Chanakya Niti Fourth Chapter Hindi English | चाणक्य नीति चतुर्थ अध्याय

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Chanakya niti fourth chapter with meaning in hindi english

Chanakya Niti fourth 4th chapter 4 shlokas with meaning in Hindi English | चाणक्य नीति तृतीय अध्याय श्लोक हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित

चाणक्य भारत के इतिहास के सबसे बड़े राजनीतिज्ञ माने जाते हैं| इन्होने अपने जीवन के अनुभव के आधार पर विभिन्न शास्त्रों से संस्कृत श्लोक का संग्रह किया जिसे चाणक्य निति कहा गया|

इसी ग्रन्थ का चौथा 4th अध्याय हिंदी और इंग्लिश अर्थ के साथ (chanakya niti fourth chapter with meaning in Hindi english) आपके समुख प्रस्तुत है|

Chanakya Niti Chapter 4 with Meaning in Hindi English (1-10)

चाणक्य नीति चतुर्थ अध्याय हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित

संस्कृत श्लोक – 1

आयुः कर्म वित्तञ्च विद्या निधनमेव च।
पञ्चैतानि हि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः।।1।।
दोहा – 1
आयुर्बल ओ कर्म, धन, विद्या अरु मरण ये ।
नीति कहत अस मर्म, गर्भहि में लिखि जात ये ।।1।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि आयु, कर्म, वित्त (धन), विद्या, निधन-ये पांचों चीजें प्राणी के भाग्य में तभी लिख दी जाती हैं, जब वह गर्भ में ही होता है।

अभिप्राय यह है कि मनुष्य जब मां के गर्भ में होता है, तभी पांच चीजें उसके भाग्य में लिख दी जाती है – आयु, कर्म, धन-सम्पत्ति, विद्या और मृत्यु इन पांचों में बाद में कोई भी परिवर्तन नहीं हो सकता।

जितनी उम्र होती है उससे एक पल भी पहले उसे कोई नहीं मार सकता। वह जो भी कर्म करता है, उसे जो भी धन-सम्पदा और विद्या मिलती है, वह सब पहले से ही तय होता है। जब उसकी मृत्यु का समय आ जाता है तो एक क्षण के लिए भी फिर उसे कोई नहीं बचा सकता।

English Meaning:- These five: the life span (age of Human), the type of work one carry out in his life, wealth, and learning (Education) and the time of one’s death are determined while one is in the womb.

संस्कृत श्लोकास – 2

साधुभ्यस्ते निवर्तन्ते पुत्रः मित्राणि बान्धवाः।
ये च तैः सह गन्तारस्तद्धर्मात्सुकृतं कुलम्।।2।।

दोहा

बॉधव जनमा मित्र ये, रहत साधु प्रतिकूल ।।
ताहि धर्म कुल सुकृत लहू, वो उनके प्रतिकूल ।।३।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य यहां संतों की सेवा को महत्त्व देते हुए कहते हैं कि संसार के अधिकतर पुत्र, मित्र, भाई, साधु-महात्माओं, विद्वानों आदि साधुओं और सज्जन लोगों की संगति से दूर रहते हैं। जो लोग सत्संगति करते हैं, वे अपने कुल को पवित्र कर देते हैं।

अभिप्राय यह है कि आज कल लगभग सभी लोग सत्संग से दूर रहते हैं, किन्तु जो व्यक्ति सच्चे ज्ञानी-महात्माओं का साथ करते हैं, वे अपने कुल को पवित्र करते हैं और उस पुरे कुल का समाज में सम्मान और भला होता है

English Meaning:- In todays world, all sons,friends,borthers and relatives
keep themselves away from noval and gentle one, yet those who follow them bring merit and prosperity to their families.

संस्कृत श्लोक – 3

दर्शनध्यानसंस्पर्शेर्मत्स्यी कुर्मी च पक्षिणी।
शिशु पालयते नित्यं तथा सज्जनसंगतिः।।3।।

दोहा – 3

मच्छी पच्छिनि कच्छपी, दरस, परस करि ध्यान ।।
शिशु पाले नित तैसे ही, सज्जन संवा प्रमान ।।३।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य यहां सत्संगति की चर्चा करते हुए कहते हैं कि जैसे मछली, मादा कछुआ और चिड़िया अपने बच्चों का पालन क्रमशः देखकर, ध्यान देकर तथा स्पर्श से करती है, उसी प्रकार सत्संगति भी हर स्थिति में मनुष्यों का पालन करती है।

