Dr Sarvepalli Radhakrishnan Biography (History) in Hindi | डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जीवन परिचय

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DR. Sarvepalli Radhakrishnan Biography History and story in hindi | डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जीवनी और जीवन परिचय | 

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति (1952-1962) और भारत के द्वितीय राष्ट्रपति (1962-1967) थे| इनका जन्म 5th सितम्बर 1888 को मद्रास (वर्तमान में चेन्नई) के तिरुमंनी गाँव में हुआ था|

डॉ राधाकृष्णन 20वीं सदी के ‘भारतीय दर्शन शास्त्र’ और ‘तुलनात्मक धार्मिक अध्ययन'(Comparative religion study) के विख्यात विद्वान् थे|

वे हिन्दू धर्म के सबसे बड़े अनुयायी थे| इन्होने पश्चिम सभ्यता के मन में जो हिन्दू धर्म के लिए भ्रांतियां थी उनको दूर करने का प्रयास किया|

हिन्दू धर्म को सिर्फ धर्म के रूप में न देखकर इन्होने हिन्दू धर्म की हिन्दू दर्शन शास्त्र के रूप में 20वीं सदी के समकालीन समाज के लिए पुनर्व्याख्या की|

हिन्दू धर्म की मान्यता “अद्वैत वेदांत” का इन्होने ठोस तथ्यों के आधार पर प्रचार प्रसार किया|

हम यहाँ आपको बता दें “अद्वैत वेदांत” एक हिन्दू धर्म की मान्यता है जिसके अनुसार हर एक इंसान के अन्दर आत्मा (soul) उस परमात्मा (ब्रह्म) का ही एक अंश हैं| अर्थार्थ हम सब और प्रत्येक जीव उस परम ब्रह्मा का ही एक अंश है|

डॉ राधाकृष्णन सर्वपल्ली को इनके पूरे जीवन में कई विशिष्ट पुरुष्कारों से सम्मानित किया गया| 1954 में इन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया|

हम यहाँ आपको बता दें 1954 में पहली वार भारत रत्न का पुरुष्कार दिया गया | इसको पाने वाले तीन भारतीय नागरिक थे डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन, चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, डॉ चन्द्रशेखर वेंकटरमण

दोस्तो आइये जानते हैं डॉ राधाकृष्णन सर्वपल्ली के सम्पूर्ण जीवन (DR. Sarvepalli Radhakrishnan Biography and History in Hindi) के बारे में विस्तार से

DR. Sarvepalli Radhakrishnan Biography in Hindi | डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जीवनी और जीवन परिचय | 

क्रमांकParticularDetail
1.पूरा नामडॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन
2.जन्म5 सितम्बर 1888
3.जन्म स्थानतिरुमानी गाँव मद्रास
4.धर्महिन्दू ब्राह्मण
5.पितासर्वपल्ली वीरास्वामी
6.मातासिताम्मा
7.पत्नीसिवाकमु
8.बच्चे5 बेटी 1 बेटा

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Dr sarvepalli Radhakrishnan Life History in Hindi

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का प्रारंभिक जीवन (Early Life of Dr sarvpalli Radhakrishnan ):-

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म तेलुगु भाषित, नियोगी ब्राह्मण परिवार में मद्रास (वर्तमान में चेन्नई) के एक गाँव तिरुत्तनी में हुआ था|

इनके परिवार के पूर्वजों का मूल निवास सर्वपल्ली गाँव था| जो की आंध्र प्रदेश के नेल्लोर (Nellore) से लगभग 15 किलोमीटर दूर है| इसलिए इनके परिवार के सदस्य अपने नाम के आगे सर्वपल्ली लगाते हैं|

इनके पिता का नाम सर्वपल्ली वीरास्वामी और माता का नाम सर्वपल्ली सिताम्मा है| ये अपने जीवन के प्रारंभिक समय में थिरुत्तनी और तिरुपति में ही रहे| इनके पिता एक स्थानीय जमींदार के यहाँ सहायक राजस्व अधिकारी थे|

प्रारंभिक शिक्षा:-

डॉ राधाकृष्णन ने अपने बाल्यकाल का ज्यादातर समय तिरुतानी और तिरुपति में ही बिताया|

इनकी प्रारंभिक शिक्षा क्रिस्चन मिशनरी लुथर्न मिशन स्कूल में (1896-1900) हुई| इसके बाद इन्होने वेल्लूर के कॉलेज में दाखिला लिया|

इसके पश्चात आगे की शिक्षा के लिए मद्रास क्रिश्चन कॉलेज में  दाखिला लिया| यहाँ से इन्होने 1906 में दर्शन शास्त्र से M.A की डिग्री प्राप्त की| राधाकृष्णन बचपन से मेधावी छात्र थे और पुरे विधार्थी जीवन में इन्हें कई बार स्कालरशिप मिलती रही|

