Chanakya Niti Chapter 5 Hindi English | चाणक्य निति पंचम अध्याय अर्थ सहित

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Chanakya niti fifth chapter with meaning in hindi English

Chanakya Niti chapter 5 shlokas with meaning in Hindi English | चाणक्य नीति पांचवां अध्याय श्लोक हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित

चाणक्य भारतीय इतिहास में राजनीती और अर्थशास्त्र के अग्रदूत माने जाते हैं| इन्होने अपने जीवन के अनुभव के आधार पर और वेदों में लिखे ज्ञान के आधार पर कुछ संस्कृत श्लोकों को संग्रह किया जिसे चाणक्य निति कहा जाता है|

चाणक्य नीति के 17 अध्याय में से पांचवे अध्याय (Chanakya Niti 5th Chapter in Hindi English) में भी जीवन के मूल मन्त्र संगृहीत हैं|

आज हम चाणक्य निति के पंचम अध्याय की हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित (Chanakya Niti chapter 5 shlokas with meaning in Hindi English)चर्चा करेंगे

Chanakya Niti Chapter 5 with Meaning in Hindi English (1-10)

चाणक्य नीति पंचम अध्याय हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित

संस्कृत श्लोक – 1

गुरुरग्निर्द्विजातीनां वर्णानां ब्राह्मणो गुरुः।
पतिरेव गुरुः स्त्रीणां सर्वस्याभ्यगतो गुरुः।।1।।

दोहा – 1

अभ्याात सबको शुरु, नारि शुरु पति जान ।
विजन अनि शुरु चारिहूँ, वन विप्र शुरु मान ।।१।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य यहां गुरु की व्याख्या-विवेचना एवं स्वरूप की व्याख्या करते हुए कह रहे हैं कि अग्नि
सभी वर्णों (मानव जाति) का गुरु है । ब्राह्मण अपने अतिरिक्त सभी वर्गों का गुरु है। स्त्रियों का गुरु पति है। घर में आया हुआ अतिथि सभी का गुरु होता है।

English Meaning:- Agni is the worshipable person for the all; the brahmana for all other caste; the husband for the wife; and the guest who comes for food at the midday meal for Host.

संस्कृत श्लोक – 2

यथा चतुर्भिः कनकं परीक्ष्यते निर्घषणच्छेदन तापताडनैः।
तथा चतुर्भिः पुरुषः परीक्ष्यते त्यागेन शीलेन गुणेन कर्मणा।।2।।

दोहा – 2

आशिताप घसि काटि पिटि, सुवल लख विधि चारि।।
त्याशील गुण कर्म तिमि, चारिहि पुरुष विचारि।।२।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य, गुण और कर्मों के आधार पर पुरुष की परीक्षा की चर्चा करते हुए कहते हैं कि जैसे घिसने,तपाने, काटने, और पीटने, इन चार प्रकार से, जैसे सोने का परीक्षण होता है, इसी प्रकार त्याग, शील, गुण और कर्मों से पुरुष की परीक्षा होती है।

अर्थात् सोना खरा है या खोटा, यह जानने के लिए पहले उसे कसौटी पर घिसा जाता है, फिर काटा जाता है, फिर आग में गलाया जाता है तथा अन्त में उसे पीटा जाता है।

इसी प्रकार सज्जन व्यक्ति की पहचान भी उसके त्याग से, स्वभाव से, गुणों से तथा अच्छे कार्यों से ली जाती है। कुलीन (सज्जन) व्यक्ति त्याग करने वाला सुशील, विद्या आदि गुणों वाला तथा सदा अच्छे कार्य करने वाला होता है।

English Meaning:- As gold is tested in four ways by rubbing, cutting, heating and beating.  So a man should be tested by these four things: his renunciation (secrifice), his conduct (behaviour), his qualities (good character) and his actions.