अभिप्राय यह है कि मछली अपने बच्चों का पालन उन्हें बार-बार देखकर करती है, मादा कछुआ ध्यान लगाकर बच्चों को देखती है और मादा पक्षी बच्चों को पंखों से ढककर उनका पालन करते हैं। सज्जनों का साथ भी मनुष्य की इसी तरह देखरेख करता है। जहां तक हो पुण्य कर्म करें|

English Meaning:- Chanakya says, Fish, tortoises, and birds bring up their children by means of sight, attention and touch; so do saintly or gentle men protect and cherish
their associates by the same means.

संस्कृत श्लोक – 4

यावत्स्वस्थो ह्ययं देहः तावन्मृत्युश्च दूरतः।
तावदात्महितं कुर्यात् प्रणान्ते किं करिष्यति।।4।।

दोहा – 4

जोलों देह समर्थ है, जबलों मरिबो टूरि।।
तौलों आतम हित करे, प्राण अन्त सब धूरि ।।4।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य यहां इन पंक्तियों में आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हुए प्रबोधित कर रहे हैं कि जब तक शरीर स्वस्थ है, तभी तक मृत्यु भी दूर रहती है।

अतः तभी आत्मा का कल्याण (आत्म बोध) कर लेना चाहिए। प्राणों का अंत हो जाने पर यह जन्म भी व्यर्थ चला जाएगा| केवल पश्चाताप ही शेष रहेगा।

यहां आशय यह है कि जब तक शरीर स्वस्थ रहता है, तब तक मृत्यु का भी भय नहीं रहता। अतः इसी समय में आत्मा और परमात्मा को पहचानकर आत्मकल्याण कर लेना चाहिए। मृत्यु हो जाने पर कुछ भी नहीं किया जा सकता।

आचार्य चाणक्य का कहना है कि समय गुजरता रहता है, और न जाने कब व्यक्ति को रोग घेर ले और कब मृत्यु का संदेश ले यमराज के दूत द्वार पर आ खड़े हों, इसलिए मानव को चाहिए कि वह जीवन में अधिक से अधिक पुण्य कर्म करे। क्योंकि समय का क्या भरोसा, अच्छे और भलाई के कार्य समय पर ही कर लेना चाहिए।

English Meaning- As long as your body is healthy and under control, death is far away, this is the best time for self realization;when your body would suffer with disease and your death is near what can you do.

संस्कृत श्लोक – 5

कामधेनुगुणा विद्या ह्ययकाले फलदायिनी।
प्रवासे मातृसदृशा विद्या गुप्तं धनं स्मृतम्।।5।।

दोहा – 5

बिन ओसरहू देत फल, कामधेनु सम नित्त ।।
माता सों परदेश में, विया संचित बित्त ।।5।।

हिंदी अर्थ – आचार्य चाणक्य यहां विद्या के महत्त्व का वर्णन करते हुए कहते हैं। विद्या कामधेनु के समान गुणों वाली है, बुरे समय में भी फल देने वाली है, प्रवास काल में मां के समान है तथा गुप्त धन है।

आशय यह है कि विद्या कामधेनु के समान सभी इच्छाओं को पूरा करने वाली है। बुरे से बुरे समय में भी यह साथ नहीं छोड़ती। घर से कहीं बाहर चले जाने पर भी यह मां के समान रक्षा करती है। यह एक गुप्त धन है, इस धन को कोई नहीं देख सकता।

आचार्य चाणक्य मानते हैं कि विद्या एक गुप्त धन है अर्थात् एक ऐसा धन है जो दिखाई नहीं देता पर वह है और अनुभव की वस्तु है। जिसका हरण तथा विभाजन नहीं हो सकता, अतः वह सब प्रकार से सुरक्षित और विश्वसनीय भी है। वही समय पड़ने पर आदमी के काम आता है।

English Meaning:- Learning (Eduction) is like a cow of desire (kaam Dhenu). It, helps always good and bad time. Like a mother, it feeds and protect you on your journey. Therefore learning is a hidden treasure.

