राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की सम्पूर्ण जानकारी | National war memorial information in Hindi

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और अखिल भारतीय युद्ध स्मारक की जानकारी और सम्पूर्ण इतिहास और खुलने और बंद होने का समय | National war memorial and museum Delhi information history in Hindi

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, दिल्ली के इंडिया गेट के पास स्तिथ है| यह करीब 40 एकड़ के क्षेत्र में फेला हुआ है और भारतीय सेना के वीर जवानों को सम्मानित करने के लिए बनाया गया है|

इस स्मारक की दीवारों पर भारत पाकिस्तान (1947-48, 1965) , गोवा (1961), , भारत पाकिस्तान 1971 (Siachen), 1987-88 (Sri-Lanka शांति मिशन युद्ध), भारत पाकिस्तान 1999 (Kargil) युद्ध और कश्मीर में चलायें गए कई ऑपरेशन जैसे ऑपरेशन रक्षक में शहीद हुए भारतीय सेनिकों के नाम दर्ज हैं|

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का निर्माण मोदी सरकार के कार्यकाल में 2015 में शुरू हुआ था और 2018 में इसका निर्माण कार्य ख़त्म होने का लक्ष्य था| लेकिन यह 2019 में बन के तैयार हुआ और 25 फरवरी 2019 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा इसका उद्घाटन किया गया|

अभी एक युद्ध संग्रहालय का निर्माण कार्यरत है| यह इंडिया गेट के पास प्रिंसेस पार्क एरिया में बनाया जा रहा है|

आइये सबसे पहले राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के इतिहास (National War Memorial History information in Hindi) की संक्षिप्त में चर्चा कर लेते हैं| अगर आपको हमारी कोशिश पसंद आये तो इस पोस्ट को शेयर जरुर कीजियेगा|

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु

क्रमांकParticularDetail
1.नामराष्ट्रिय युद्ध स्मारक, National War Memorial
2.निर्माण कार्य प्रारंभ2017
3.निर्माण कार्य संपन्न1 जनवरी 2019
4.उद्घाटन25 फरवरी 2019 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा
5.उद्देश्यसेना के शहीदों को सम्मान
6.कुल शहीदों के नाम25942
7.स्थान चंद्रहासन
8.आर्किटेकयोगेश
9.कुल क्षेत्र176 करोड़
10.बजट40 एकड़

National War Memorial History in Hindi

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का इतिहास

  • 1960:- 1960राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के लिए सबसे पहले 1960 में भारतीय सेना की तरफ से सरकार के सामने एक प्रस्ताव रखा गया|
  • 2006:- सेना और सेवा निवृत सेना अधिकारीयों की लगातार मांग के बाद, करीब 46 साल के बाद यूपीए सरकार ने प्रणव मुखर्जी के नेतृत्व में कुछ मंत्रियों की एक कमिटी (Group of Ministers(GoM)) बनाई| इसी साल रक्षा मंत्रालय ने यह निश्चित किया की राष्ट्रीय युद्ध स्मारक इंडिया गेट के पास ही बनना चाहिए| लेकिन शहरी विकास मंत्रालय ने यह कहकर इसका विरोध किया की इंडिया गेट एक ऐतिहासिक धरोहर है वहां नियम के अनुसार कोई नया निर्माण नहीं
  • हो सकता|
  • 20 अक्टूबर 2012:- भारत चीन 1962 युद्ध की 50वीं वर्ष गाँठ पर शहीद हुए जवानों को श्रधांजलि देने के लिए एक शोक समारोह का आयोजन किया गया| इस समय के रक्षा मंत्री ए.के अंटोनी ने तीनों सेना अध्यक्षों की उपस्थिति में इंडिया गेट के पास ही राष्ट्रीय युद्ध स्मारक संग्रहालय बनवाने की घोषणा कर दी| लेकिन, लेकिन कांग्रेस की सरकार की ही शिला दीक्षित जो उस समय दिल्ली की मुख्यमंत्री थी उन्होंने इंडिया गेट के पास युद्ध स्मारक और संग्रहालय बनाने का विरोध किया|
  • फरवरी 2014:- 2014 के लोक सभा चुनावों में नरेन्द्र मोदी जी ने यह मुद्दा अपनी जन सभाओं में जोर शोर से उठाया कैसे कांग्रेस की सरकार ने देश के शहीदों का अपमान किया और युद्ध स्मारक अभी तक नहीं बनवाया|
  • 7 अक्टूबर 2015:- मोदी सर्कार के मंत्रीमंडल ने वॉर मेमोरियल बनाने का प्रपोजल पास कर दिया और इसे बनाने के लिए 500 करोड़ रूपए का बजट भी दिया| इस पुरे बजट में 176 करोड़ रूपए मेमोरियल के और बाकि पैसा वॉर म्यूजियम में लगना है जी अभी निर्माणाधीन है|
  • मई 2016:- Empowered Apes Steering Committee ने केंद्रीय मंत्रिमंडल को सुझाव दिया की प्रीसेस पार्क का एरिया नेशनल वॉरमेमोरियल के लिए ठीक रहेगा और नेशनल वॉर मेमोरियल को इंडिया गेट c hexagon के मध्य में बनी छत्री (Canopy) के पास बनाया जाए|
  • 30 अगस्त 2016:- MyGov.in वेब पोर्टल पर नेशनल वॉर मेमोरियल के डिजाईन के लिए एक ग्लोबल डिजाईन कम्पटीशन लांच किया|
  • अप्रैल 2017:- इस साल कम्पटीशन का रिजल्ट की घोषणा की गई, जिसमें एस पी प्लस का डिजाईन नेशनल वार म्यूजियम के लिए और चेन्नई की एक कंपनी वेबे डिजाईन लैब का डिजाईन प्रपोजल वॉर मेमोरियल के लिए स्वीकार कर लिया गया| करीब 427 डिजाईन नेशनल वर मेमोरियल के लिए और 268 डिजाईन नेशनल वॉर म्यूजियम के लिए इस प्रतियोगता में प्रस्तावित किये गए थे
  • इस कम्पटीशन का नाम “Global Architectural Competition for India National War Museum” और इसके जज थे प्रसिद्द आर्किटेक्ट और प्लानर क्रिस्टोफर बेन्निन्गेर (Christopher Benninger).
  • 15 अगस्त 2018 को नेशनल वॉर मेमोरियल का कार्य पूरा होना था लेकिन यह नहीं हो पाया|
  • 1 जनवरी 2019:- नेशनल वॉर मेमोरियल का निर्माण पूरा हो गया|