अपने पूरे विद्यार्थी जीवन काल में इन्होने कई धर्म ग्रंथों का गहन अध्यन किया| बाइबल को इन्होने गहनता से पढ़ा| स्वामी विवेकानंद और वीर सावरकर के विचारों से यह बहुत प्रभावित हुए|

पश्चिम के विचारकों और विद्वानों के द्वारा हिन्दू धर्म के खिलाफ लिखे गए लेखों से यह बड़े आहत थे| और पश्चिम के लोगों के मन में जो हिन्दू धर्म के प्रति वैचारिक दुर्भावना को यह दूर करना चाहते थे|

अपने इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए इन्होने विधार्थी जीवन से ही कार्य करना शुरू कर दिया था|

राधाकृष्णन ने अपनी M.A की thesis(शोध प्रवंध) ही “The Ethics of the Vedanta and its Metaphysical
Presuppositions” पर लिखी थी|

इस thesis में इन्होने उन पश्चिमी विचारकों के हिन्दू धर्म के खिलाफ लिखे गए उनके पूर्वाग्रह से ग्रसित विचारों को वेदों के तथ्यों के आधार पर खंडित किया था|

राधाकृष्णन को डर था की उनके दर्शन शास्त्र के प्रोफेसर ‘डॉ अल्फ्रेड जॉर्ज हॉग’ को शायद उनकी thesis पसंद न आये|

लेकिन डॉ अल्फ्रेड ने इनके काम की सराहना की| जब यह सिर्फ 20 साल के थे, इनकी thesis को पब्लिश कर दिया गया|

शादी और परिवार:-

राधाकृष्णन का विवाह 16 साल की उम्र में सिवाकमु से हो गया था|  उस समय इनकी पत्नी की आयु सिर्फ 10 साल थी| यह शादी एक अरेंज्ड मैरिज थी| इनके 5 बेटियां और 1 बेटा है| इनकी पत्नी का 1956 में निधन हो गया था|

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का शिक्षण करिअर:-

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन को अप्रैल 1909 में मद्रास प्रेसीडेंसी कॉलेज में दर्शन शास्त्र के कार्यालय में नियुक्त किया गया|

1918 में ‘University of Mysore’ में दर्शन शास्त्र के प्रोफेसर के रूप में इन्हें नियुक्त किया गया| मैसूर के महाराजा कॉलेज में इन्होने दर्शन शास्त्र पढाया|

1921 को कलकत्ता विश्वविद्यालय में दर्शन शास्त्र के प्रोफेसर नियुक्त किये गए| इन्होने जून 1926 में ‘Universities of the British Empire’ के महासम्मेलन में ‘यूनिवर्सिटी ऑफ़ कलकत्ता’ का प्रतिनिधित्व किया|

इसके बाद सितम्बर 1926 में भी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में हुए ‘International Congress of Philosophy’ में भी कलकत्ता विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया|

1929 में Hibber trust द्वारा ‘Hibbert Lecture’ के लिए मेनचेस्टर कॉलेज ऑक्सफ़ोर्ड में invite किया| इनके द्वारा दिया गया पूरा भाषण ‘An Idealist view of Life’ नाम की किताब के रूप में पब्लिश किया गया|

1929 में मेनचेस्टर कॉलेज ने इन्हें प्रिंसिपल की पोस्ट के लिए invite किया| इन्होने ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में छात्रों के सामने ‘Comparative Religion’ पर अपने विचार रखे|

इसके बाद 1931 से 1936 तक आन्ध्रा यूनिवर्सिटी के vice-Chancellor रहे| 1936 में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में ‘ईस्टर्न रिलिजन’ के प्रोफेसर के रूप में मनोनीत किये गए|

1937 में साहित्य के क्षेत्र में इन्हें नावेल पुरुष्कार के लिए नामांकित किया गया| इसके बाद 1960 में भी नावेल पुरुष्कार के दावेदारों की सूचि में शामिल थे

1939 को पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने इन्हें बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के ‘vice chanceller’ के पद के लिए आमंत्रित किया| और 1948 तक इस विश्वविद्यालय के vice-chancellor रहे|

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का राजनितिक जीवन:-

डॉ राधा कृष्णन का राजनितिक जीवन देर से शुरू हुआ| उनकी एक शिक्षक और हिन्दू दर्शन शास्त्र के प्रोफेसर के बतौर उनकी विश्व में ख्याति ने उनका भारतीय राजनीती में आने का रास्ता बनाया|

1931 में इन्हें ‘Committee for Intellectual Cooperation’ जो की एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है, सदस्य बनाया गया|
इसके बाद पश्चिमी देशों में ‘हिंदुत्व के representative’के बतौर इन्हें ख्याति प्राप्त हुई|

राधाकृष्णन के इन्ही गुणों के फलस्वरूप जवाहरलाल नेहरु इनसे बहुत प्रभावित थे| देश की आजादी के बाद इन्होने UNESCO(1946-52)में भारत का प्रतिनिधित्व किया|