संस्कृत श्लोक – 3

तावद् भयेषु भेतव्यं यावष्यमनागतम्।
आगतं तु भयं दृष्ट्वा प्रहर्तव्यमशंकया।।3।।

दोहा – 3

जोलों भय आवै नहीं, तौलों डरे विचार।।
आये शंका छाडि के, चाहिय कीन्ह प्रहार।।३।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य यहां सिर पर आए संकट से निपटने के संदर्भ में सुझाब देते हैं हैं कि आपत्तियों और संकटों से तभी तक डरना चाहिए जब तक वे दूर हैं|

परंतु यदि संकट सिर पर आ जाएं तो उस पर बिना शंका किए और डरे मुकाबला करना चाहिए, और उससे छुटकारा पाने का उपाय करना चाहिए।

अर्थात् जब तक भय दूर है तभी तक व्यक्ति को उससे डरना चाहिए अर्थात् किसी प्रकार का ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए जिससे भय और मुसीबत आ जाये, लेकिन भय आ जाने पर डरने से कार्य नहीं चलेगा।

उस समय उसका समाधान ढूंढना चाहिए, उसका डटकर मुकाबला करना चाहिए। अन्यथा संसार में भय से पलायन करने के लिए कोई स्थान नहीं मिलेगा जहां भय न हो और भयभीत व्यक्ति कोई कार्य कहीं भी नहीं कर सकता है। भय से जीवन भी नहीं चलता।

इसलिए भय से मुक्ति पाने के लिए उसका हल ढूंढना ही श्रेयस्कर मार्ग है। वीर एवं साहसी पुरुषों का यही धर्म है।

English Meaning:- One should afraid of a thing as long as it has not overtaken, and should not do anything that causes that thing overtaken you. But once that thing come upon you, one should not afraid, rather try to get rid of it withoug hesitation and fear.

संस्कृत श्लोक – 4

एकोदरसमुघूता एक नक्षत्र जातका।
न भवन्ति समा शीले यथा बदरिकण्टका।।4।।

दोहा – 4

एकहि गर्भ नक्षत्र में, जायमान यदि होय ।
नाहिं शील सम होत है, बेर काँट सम होय ।।4।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य कहते हैं कि एक ही कोख से, एक ही ग्रह-नक्षत्र में जन्म लेने पर भी दो लोगों का स्वभाव एक समान नहीं होता। उदाहरण के लिए बेर और कांटों को देखा जा सकता है।

अर्थात् जैसे बेर और कांटे एक ही वृक्ष में एक साथ उत्पन्न होते हैं, किन्तु उनका स्वभाव अलग-अलग होता है। इसी प्रकार एक ही मां से एक ही नक्षत्र में जन्मे दो जुड़वां बच्चों का भी स्वभाव एवं आचरण समान नहीं होता।

English Meaning:- Chanakya says two persons born from the same womb and under same stars, are not identical in their thoughts and act, as the thorns and fruits of Indian Plum tree.

संस्कृत श्लोक – 5

निस्पृहो नाधिकारी स्यान्न कामी भण्डनप्रिया।
नो विदग्धः प्रियं ब्रूयात् स्पष्ट वक्ता न वंचकः।।5।।

दोहा – 5

नहि निस्पृह अधिकार गहु, भूषण नहिं निहकाम ।
नहिं अचतुर प्रिय बोल नहि, बंचक साफ कलाम ।।5।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य स्पष्टवक्ता के गुणों की चर्चा करते हुए कहते हैं कि विरक्त (सन्यासी) व्यक्ति किसी विषय (पद) का अधिकारी नहीं होता, जो व्यक्ति कामी नहीं होता, उसे बनाव- श्रृंगार की आवश्यकता नहीं होती। विद्वान व्यक्ति प्रिय नहीं बोलता तथा स्पष्ट बोलने वाला ठग नहीं होता।

अर्थात् जिस व्यक्ति को संसार से वैराग्य हो जाता है, उसे किसी भी विशेष पद की अभिलाषा नहीं होती है। बनने-संवरने वाला व्यक्ति कामी होता है।

क्योंकि दूसरों का ध्यान आकष्ट करने के लिए ही श्रृंगार किया जाता है। अतः जो व्यक्ति कामी नहीं होता उसे श्रृंगार से प्रेम नहीं होता।

प्रकाण्ड विद्वान व्यक्ति सदा सत्य बात कहता है। वह प्रिय नहीं बोलता। साफ साफ बातें करने वाला व्यक्ति कपटी नहीं होता।

English Meaning:– He who has not wordly desire not like to hold an office, he who desires nothing cares not for bodily decorations, Scholar always speak truth, he who is only partially educated cannot speak agreeably; and he who speaks out plainly cannot be a deceiver.