संस्कृत श्लोक – 6

एकोऽपि गुणवान पुत्रो निर्गुणैश्च शतैर्वरः।
एकश्चन्द्रस्तमो हन्ति न ताराः सहस्रशः।।6।।

दोहा – 6

सो निर्गुनियन से अधिक, एक पुत्र सुविचार।
एक चन्द्र तम कि हरे, तारा नहीं हजार।।६।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य गुण तथा योग्यता के आधार पर पुत्र के महत्त्व को प्रतिपादित करते हुए कहते हैं कि केवल एक गुणवान् और विद्वान पुत्र सैकड़ों गुणहीन, निकम्मे पुत्रों से अच्छा होता है।

जिस प्रकार एक चांद ही रात्रि के अंधकार को दूर करता है, असंख्य तारे मिलकर भी रात्रि के गहन अंधकार को दूर नहीं कर सकते, उसी प्रकार एक गुणी पुत्र ही अपने कुल का नाम रोशन करता है, उसे ऊंचा उठाता है; ख्याति दिलाता है।

सैकड़ों निकम्मे पुत्र मिलकर भी कुल की प्रतिष्ठा को ऊंचा नहीं उठा सकते। निकम्मे गुणहीन पुत्र अपने बुरे कामों से कुल को कलंकित करते हैं उनका होना भी किसी काम का नहीं। वे तो अनर्थकारी कुल को समाज में अपमानित करने वाले ही होते हैं।

English Meaning:- A single son endowed with good qualities and character is far better than a hundred devoid and worthless of them. For the moon, though one, dispels the darkness, which the stars, though numerous, cannot.

संस्कृत श्लोक – 7

मूर्खश्चिरायुर्जातोऽपि तस्माज्जातमृतो वरः।
मृतः स चाल्पदुःखाय यावज्जीवं जडो दहेत्।।7।।

दोहा – 7

मूर्ख चिरयन से भलो, जन्मत हो मरि जाय।
मरे अल्प दुख होइहैं, जिये सदा दुखदाय ।।7।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य यहां इस श्लोक में मूर्ख पुत्र की निरर्थकता पर टिप्पणी करते हुए कहते हैं कि मूर्ख पुत्र का चिरायु होने से मर जाना अच्छा है, क्योंकि ऐसे पुत्र के मरने पर एक ही बार दुःख होता है, जिन्दा रहने पर वह जीवन भर जलाता रहता है।

संसार में ऐसे अनेक उदाहरण हैं कि मूर्ख पुत्रों ने विरासत में पाए विशाल साम्राज्य को धूल में मिला दिया। पिता की अतुल सम्पत्ति को नष्ट-भ्रष्ट कर दिया। मानव तो स्वभावतः अपनी संतान से प्रेम करता है। परन्तु उसके साथ ही वह यदि वास्तविकता से भी आंखें मूंद ले तो फिर क्या हो सकता है? आचार्य चाणक्य यहां इसी प्रवृत्ति के प्रति सचेत कर रहे हैं।

English Meaning:- Chanakya Says, Its better a foolish and useless son die soon. Death of a foolish son cause Grief only ones but if he live long, his deed and presence bring sadness, grief and inslut in society for whole life.

संस्कृत श्लोक – 8

कुग्रामवासः कुलहीन सेवा कुभोजनं क्रोधमुखी च भार्या।
पुत्रश्च मूर्खा विधवा च कन्या विनाग्निमेते प्रदहन्ति कायम्।।8।।

दोहा – 8

घर कुशाँव सुत मूढ तिय, कुल नीचनि सेवकाइ ।
मूखे पुत्र विधवा सुता, तन बिन अनि जराइ ।।८।।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य यहां उन चीजों के बारे में उल्लेख कर रहे हैं जिनसे व्यक्ति को सदैव हानि ही होती है। उनका कहना है कि दुष्टों के गांव में रहना, कुलहीन की सेवा, कुभोजन, कर्कशा पत्नी, मूर्ख पुत्र तथा विधवा पुत्री, ये सब व्यक्ति को बिना आग के जला डालते हैं। |

आशय यह है कि ये सब बातें व्यक्ति को भारी दुःख देती हैं – यदि दुष्टों (लम्पटों) के बीच में रहना पड़े, नीच खानदान वाले की सेवा करनी पड़े, घर में झगड़ालू-कर्कशा पत्नी हो, पुत्र मूर्ख हो, पढ़े-लिखे नहीं, बेटी विधवा हो जाए – ये सारे दुःख बिना आग के ही व्यक्ति को अन्दर ही अन्दर जला डालते हैं।

English Meaning:- Residing in a village of Bad People, serving a person born of a low family, malnutrients food, a frowning wife, a foolish son, and a widowed daughter burn the man from inside without fire.