नेशनल वॉर मेमोरियल का उद्घाटन

25 फरवरी 2019:- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा, रक्षा मंत्री निर्मला सीता रमण और थल जल और वायु सेना अध्यक्षों की उपस्थिति में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन किया गया|

इस अवसर पर परमवीर चक्र से सम्मानित जवानों के परिजनों से भी मोदीजी ने मुलाकात की

नेशनल वॉर मेमोरियल का डिजाईन

Credit goes to Ishaan Khosala

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial) इंडिया गेट के C-Hexagon circle की बिलकुल मध्य की छतरी के समीप बनाया गया और करीब 4 एकड़ के क्षेत्र में फेला हुआ है|

नेशनल वॉर मेमोरियल का identity or wayfinding Design इशान खोसला LLP Design ने बनाया था| इस डिजाईन को चेन्नई की एक डिजाईन कंपनी वेबे डिजाईन लैब ने अधिकृत कर लिया था|

स्मारक के चीफ आर्किटेक डिज़ाइनर चेन्नई बेस कंपनी के वेबे लैब के योगेश चंद्रहासन हैं

वार मेमोरियल की बिल्डिंग महाभारत के अभिमन्यु चक्रव्यू के आधार पर बनाई गई है| इसमें चार सर्किल बनाए गए हैं|

national war memorial amar chakra

अमर चक्र:- पहला सर्किल अमर चक्र कहलाता है| इस चक्र के बिलकुल मध्य में एक 15 मीटर लम्बा स्तम्भ बनाया गया है| इस स्तम्भ के शीर्ष पर अशोक चिन्ह बना हुआ है और इसके आधार पर एक अमर ज्योति हमेशा जलती रहती है|

वीरता चक्र:- दुसरे चक्र को वीरता चक्र बोला जाता है| इस चक्र में दीवारों पर भारतीय सेना के युद्ध कोशल और वीरता को प्रदर्शित करते हुए कांसे से बनी हुई तस्वीरें लगाईं गई है| भारत अपने पडोसी देशों से अब तक 6 युद्ध कर चूका है यह तस्वीरें इन्ही 6 युद्धों को प्रदर्शित करती हैं|

त्याग चक्र:- तीसरे चक्र को त्याग चक्र कहा गया है| इस चक्र में ग्रेनाईट की 2 मीटर लम्बी लाल पत्थरों की 16 दीवारें लगी हुई हैं| जिनमें 25942 वीर शहीद जवानों के नाम लिखे गए हैं|

रक्षा चक्र:- चौथा और आखिरी चक्र रक्षा चक्र है| जिसमें करीब 600 से अधिक पेड़ लगाए गए हैं| यह पेड़ एक दीवार की तरह दिखाते हैं और देश की रक्षा करते हुए जवानों का प्रतिरूप हैं|

परम योद्धा स्थल:- स्मारक में स्तिथ परम योद्धा स्थल पर परमवीर चक्र से सम्मानित 21 जवानों की मूर्तियाँ (Bust) लगाईं गई हैं| परमवीर चक्र भारतीय सेना का सर्वोच्च सम्मान है|