संस्कृत श्लोक – 6

मूर्खाणां पण्डिता द्वेष्या अधनानां महाधना।
वारांगना कुलीनानां सुभगानां च दुर्भगा।।6।।

दोहा – 6

मूरख द्वेषी पण्डितहिं, धनहीनहिं धनवान् ।
परकीया खकियाहु का, विधवा सुभगा जान ।।6।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य यहां द्वेष करने वालों की चर्चा करते हुए कहते हैं कि मूर्ख-पंडितों से, निर्धन-धनियों से, वेश्याएं-कुलवधुओं से तथा विधवाएं – सुहागिनों से द्वेष करती हैं।

अर्थात् मूर्ख व्यक्ति पण्डितों से तथा विद्वान व्यक्तियों से द्वेष करता है। निर्धन-गरीब व्यक्ति सेठों से द्वेष रखता है क्योंकि उनकी सम्पन्नता उसे खलती है।

वेश्याएं अच्छे घरों की बहू-बेटियों से जलती हैं, क्योंकि वेश्याओं को कुलीन वधुओं के समान भावनात्मक स्नेह नहीं मिल पाता, केवल शरीर का शोषण ही होता है|

विधवा स्त्रियां सुहागिनों को देखकर मन ही मन अपने भाग्य पर रोती हैं कि उनका सौभाग्य-सुख दैव ने उससे छीन लिया। पतिविहीना होना उनके लिए अभिशाप ही तो है।

English Meaning:- foolish jealous the scholars; poor jealous the riches; prestitue jealous pious woman; ugly ones heates beautiful and widow jealous married woman.

संस्कृत श्लोक – 7

आलस्योपहता विद्या परहस्तं गतं धनम्।
अल्पबीजहतं क्षेत्रं हतं सैन्यमनायकम्।।7।।
दोहा – 7
आलस ते विद्या नशे, धन ओल के हाथ ।।
अल्प बीज से खेत अरु, दल दलपति बिनु साथ ।।७।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य कौन किससे नष्ट होता है की चर्चा करते हुए कहते हैं कि आलस्य से विद्या नष्ट हो जाती है। दूसरे के हाथ में जाने से धन नष्ट हो जाता है। कम बीज से खेत तथा बिना सेनापति के सेना नष्ट हो जाती है।

अभिप्राय यह है कि आलसी व्यक्ति विद्या की रक्षा नहीं कर सकता, वह स्वाध्याय मनन से दूर होता है। दूसरे के हाथ में गया धन आवश्यकता के समय मिल नहीं पाता, क्योंकि दूसरा व्यक्ति समय पर उसे लौटा नहीं पाता।

खेत में थोड़ा बीज डालने से फसल भरपूर नहीं होती क्योंकि जितना बीज डाला जायेगा उसी अनुपात में तो फसल होगी।
और सेनापति के बिना सेना रणनीति निर्धारित नहीं कर पाती।

स्पष्ट है कि विद्या के लिए परिश्रम आवयशक है, धन वही है जो अपने अधिकार में हो, अपने पास हो। फसल तभी अच्छी होगी जब बीज उत्तम और पर्याप्त मात्रा में डाला जाएगा और सेना वही जीतेगी, जिसका संचालन कुशल सेनापति के हाथों में होगा। ये बातें ध्यान देने योग्य हैं। इनसे गुणों की पहचान होती है।

English Meaning:- Inaction and laziness ruins study(Education); money is lost when gone into others hands; a farmer who sows his seed sparsely is ruined; and an army is lost without a commander.

संस्कृत श्लोक – 8

अभ्यासाद्धार्यते विद्या कुलं शीलेन धार्यते।
गुणेन ज्ञायते त्वार्यं कोपो नेत्रेण गम्यते।।8।।

दोहा – 8

कुल शीलहिं ते धारिये, विद्या करिअभ्यास ।
गुणते जानहिं श्रेष्ठ कहें, नयनहिं कोप निवास ।।८।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य यहां विद्या, कुल-श्रेष्ठता और क्रोध की पहचान कराने वाले तत्वों की चर्चा करते हुए कहते हैं कि अभ्यास से विद्या का, शील स्वभाव से कुल का, गुणों से श्रेष्ठता का तथा आंखों से क्रोध का पता लग जाता है। |

अर्थात् व्यक्ति के साथ रहने पर उसके परिश्रम, बोलने के ढंग आदि से उसकी विद्या का तथा उसके आचरण से उसके कुल-खानदान का पता लग जाता है। व्यक्ति के अच्छे गुण ही बता देते हैं कि वह एक श्रेष्ठ मनुष्य है।

व्यक्ति चाहे मुंह से कुछ न कहे, किन्तु उसकी आंखें ही उसकी नाराजगी को बता देती हैं।

English Meaning:- Learning is retained through putting into practice; family prestige is maintained through good behavior; a respectable person is recognized by his excellent qualities; and anger is seen in the eyes.