संस्कृत श्लोक – 9

किं तया क्रियते धेन्वा या न दोग्धो न गर्भिणी।
कोऽर्थः पुत्रेण जातेन यो न विद्वान्न भक्तिमान्।।9।।

दोहा – 9

कहा होय तेहि धेनु जो, दूध न गाभिन होय ।।
कोन अर्थ वहि सुत भये, पण्डित भक्त न होय ।।9।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य इस श्लोक में वस्तु की उपयोगिता की चर्चा करते हुए कहते हैं कि उस गाय से क्या करना, जो न तो दूध देती है और न गर्भवती होती है। इसी तरह उस पुत्र के जन्म लेने से क्या लाभ, जो न विद्वान हो और न ईश्वर का भक्त हो।

आशय यह है कि जो गायन तो दूध देती है और न गाभिन ही होती है। ऐसी गाय का होना या न होना बराबर ही है। ऐसी गाय को पालना बेकार ही होता है। इसी तरह जो पुत्र न तो विद्वान हो और न भक्त हो, उस पुत्र का होना या न होना बराबर है।

English Meaning:- What good is a cow that neither gives milk nor conceives? Similarly, what is the value of the birth of a son if he neither learned (Educated) nor a pure
devotee of the Lord and Parents.

संस्कृत श्लोक – 10

संसारातपदग्धानां त्रयो विश्रान्तिहेतवः।
अपत्यं च कलत्रं च सतां संगतिरेव च।।10।।

दोहा – 10

यह तीनों विश्राम, मोह तपन जा ताप में ।
हरे घोर भव घाम, पुत्र नारि सत्संग पुनि ।।१०।।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य व्यक्ति को दुःखों में शांतिदायी वस्तुओं की चर्चा करते हुए कहते हैं कि सांसारिक ताप से जलते हुए लोगों को तीन ही चीजें आराम दे सकती हैं-सन्तान, पत्नी तथा सज्जनों की संगति।

आशय यह है कि व्यक्ति जब कामकाज से थककर निढाल हो जाता है, तब ये ही तीन चीजें उसे शान्ति देती हैं। प्रायः यह सत्य ही है कि आदमी बाहर के संघर्षों से जूझता हुआ, दिन भर के परिश्रम से थका-मांदा जब शाम को घर लौटता है तो अपनी संतान को देखते ही सारी थकावट, पीड़ा और मानसिक व्यथा को भूलकर शान्त और संतुलित हो जाता है।

इसी प्रकार पति के घर आने पर जब मुस्कुराती हुई पत्नी उसका स्वागत करती है, अपनी मधुर वाणी से उनका हाल पूछती है, जलपान से उसको तृप्त एवं संतुष्ट करती है तो आदमी अपनी सारी परेशानी भूल जाता है।

इसी तरह जब कोई महापुरुष किसी असह्य दुःख से सन्तप्त व्यक्ति को ज्ञानोपदेश देता है तो उसके प्रभाव से वह भी
शांत और संयत हो जाता है।

इस प्रकार आज्ञाकारी सन्तान, पतिव्रता स्त्री और साधु संग मनुष्य को सुख देने वाले साधन हैं। व्यक्ति के जीवन में इनका बड़ा महत्त्व है। ये बातें एक बार ही होती हैं।

English Meaning:- When one is filled by the sorrows of life, three things give him relief:
offspring, a wife, and the company of the Lord’s devotees.

Chanakya Niti Chapter 4 with Meaning in Hindi English (11-20)

 

संस्कृत श्लोक – 11

सकृज्जल्पन्ति राजनः सकृज्जल्पन्ति पंडिताः।
सकृत्कन्याः प्रदीयन्ते त्रीण्येतानि सकृत्सकृत्।।1।।

दोहा – 11

भुपति ओ पण्डित बचन, ओ कन्या को दान ।।
एके एक बार ये, तीनों होत समान ।।११।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि राजा लोग एक ही बार बोलते हैं पंडित और विद्वान भी एक ही बार
बोलते हैं तथा कन्यादान भी एक ही बार होता है। ये तीनों कार्य एक-एक बार ही होते हैं।

अभिप्राय यह है, राजा हो या विद्वान या फिर कन्याओं के विवाह सम्बन्ध आदि के लिए राजा, विद्वान और माता-पिता का वचन अटल होता है। तीनों-के द्वारा बोले वचन लौटाए नहीं जाते, अपितु निभाए जाते हैं। उनके निभाने या पूरा करने में ही उनकी महानता होती है।

English Meaning:- Kings order for once, men of learning argue for once, and the daughter is given in marriage once. All these things happen once and only once.

