Story of ganesh chaturthi fast and pooja vidhi in hindi) की जानकारी से आपका ज्ञानवर्धन अवश्य हुआ होगा|

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