संस्कृत श्लोक – 9

वित्तेन रक्ष्यते धर्मों विद्या योगेन रक्ष्यते।
मृदुना रक्ष्यते भूपः सत्स्त्रिया रक्ष्यते गृहम्।।9।।

दोहा – 9

विद्या रक्षित योग ते, मृदुता से भूपाल ।।
रक्षित ह सुतीय ते, धन ते धर्म विशाल ।।९।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य धर्म, विद्या, राजा और घर के रक्षाकारक तत्त्वों से परिचित कराते हुए कहते हैं कि धन से धर्म की, योग और मेहनत से विद्या की, मृदुता से राजा की तथा अच्छी स्त्री से घर की रक्षा होती है।

अर्थात् धन से ही मनुष्य अपने धर्म-कर्तव्य का सही पालन कर सकता है। सदाचार-संयम आदि से विद्या की रक्षा होती है। राजा का मधुर स्वभाव ही उसकी रक्षा करता है तथा अच्छे आचरणवाली स्त्री से ही घर की रक्षा होती है।

English Meaning:- Religion is preserved by wealth, knowledge by hard work, a king by conciliatory words, and a home by a dutiful housewife.

संस्कृत श्लोक – 10

अन्यथा वेदपांडित्यं शास्त्रमाचारमन्यथा।
अन्यथा वदतः शान्तं लोकाः क्लिश्यन्ति चान्यथा।।10।।

दोहा – 10

वेद शास्त्र आचार ओ, शास्त्रहुँ ओर प्रकार।
जो कहते लहते वृथा, लोग कलेश अपार ।।१०।।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो लोग वेदों को, पांडित्य को, शास्त्रों को, सदाचार को तथा शांत मनुष्य को बदनाम करते हैं, वे बेकार कष्ट करते हैं।

अर्थात् यदि कोई वेदों, शास्त्रों, बुद्धिमान, सदाचारी तथा शांत व्यक्ति की बुराई करता है, तो वह मूर्ख है। ऐसा करने से इनका महत्त्व कम नहीं होता।

क्योंकि अनेक ऋषि-मुनियों ने वर्षों की तपस्या से जनसाधारण के कल्याण के लिए जिन नियमों का प्रतिपादन किया, उस तत्त्वज्ञान तथा आचार-परम्परा का विरोध करना व्यक्ति की मूर्खता की पराकाष्ठा है,

यह लोकप्रतिष्ठित धर्माचरण की उपेक्षा कर समाज को अधर्म के गहरे गर्त में धकेलना भी है। इसे कभी लोकहित की भावना से प्रेरित कर्म नहीं माना जा सकता। अतः ऐसे मुर्ख लोगों का त्याग करने में समाज का हित है।

English Meaning:- Those who blaspheme Vedic wisdom, who ridicule the life style and right path recommended in the sastras or vedas, and who defame men of good virtue, bring grief to him unnecessarily.

Chanakya Niti Chapter 5 with Meaning in Hindi English (11-21)

संस्कृत श्लोक – 11

दारिद्र्यनाशनं दानं शीलं दुर्गतिनाशनम्।
अज्ञानतानाशिनी प्रज्ञा भावना भयनाशिनी।।11।।

दोहा – 11

दारिद नाशन दान, शील ढुतिहिं नाशियत ।
बुध्दि नाश अज्ञा, भय नाशत है भावना ।।11।।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य मानव के गुणों की व्याख्या करते हुए कर रहे हैं, ये गुण के प्रयोग से व्यक्ति बड़ी उपलब्धि पाता है। इनका कहना है कि दान दरिद्रता को नष्ट कर देता है। शील स्वभाव से दुःखों का नाश हो जाता है। बुद्धि अज्ञान को नष्ट कर देती है तथा भावना से भय का नाश हो जाता है।

