क्यों नहीं करने चाहिए भगवान गणेश की पीठ के दर्शन

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why dont see back of lord ganesha

why dont see back of lord ganesha :-  गणपति बप्पा दर्शन मात्र से ही सारे दुःख हर लेते हैं| श्री गणेश ज्ञान और बुद्धि के देवता हैं| इनके नित्य दर्शन से मन शांत रहता है| और सभी कार्य सफल होते हैं|

श्री गणेश के जीवन से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है| गणेश स्वयंम ज्ञान का प्रतीक है और ज्ञान हमें जीवन में सहजता प्रदान करता है| मुश्किल समय में सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है|

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श्री गणेश के हर एक अंग का अपना महत्व है| गणेशजी का शरीर जीवन और ब्रह्मांड का प्रतीक हैं।

गणेशजी का बड़ा पेट उदारता और सम्रधि(prosperity) को दर्शाता है ।

गणेशजी का ऊपर उठा हुआ हाथ रक्षा का प्रतीक है – अर्थात, ‘Don’t worry, मैं तुम्हारे साथ हूँ’

श्री गणेश का  झुका हुआ हाथ, जिसमें हथेली बाहर की ओर है,उसका अर्थ है, अनंत दान, जो सच्ची श्रद्धा से मांगोगे वो मिलेगा|

गणपति एकदन्त हैं , जिसका अर्थ है एकाग्रता।  हाथों में अंकुश  जागृत अवस्था(consious) , और पाश  नियंत्रण का प्रतीक है|

जागृति के साथ, बहुत सी ऊर्जा उत्पन्न होती है और बिना किसी नियंत्रण के उससे व्याकुलता हो सकती है ।

गणेशजी, का वाहन चूहा प्रतीक है अज्ञानता से स्वतंत्रता का| जैसे एक चूहा उन रस्सियों को काट कर अलग कर देता है जो हमें बांधती हैं|

चूहा उस मन्त्र के समान है जो अज्ञान की अनन्य परतों को पूरी तरह काट सकता है, और उस परम ज्ञान को प्रत्यक्ष कर देता है जिसके भगवान गणेश प्रतीक हैं ।

गणेशजी के शरीर पर जीवन और ब्रह्मांड से जुड़े अंग निवास करते हैं।

गणेशजी की सूंड पर धर्म विद्यमान है तो कानों पर ऋचाएं, दाएं हाथ में वर, बाएं हाथ में अन्न, पेट में समृद्धि, नाभी में ब्रह्मांड,

आंखों में लक्ष्य, पैरों में सातों लोक और मस्तक में ब्रह्मलोक विद्यमान है। गणेशजी के सामने से दर्शन करने पर उपरोक्त सभी सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त हो जाती है।

लेकिन गणेशजी की पीठ के दर्शन नहीं करने चाहिए| पुराणों के अनुसार श्री गणेश की पीठ पर होता है दरिद्रता का वास

गणेशजी की पीठ के दर्शन करना अशुभ मन जाता है| जिससे धन और वैभव की कमी का सामना करना पड़ सकता है|

लेकिन यदि पीठ के दर्शन गलती से हो जायें तो क्षमा याचना करके गणेशजी पूजा घर में रखनी चाहिए दोष दूर हो जाता है

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