नेशनल वॉर मेमोरियल की अन्य रोचक बातें

  • आम जनता के लिए राष्ट्रिय युद्ध स्मारक निशुल्क है| यह सप्ताह के सातों दिन खुला है| मार्च से अक्टूबर माह में सुबह 9 बजे से शाम 7:30 बजे और नवम्बर से मार्च तक सुबह 9 बजे से शाम 6:30 बजे तक खुला रहता है|
  • अभी नेशनल वॉर म्यूजियम निर्माणाधीन है| इसका निर्माण इंडिया गेट के पास स्तिथ प्रिंसेस पार्क क्षेत्र में किया जा रहा है| यह स्मारक से एक सबवे से जुड़ा हुआ है| युद्ध सग्रहालय और म्यूजियम दोनों की लागत करीब 500 करोड़ रूपए है|
  • स्मारक में प्रत्येक शाम को सेन्य बैंड के साथ शहीदों को सम्मानित किया जाता है| जिसे रिट्रीट सेरेमनी कहा जाता है| रविवार को चेंज और गार्ड सेरेमनी का भी आयोजन किया जाता है|
  • नेशनल वॉर मेमोरियल के चीफ डिज़ाइनर योगेश चंद्रहासन है जो की वेबे डिजाईन लैब चेन्नई में कार्यरत हैं|
  • वॉर म्यूजियम एक स्पेशल प्रोजेक्ट था| इसके लिए रक्षा मंत्रालय में एक अलग से स्पेशल प्रोजेक्ट डिवीज़न बनाया गया था| इसको बनाने में मिलिट्री इंजिनियर सर्विस की भी मदद ली गई थी|

नेशनल वॉर मेमोरियल के आस पास पर्यटन स्थल

इंडिया गेट:-

इंडिया गेट वॉर मेमोरियल से कुछ ही दुरी पर स्तिथ है| इसका 1931 में बनके तैयार हुआ था और 12 फरबरी 1931 वाइसराय लार्ड इरविन के द्वारा इसका उद्घाटन किया गया|

यह भी एक वॉर मेमोरियल है, जिसे अंग्रेजों ने फर्स्ट वॉर में ब्रिटिश इंडियन आर्मी के शहीद जवानों को श्रधांजलि देने के लिए बनाया था|

1972 के भारत बंगला युद्ध के बाद, उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने एक काले मार्बल पत्थर को इंडिया गेट के बीच में लगवाया|

इसके ऊपर एक उलटी राइफल लगी हुई और उसके ऊपर एक आर्मी का हेलमेट लगा हुआ है| इसी पत्थर पर एक ज्योत हमेशा जलती रहती है जिसे अमर जवान ज्योति कहा जाता है|

राजपथ:-

इंडिया गेट और राष्ट्रपति भवन को जोड़ने वाली सड़क को राजपथ कहा जाता है| इसे राजमार्ग भी कहा जाता है, इसी मार्ग पर गणतंत्र दिवस की परेड होती है| इसके दोनों तरफ दर्शकों के बेठने के लिए जगह भी बनी हुई है|

हुमांयू का मकबरा:-

हुमांयू के मकबरे को पहला ताजमहल भी बोला जाता है| यह हुमांयू की बीबी हमीदा बनो बेगम के कहने पर बनाया गया था| अब इस पर लाइटिंग की भी व्यवस्था कर दी गई है, रात में यह बहुत शानदार दीखता है|

इसमें मुग़ल शाही परिवार की 150 कब्रें बनी हुई है|

राष्ट्रपति भवन:-

इंडिया गेट से करीब 2 किलोमीटर की दुरी पर राष्ट्रपति भवन बना हुआ है| यह भारत के राष्ट्रपति भवन का निवास स्थान है| 1929 में इसका निर्माण पूरा हुआ था| इस ईमारत को पहले वाइसराय निवास बोला जात था| बाद में इसका नाम बदल कर राष्ट्रपति भवन कर दिया गया|

अग्रसेन की बावली:-

अग्रसेन की बावली एक 60 मीटर लम्बा ऑफ़ 15 मीटर चोडा एक सीडी नुमा कुआ है| यह कनाट प्लेस, जंतर मंतर के पास हैली रोड पर स्तिथ है|

माना जाता है, इसे राजा अग्रसेन ने बनवाया था| इसके बाद 14वीं शताव्दी में अग्रवाल समाज ने इसका जीर्णोधार कराया|
यह पर्यटकों के लिए सातों दिन 9 से 5 तक खुला रहता है|

आशा करते हैं National war Memorial के बारे में हमारे द्वारा दी गई जानकारी से आपका ज्ञानवर्धन हुआ होगा| अगर आपको हमारी कोशिश पसंद आई हो तो इसे शेयर जरुर करें|

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