संपूर्ण महामृत्युंजय मंत्र हिंदी अर्थ सहित

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महामृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

हिन्दू धर्म में करोड़ों देवी देवता है लेकिन देवों के देव सिर्फ महादेव शिव को ही माना जाता है।”महादेव केलास पर विराजते है

महादेव की महिमा अपरम्पार है इस मंत के जाप से प्राणी को अमर तत्व की प्राप्ति होती है यह मंत बहुत शक्ति शाली और

प्रभावशाली होता है समस्त पापो भय शोक आदि को हरने वाला यह महामृत्युंजय मंत्र है भगवान भोले को प्रशन करने वाला है

सनातन धर्म में कई मंत्रों का विशेष महत्व दिया जाता है। इन्हीं मंत्रों में एक मंत्र होता है महामृत्युंजय मंत्र। भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने का यह मंत्र कई कारणों में विशेष लाभकारी होता है। इस मंत्र का जाप मृत्यु को टालने और उस पर विजय प्राप्त करने वाला माना गया है

महामृत्युंजय मंत्र का जाप विशेष परिस्थितियों में ही किया जाता है। अकाल मृत्यु, महारोग, धन-हानि,, समस्त पापों से मुक्ति आदि जैसे स्थितियों में भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाता है। इसके चमत्कारिक लाभ देखने को मिलते हैं। इन सभी समस्याओं से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाता है।। ..

इस मंत्र की रचना मार्कंडेय ऋषि ने की थी। इसका वर्णन ऋग्वेद में मिलता है .

महाम्रतुन्जय मंत्र का अर्थ

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ||

मंत्र का अर्थ

हम त्रिनेत्र को पूजते हैं,
जो सुगंधित हैं, हमारा पोषण करते हैं,
जिस तरह फल, शाखा के बंधन से मुक्त हो जाता है,
वैसे ही हम भी मृत्यु और भय से मुक्त हो जाएं।

महामृत्युंजय मंत्र के शब्दों का अर्थ – 

ॐ = ओंकार यह भगवान का सूचक
त्र्यम्बकं = तीन आँखों वाला तीनो कालो में हमारी रक्षा करने वाले भोले नाथ
यजामहे = जिसकी हम पूजा करते है
सुगन्धिम् = मीठी खुशबु वाला
पुष्टि = सुखमय जीवन की कल्पना
वर्धनम् = जो ताकत,और हमे अच्छा स्वास्थ्य, प्रदान करता हो
उर्वारुकमिव = बीमारी और जीवन की बाधाएं जो तनाव का कारण बनती हैं
इव = जैसे, वैसे ही
बन्धनान् = बंधन जो आपको रोकता हो
मृत्योर्मुक्षीय = मृत्यु से आजाद करे
मामृतात् = मौत से मुक्ति, मगरआनंद सुख से नहीं

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Suvidha Pathak
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