अर्थात् सामर्थ्य के अनुसार दान देना चाहिए, इससे अपनी ही दरिद्रता दूर हो जाती है। सदाचार से व्यक्ति के दुःख नष्ट हो जाते हैं। भले-बुरे की पहचान करने वाली बुद्धि व्यक्ति के अज्ञान को दूर कर देती है तथा साहस करके दृढ़ भावना करने से भी सभी प्रकार के भय दूर हो जाते हैं।

English Meaning:- Charity puts and end to poverty; righteous conduct to misery; discretion to ignorance; and scrutiny to fear.

संस्कृत श्लोक – 12

नास्ति कामसमो व्याधिर्नास्ति मोहसमो रिपुः।
नास्ति कोप समो वह्नि नास्ति ज्ञानात्परं सुखम्।।12।।

दोहा – 12

व्याधि न काम समान, रिपु नहिं दूजो मोह सम ।।
अनि कोप से आन, नहीं ज्ञान से सुख परे ।।१२।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य परम सुख का महत्त्व प्रतिपादित करते हुए सुख का ही बखान करते हुए कहते हैं कि ‘काम’ के समान व्याधि नहीं है, मोह-अज्ञान के समान कोई शत्रु नहीं है, क्रोध के समान कोई आग नहीं है तथा ज्ञान के समान कोई सुख नहीं है।

English Meaning:- There is no disease (so destructive) as lust; no enemy like infatuation;
no fire like wrath; and no happiness like spiritual knowledge.

संस्कृत श्लोक – 13

जन्ममृत्युर्नियत्येको भुनक्त्येकः शुभाशुभम्।
नरकेषु पतत्येकः एको याति परां गतिम्।।13।।

दोहा – 13

जन्म मृत्यु लहु एक, भोग है इक शुभ अशुभ ।
नरक जात है एक, लहत एक ही मुक्तिपद ।।१३।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य एकाकी भाव को स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि व्यक्ति संसार में अकेला ही जन्म लेता है, अकेला ही मृत्यु को प्राप्त करता है, अकेला ही शुभ-अशुभ कर्मों का भोग करता है, अकेला ही नरक में पड़ता है तथा अकेला ही परमगति को भी प्राप्त करता है।

English Meaning:- A man is born alone and dies alone; and he experiences the good and bad consequences of his karma alone; and he goes alone to hell or the Supreme abode.

संस्कृत श्लोक – 14

तृणं ब्रह्मविद् स्वर्गं तृणं शूरस्य जीवनम्।
जिमाक्षस्य तृणं नारी निःस्पृहस्य तृणं जगत्।।14।।

दोहा – 14

ब्रह्मज्ञानिहिं स्वतृन, जिद इन्द्रिय तृणनार।
शूरहिं तृण है जीवनी, निस्पृह कहँ संसार।।१४।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य सांसारिकता को तिनके के समान बताते हुए कहते हैं कि ब्रह्मज्ञानी को स्वर्ग, वीर को अपना जीवन, संयमी को स्त्री तथा त्यागी को सारा संसार तिनके समान लगता है।

आशय यह है कि जो व्यक्ति ब्रह्मा को जान लेता है, उसे स्वर्ग की कोई इच्छा नहीं रहती, क्योंकि स्वर्ग के सुखों को भोगने के बाद फिर जन्म लेना पड़ता है।

ब्रह्मज्ञानी ब्रह्मा में मिल जाता है। अतः उसके लिए स्वर्ग का कोई महत्त्व ही नहीं रह जाता। युद्धभूमि में वीरता दिखानेवाला योद्धा अपने जीवन की परवाह नहीं करता। जो व्यक्ति अपनी इन्द्रियों को जीत लेता है, उसके लिए स्त्री तिनके के समान मामूली वस्तु हो जाती है।

English Meaning:- Heaven is like a straw for those who has achieved self realization, so is
life to a valiant man, a woman to him who has subdued his senses, and
the universe to him who is without attachment for the world.