संस्कृत श्लोक – 12

एकाकिना तपो द्वाभ्यां पठनं गायनं त्रिभिः।
चतुर्भिगमनं क्षेत्रं पञ्चभिर्बहुभिः रणम्।।2।।

दोहा – 12

तप एकहि दुवैसे पठन, शान तीन मा चारि।।
कृषी पाँच न बहुत मिल, अस कह शास्त्र विचारि।।12।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि तप (आत्म मंथन) अकेले में करना उचित होता है, पढ़ने में दो, गाने में तीन, बाहर जाते समय चार, खेत में पांच व्यक्ति तथा युद्ध में अनेक व्यक्ति होने चाहिए।

English Meaning:- Meditation and introspection should be practiced alone, study by two, and singing by three. A journey should be undertaken by four, agriculture by five, and war by many together.

संस्कृत श्लोक – 13

साभार्या या शुचिदक्षा सा भार्या या पतिव्रता।
सा भार्या या पतिप्रीता सा भार्या सत्यवादिनी।।13।।

दोहा – 13

सत्य मधुर भाखे बचन, ओर चतुरशुचि होय ।
पति प्यारी और पतिव्रता, त्रिया जानिये सोय ।।१३।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य पत्नी के स्वाभाविक गुणों की चर्चा करते हुए कहते हैं कि वही पत्नी है, जो पवित्र और कुशल हो। वही पत्नी है, जो पतिव्रता हो। वही पत्नी है, जिसे अपने पति से प्रीति हो। वही पत्नी है, जो पति से सत्य बोले।

आशय यही है कि जिसका आचरण पवित्र हो, कुशल गृहिणी हो, जो पतिव्रता हो, जो अपने पति से सच्चा प्रेम करे और उससे कभी झूठ न बोले, वही स्त्री पत्नी कहलाने योग्य है। जिस स्त्री में ये गुण नहीं होते, उसे पत्नी नहीं कहा जा सकता।

English Meaning:- Chanakya sumarises the characteristic to true wife, who is clean and pure (suci), expert in handling work of a home, pleasing to the husband, and truthful.

संस्कृत श्लोक – 14

अपुत्रस्य गृहं शून्यं दिशः शून्यास्त्वबान्धवाः।।
मूर्खस्य हृदयं शून्यं सर्वशून्यं दरिद्रता।।14।।

दोहा – 14

है अपुत्र का सून घर, बान्धव बिन दिशि शून ।
मूरख का हिय सून है, दाडि का सब सून ।।14।।

हिंदी अर्थ:- चाणक्य कहते हैं कि पुत्रहीन के लिए घर सूना हो जाता है, जिसके भाई न हों उसके लिए दिशाएं सूनी हो जाती हैं, मूर्ख का हृदय सूना होता है और निर्धन का तो सब कुछ सूना हो जाता है।

अर्थात् जिस व्यक्ति का एक भी पुत्र न हो, उसे अपना घर एकदम सूना लगता है। जिसका कोई भाई न हो उसे सारी दिशाएं सूनी लगती हैं।

मूर्ख व्यक्ति को भले-बुरे का कोई ज्ञान नहीं होता, उसके पास हृदय नाम की कोई चीज नहीं होती। किन्तु एक गरीब के लिए तो घर, दिशाएं, हृदय, संसार ही सूना हो जाता है। गरीबी एक अभिशाप है।

English Meaning:- The house of a childless person is a void, all directions are void to one who has no relatives, the heart of a fool is also void, but to a poverty-stricken man all is void.