जवाहरलाल नेहरु और कांग्रेस पार्टी की सलाह पर वे1949 से 1952 तक सोवियत संघ में भारत के राजदूत की हेसियत से भी काम किया| वे 1947 से 1949 तक संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य भी रहे|

राजनीती में अपने अभूतपूर्व योगदान को देखते हुए 1952 में इन्हें भारत का उप राष्ट्रपति चुना गया| इस पद पर ये 1962 तक रहे| इसके 1962 में इन्हें राष्ट्रपति पद के लिए चुन लिया गया| इस पदभार पे ये 1967 तक रहे|

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन न तो congress पार्टी के कभी सदस्य रहे न ही इन्होने भारत के स्वतंत्रता लड़ाई में भाग लिया| वे एक हिन्दू धर्म के defender(रक्षक) के रूप में जाने जाते थे|

इनके शिक्षक जीवन का सर्वोपरि लक्ष्य था, हिन्दू धर्म की समकालीन समय के अनुसार एक साफ़ सुथरी  छवि भारत में और पश्चिम देशों में रखना|

पुरुष्कार और सम्मान:-

जून 1931 को जॉर्ज पंचम के द्वारा ‘knight Bachelor’ की उपाधि से सम्मानित किया गया|

1938 ‘British Academy’ के फेलो चुने गए

1954 में भारत के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किये गए|

1961 जर्मन बुक ट्रेड की तरफ से पीस प्राइज दिया गया

1962 से राधाकृष्णन के सम्मान में उनका जन्मदिवस 5 सितम्बर ‘शिक्षक दिवस के तौर पर पूरे देश में सेलिब्रेट किया जाता है|

1963 ब्रिटिश आर्डर ऑफ़ मेरिट से सम्मानित किया गया

1968 में साहित्य अकादमी ने साहित्य अकादमी फ़ेलोशिप से सम्मानित किया गया| लेखकों को दिया जाने वाला सबसे बड़ा सम्मान

1975 में इनकी मर्त्यु से कुछ महीने पहले इन्हें ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के द्वारा ‘Templeton Prize’ से सम्मानित किया गया| इस सम्मान की सम्पूर्ण राशि इन्होने ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में ही दान कर दी थी|

1989 में ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी ने इनके सम्मान में राधाकृष्णन स्कालरशिप की शुरुवात की जिसका नाम बाद में बदलकर “राधाकृष्णन चेवेनिंग स्कालरशिप” कर दिया गया|

इन्हें 16 बार साहित्य में नोबल प्राइज के लिए और 11 बार नोबल पीस प्राइज के लिए नामांकित किया गया|

म्रत्यु:-

17 अप्रैल 1975 को लम्बी बीमारी के बाद 87 साल की उम्र में डॉ राधाकृष्णन का निधन हो गया| शिक्षा के क्षेत्र में इनके योगदान के फलस्वरूप इनके जन्म दिवस 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है|

राधाकृष्णन द्वारा लिखी गई किताबें:-

1. “The Philosophy of Rabindranath Tagore” (1918) publisher Macmillan, London

2. “Indian Philosophy” (1923) Publisher Oxford University Press

3. “The Hindu view of Life” (1926)

4. “An Idealist view of Life” (1929)

5. “Eastern Religions and Western Thought” (1939) Publisher Oxford University Press

6. “Religion of Society” (1947), Publisher George Allen and Unwin Ltd., London

7. “The Bhagavadgita with an introductory”, sanskrit text, english translation (1948)

8. “The Dhammapada” (1950) Publisher Oxford University Press

9. “The Principal Upanishads” (1953) Publisher HarperCollins Publisher Ltd

10. “Recovery of Faith” (1956)

11. “A source Book of Indian Philosophy” (1957) Publisher Princeton Unviersity press

12. “Religion, Science and Culture” (1968)

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन पर लिखी गई किताबें:-

‘The Philosophy of Sarvepalli Radhakrishnan’ 1992, Author Schilpp, Aaul Arthur
pulisher Motilal Banarsidaas

“Radhakrishnan: his life and ideas” (1990) Author Murty, K, satchidananda publisher
suny press

“Radhakrishnan: A religious biography” Author Minor, Robert Neil(1987) Publisher
sunny Press

“RAdhakrishnan: A Biography” Author Gopal, Sarvepalli(1989) Publisher Unwin Hyman

“New Essays in the Philosophy of Sarvepalli RAdhakrishnan” (1995) Author Pappu, S.S Rama publisher Rao Publishers Asia Books

“Radhakrishnan: Centenary volume” (1989) Author Parthasarathi, G, Chattopadhyaya, Debi Parasad Publishers Oxford University Press

दोस्तो, डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के बारे में हमारे द्वारा दी गई जानकारी (Dr. sarvepalli Radhakrishnan information in hindi) जरूर पसंद आई होगी|

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