संस्कृत श्लोक – 15

विद्या मित्रं प्रवासेषु भार्या मित्रं गृहेषु च।
व्याधितस्यौषधं मित्रं धर्मों मित्रं मृतस्य च।।15।।

दोहा – 15

विद्या मित्र विदेश में, घर तिय मीत राप्रीत ।।
रोाहि औषध अरु मरे, धर्म होत है मीत ।।15।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य मित्र की चर्चा करते हुए कहते हैं कि घर से बाहर विदेश में रहने पर विद्या मित्र होती है, घर में पत्नी मित्र होती है,
रोगी के लिए दवा मित्र होती है तथा मृत्यु के बाद व्यक्ति का धर्म ही उसका मित्र होता है।

English Meaning:- Knowledge is a friend on the journey, a wife in the house, medicine in sickness, and religiousness is the only friend after death.

संस्कृत श्लोक – 16

वृथा वृष्टिः समुद्रेषु वृथा तृप्तेषु भोजनम्।
वृथा दानं धनाढ्येषु वृथा दीपो दिवापि च।।16।।

दोहा – 16

व्यर्थहिं वृष्टि समुद्र में, तृप्तहिं भोजन दान ।
धनिकहिं देनों व्यर्थ है, व्यर्थ दीप दीनमान ।।16।।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य व्यर्थ की संज्ञा पर विचार करते हुए कहते हैं कि समुद्र में वर्षा व्यर्थ है। तृप्त को भोजन कराना व्यर्थ है। धनी को दान देना व्यर्थ है और दिन में दीपक जलाना व्यर्थ है।

अर्थात् समुद्र में वर्षा से क्या लाभ!, जिसका पेट भरा हो उसे भोजन कराना, धनी व्यक्ति को दान देना या दिन में दीपक जलाना व्यर्थ है। कोई भी काम स्थान, व्यक्ति तथा समय देखकर ही करना उचित होता है।

English Meaning:- Rain which falls upon the sea is useless; so is food for one who is satiated; in vain is a gift for one who is wealthy; and a burning lamp during the daytime is useless.

संस्कृत श्लोक – 17

नास्ति मेघसमं तोयं नास्ति चात्मसमं बलम्।
नास्ति चक्षुसमं तेजो नास्ति चान्नसमं प्रियम्।।7।।

दोहा – 17

दूजो जल नहिं मेघ सम, बल नहिं आत्म समान ।
नहिं प्रकाश है जैन सम, प्रिय अनाज सम आन ।।17।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य सबसे प्रिय वस्तु की चर्चा करते हुए कहते हैं कि बादल के समान कोई जल नहीं होता। अपने बल के समान कोई बल नहीं होता। आंखों के समान कोई ज्योति नहीं होती और अन्न के समान कोई प्रिय वस्तु नहीं होती।

अर्थात् बादल का जल ही सबसे अधिक उपयोगी होता है। अपना बल ही सबसे बड़ा बल होता है; इसके बराबर
अन्य किसी भी बल का भरोसा नहीं किया जा सकता। आंखों की रोशनी ही सबसे बड़ी रोशनी है। तथा भोजन प्रत्येक प्राणी की सबसे अधिक प्रिय वस्तु है।

English Meaning:- There is no water like rainwater; no strength like one’s own; no light like that of the eyes; and no wealth more dear than food grain.

संस्कृत श्लोक – 18

अधना धनमिच्छन्ति वाचं चैव चतुष्पदाः।
मानवाः स्वर्गमिच्छन्ति मोक्षमिच्छन्ति देवताः।।18।।

दोहा – 18

अधनी धन को चाहते, पशु चाहे वाचाल ।
नर चाहत है खर्ग को,सुखाण मुक्ति विशाल ।।१८।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य अप्राप्त वस्तु के प्रति व्यक्तिमात्र की आसक्ति की प्रवृत्ति पर टिप्पणी करते हुए कहते हैं कि निर्धन व्यक्ति धन की कामना करते हैं और चौपाये अर्थात् पशु बोलने की शक्ति चाहते हैं। मनुष्य स्वर्ग की इच्छा करता है और स्वर्ग में रहने वाले देवता मोक्ष प्राप्ति की इच्छा करते हैं और इस प्रकार जो प्राप्त है, सभी उससे आगे की कामना करते हैं।

वस्तुतः देखा जाए तो इस संसार में यह एक सरल-सा सत्य है कि जिस व्यक्ति के पास जिस वस्तु का अभाव होता है, वह उसे ही प्राप्त करना चाहता है, उसी की लालसा करता है, उसी को अधिक महत्त्व देता है।

English Meaning:- The poor wish for wealth; animals wishes if they can speak; men wish
for heaven; and godly persons for liberation.