संस्कृत श्लोक – 15

अनभ्यासे विषं शास्त्रमजीणें भोजनं विषम्।
दरिद्रस्य विषं गोष्ठी वृद्धस्य तरुणी विषम्।।15।।

दोहा – 15

भोजन वि प है बिन पचे. शास्त्र बिना अभ्यास ।
सभा गल सम कहिं, बूढहिं तरुनी पास ।।15।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिस प्रकार निरंतर अभ्यास न रखने से शास्त्र ज्ञान भी मनुष्य के लिए घातक विष के समान हो जाता है। बढ़िया से बढ़िया भोजन बदहजमी में लाभ करने के स्थान पर हानि पहुंचाता है और विष का काम करता है, उसी प्रकार जो व्यक्ति निर्धन व दरिद्र है, उसके लिए किसी भी प्रकार की सभाएं, उत्सव विष के समान हैं। और एक बूढ़े पति के लिए जवान स्त्री भी एक विष के समान है|

कहने को तो एक पण्डित और शिक्षक को अपने विषय का ज्ञान होता है, परन्तु अभ्यास न होने के कारण वह शास्त्र और विषय का भली प्रकार विश्लेषण-विवेचन नहीं कर पाता तथा उपहास और अपमान का पात्र बनता है।

निर्धन व दरिद्र व्यक्ति के लिया भी किसी भी प्रकार की सभाएं, उत्सव विष के समान हैं। इन गोष्ठियों, उल्लास के आयोजनों में तो केवल धनवान् व्यक्ति ही जा सकते हैं। यदि कोई दरिद्र भूल से अथवा मूर्खतावश इस प्रकार के आयोजनों में जाने की धृष्टता करता भी है तो उसे वहां से अपमानित होकर निकलना पड़ता है|

अतः निर्धन व्यक्ति के लिए सभाओं, गोष्ठियों, खेलों व मेलों-ठेलों में जाना प्रतिष्ठा के भाव से अपमानित करने वाला ही सिद्ध होता है। उसे वहां नहीं जाना चाहिए।

इसी प्रकार बूढ़े पति की जवान पत्नी भी पति के लिए मुसीबत ही लाती है| पति उसकी काम इच्छाओं को पूर्ण नहीं कर पाता है|

English Meaning:- Scriptural lessons not put into practice are poison; a meal is poison
to him who suffers from indigestion; a social gathering is poison to a poverty-stricken person; and a young wife is poison to an aged man.

संस्कृत श्लोक – 16

त्यजेद्धर्मं दयाहीनं विद्याहीनं गुरुं त्यजेत्।
त्यजेत्क्रोधमुखी भार्या निःस्नेहान्बान्धवांत्यजेत्।।16।।

दोहा – 16

दया रहित धर्महिं ततै, ओ गुरु विद्याहीन ।
क्रोधमुखी प्रिय प्रीति बिनु, बान्धव तजे प्रवीन ।।१६।।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि धर्म में यदि दया न हो तो उसे त्याग देना चाहिए। विद्याहीन गुरु को, क्रोधी पत्नी को तथा स्नेहहीन बान्धवों को भी त्याग देना चाहिए।

English Meaning:- That religion which does not preach mercy should be rejected. A guru without knowledge of his subject should be rejected.

The wife with an offensive face and ill-tempered should be given up, and so should relatives who are without affection.

संस्कृत श्लोक – 17

अध्याजरं मनुष्याणां वाजिनां बन्धनं जरा।
अमैथुनं जरा स्त्रीणां वस्त्राणामातपं जरा।।17।।

दोहा – 17

पन्थ बुराई नन की, हयन पंथ इक थाम ।।
जरा अमेथुन तियन कहें, और वस्त्रन को थाम ।।17।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य का ज्यादा सफ़र करना, घोड़े को हमेशा खूटे से बांधे रखना, मैथुन न करना स्त्री का तथा धूप में सूखना वस्त्र का बुढ़ापा है।

अर्थात् राह में चलते रहने से थककर मनुष्य अपने को बूढ़ा अनुभव करने लगता है। घोड़ा बंधा रहने पर बूढ़ा हो जाता है। सम्भोग के अभाव में स्त्री अपने को बुढ़िया अनुभव करने लगती है। धूप में सुखाए जाने पर कपड़े शीघ्र फट जाते हैं तथा
उनका रंग फीका पड़ जाता है।

English Meaning:- Constant travel brings old age upon a man; a horse becomes old by being constantly tied up; lack of sexual contact brings old age upon a woman; and garments tend to tear and wear soon if left in the sun to often.

संस्कृत श्लोक – 18

कः कालः कानि मित्राणि को देशः को व्ययागमोः।
कस्याहं का च मे शक्तिरिति चिन्त्यं मुहुर्मुहुः।।18।।

दोहा – 18

हों केहिको का शक्ति मम, कोन काल अरु देश ।
लाभ खर्च को मित्र को, चिन्ता करे हमेश ।।१८।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य जीवन में व्यवहार करने योग्य वस्तु की पूरी पहचान कर ही उन्हें बरतने की बात प्रतिपादित करते हुए कहते हैं
कि कैसा समय है
कौन मित्र है
कैसा स्थान है
आय-व्यय क्या है
मैं किसकी और मेरी क्या शक्ति है| इसे बार-बार सोचना चाहिए।

अर्थात् व्यक्ति को किसी भी कार्य को शुरू करते समय इन बातों पर अच्छी तरह से विचार कर लेना चाहिए – क्या यह समय इस काम को करने के लिए उचित रहेगा|

मेरे सच्चे साथी कौन-कौन हैं, जो मेरी मदद करेंगे? क्या इस स्थान पर इस काम को करने से लाभ होगा? इस काम में कितना खर्च होगा और इससे कितनी आय होगी? मैंने किसकी मदद की है? तथा मेरे पास कितनी शक्ति है|

इन प्रश्नों पर विचार करते हुए मनुष्य को अपना जीवन बिताना चाहिए तथा आत्मकल्याण के लिए सदा प्रत्यनशील रहना चाहिए।

जो व्यक्ति इन बातों पर विचार नहीं करता, वह पत्थर के समान निर्जीव होता है और सदा लोगों के पांवों में पड़ा ठोकरें खाता रहता है। मनुष्य को समझदारी से काम लेकर जीवन बिताना चाहिए।

English Meaning:- Consider again and again the following: the right time, the right friends, the right place, the right means of income, the right ways of spending, and
from whom you derive your power.

संस्कृत श्लोक – 19

जनिता चोपनेता च यस्तु विद्यां प्रयच्छति।
अन्नदाता भयत्राता पञ्चैता पितरः स्मृताः।। 19।।

दोहा – 19

ब्राह्मण, क्षतिय, वैश्य को, अनि देवता ओर।
मुनिजन हिय मूरति अबुध, समदर्शिन सब ठौर।।19।।।

हिंदी अर्थ:- यहां इस श्लोक में आचार्य चाणक्य संस्कार की दृष्टि से पांच प्रकार के पिता को गिनाते हुए कहते हैं-जन्म देने वाला, उपनयन संस्कार करने वाला, विद्या देने वाला, अन्नदाता तथा भय से रक्षा करने वाला, ये पांच प्रकार के पिता होते हैं।

अर्थात् स्वयं अपना पिता जो जन्म देता है, उपनयन (यज्ञोपवीत) संस्कार करने वाला गुरु, अन्न-भोजन देने वाला तथा किसी कठिन समय में प्राणी की रक्षा करने वाला इन पांच व्यक्तियों को पिता माना गया है।

English Meaning:- Chanakya says, there are five kind of father according to virtue, first who give birth, second who gives value, third who give education fourth who feed and fifth who teach how to face your fear.

संस्कृत श्लोक – 20

राजपत्नी गुरोः पत्नी मित्रपत्नी तथैव च।
पत्नीमाता स्वमाता च पञ्चैताः मातरः स्मृताः।।20।।

हिंदी अर्थ:- यहां इस श्लोक में आचार्य चाणक्य मां के बारे में चर्चा करते हुए कहते हैं कि राजा की पत्नी, गुरु की पत्नी, मित्र की पत्नी, पत्नी की मां तथा अपनी मां-ये पांच प्रकार का मांएं होती हैं। ।

अर्थात् अपने देश के राजा की पत्नी, गुरु की पत्नी, मित्र की पत्नी, अपनी पत्नी की मां अर्थात्, सास और जन्म
देने वाली अपनी मां इन पांचों को मां माना जाता है।

वस्तुतः देखा जाए तो माता ममता और करुणा की प्रतिमूर्ति होती है। जहां से ममता और करुणा का प्रवाह पुत्र के लिए होता है, उसे माता मान लिया गया है।

English Meaning:- the wife of Kind, guru, friend, mother of wife and own mother
in shashtr these are 5 types of Mothers are considered.

दोस्तो चाणक्य निति का चौथा अध्याय का हिंदी और इंग्लिश अर्थ के साथ (Chanakya Niti chapter 4 with meaning in Hindi English) बेहतर समझ आया होगा और आपके जीवन में अवश्य ही इस ज्ञान से सकारात्मक परिवर्तन आएगा|

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चाणक्य नीति तृतीय अध्याय अर्थ सहित

 

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