संस्कृत श्लोक – 19

सत्येन धार्यते पृथ्वी सत्येन तपते रविः।
सत्येन वाति वायुश्च सर्वं सत्ये प्रतिष्ठितम्।। 19।।

दोहा – 19

सत्यहि ते रवि तपत हैं, सत्यहिं पर भुवभार।
चले पवनहू सत्य ते, सत्यहिं सब आधार।।19।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य सत्य की प्रतिष्ठा कराते हुए कहते हैं कि सत्य ही पृथ्वी को धारण करता है। सत्य से ही सूर्य तपता है। सत्य से ही वायु बहती है। सब कुछ सत्य में ही प्रतिष्ठित है।

अर्थात् परमात्मा को ही सत्य कहा जाता है। सत्य से ही पृथ्वी टिकी हुई है। सत्य के कारण ही सूर्य और वायु अपना कार्य करते हैं और यह सारा संसार सत्य के कारण ही काम करता है। सत्य ही इसका आधार है। धर्म ही अटल है।

English Meaning:- The earth is supported by the power of truth; it is the power of truth that makes the sunshine and the winds blow; indeed all things rest upon truth.

संस्कृत श्लोक – 20
चला लक्ष्मीश्चलाः प्राणाश्चले जीवितमन्दिरे।
चलाचले च संसारे धर्म एको हि निश्चलः।।20।।

दोहा – 20

चल लक्ष्मी ओ प्राणहू, और जीविका थाम ।।
मह चलाचल जात में, अचल धर्म अभिराम ।।२०।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य धर्म चर्चा करते हुए कहते हैं कि लक्ष्मी चंचल है, प्राण, जीवन, शरीर सब कुछ चंचल और नाशवान है। संसार में केवल धर्म ही निश्चल है।

अभिप्राय यह है कि लक्ष्मी, धन-सम्पत्ति सब चंचल हैं, ये कभी एक के पास रहती हैं, तो कभी दूसरे के पास चली जाती हैं। इनका विश्वास नहीं करना चाहिए और न ही इन पर घमण्ड करना चाहिए।

प्राण, जीवन, शरीर और यह सारा सारा संसार भी सदा नहीं रहता। ये सब एक न एक दिन अवश्य नष्ट हो जाते हैं। संसार में केवल अकेला धर्म ही ऐसी चीज है, जो कभी नष्ट नहीं होता। यही व्यक्ति का सच्चा साथी है, सबसे बड़ी सम्पत्ति है, जो जीवन में भी काम आता है तथा जीवन के बाद भी।

English Meaning:- The Goddess of wealth is unsteady (chanchala), and so is the life breath. The duration of life is uncertain, and the place of habitation is uncertain, but in all this inconsistent world religious merit alone is truth and does not change.

संस्कृत श्लोक – 21

नराणां नापितो धूर्तः पक्षिणां चैव वायसः।
चतुष्पदां श्रृंगालस्तु स्त्रीणां धूर्ताच मालिनी।।21।।

दोहा – 21

नर में नाई धूर्त है, मालिन नारि लखाहिं।
चौपायन में प्यार है, वायस पक्षिन माहिं ।।२१।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य धूर्तों की चर्चा करते हुए कहते हैं कि पुरुषों में नाई, पक्षियों में कौआ, चौपायों में सियार तथा स्त्रियों में मालिन धूर्त होती है।

आशय यह है कि पुरुषों में नाई धूर्त होता है। पक्षियों में कौआ धूर्त माना जाता है। चौपाये पशुओं में सियार को तथा
स्त्रियों में मालिन को धूर्त समझा जाता है।

English Meaning:- Among men the barber is cunning; among birds the crow; among beasts the jackal; and among women, the malin (flower girl).

आशा करते हैं चाणक्य निति के पांचवे अध्याय (Chanakya Niti chapter 5) से जरुर आपका ज्ञानवर्धन हुआ होगा| प्रभु आपके जीवन में भी सकारात्मकता का संचार करे ऐसी हम कामना करते हैं|

यह भी पढ़ें:-

चाणक्य नीति चतुर्थ अध्याय

 

 

 

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