Ganga River History in Hindi | गंगा नदी का इतिहास

Ganga River History Information in Hindi | गंगा नहीं का इतिहास और सम्पूर्ण जानकारी | गंगा नदी कहाँ से निकलती है और कहाँ तक जाती है

दोस्तो, गंगा नहीं का इतिहास हमेशा से ही रोचक रहा है| हिन्दू पुराणों में गंगा को जीवन दायनी माँ का दर्जा दिया गया है| हज़ारों सालों से हिन्दू समाज गंगा की पूजा करते आया है|

दोस्तो आपके मन में भी सवाल आया होगा गंगा नदी कहाँ से शुरू होती है और कहाँ जाकर ख़त्म होती है|

आज की चर्चा में हम गंगा नदी के रोचक इतिहास और परीक्षा के द्रष्टिकोण से सम्पूर्ण जानकारी आपके साथ साझा करने वाले हैं| आशा करते हैं आप अंत हमारे साथ बने रहेंगे|

Ganga River Information in Hindi

गंगा नदी की सम्पूर्ण जानकारी

हिन्दू पुराणों के अनुसार भागीरथ स्वर्ग से गंगा को धरती पर लाये थे| धरती पर भगवान् शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को धारण किया और एक धारा अपनी जटाओं से धरती पर आने दी|

जिस दिन गंगा धरती पर अवतरित हुईं, उस दिन को दंगा दशहरा के रूप में पूरे भारत में मनाया जाता है|

गंगा नदी कहाँ से निकलती है

गंगा का निकास उत्तराखंड में स्तिथ गंगोत्री ग्लेशियर से होता है| इस ग्लेशियर में एक गोमुख नाम से गुफा है, इसी गुफा से गंगा की सबसे पहली धारा निकलती है|

यह ग्लेशियर करीब 3892 मीटर की उंचाई पर स्थित है| पोराणिक हिन्दू मान्यताओं के अनुसार गंगोत्री ग्लेशियर को भगवान् शिव की जटाएं माना जाता है|

यहाँ हम आपको बता दें, यह गोमुख, गंगोत्री शहर से 19 किलोमीटर दूर 3892 मीटर की ऊँचाई पर स्तिथ है| गंगोत्री से गोमुख तक पैदल ही जाया जा सकता है| गंगोत्री धाम यात्रा के बारे में तो आपने सुना ही होगा|

गंगोत्री ग्लेसिअर की लम्बाई 25 किलोमीटर चोड़ाई 4 किलोमीटर और उंचाई 40 मीटर है| गोमुख से निकलने वाली गंगा की धारा को भागीरथी कहा जाता है|

भागीरथी और अलकनंदा जल धाराओं से मिलकर बनती है गंगा

गंगा नदी (Ganga River) को अलग स्थानों पर अलग अलग नाम से जाना जाता है| हांलाकि गंगा का निकास गंगोत्री ग्लेसिअर में स्थित गोमुख ही माना जाता है| गोमुख एक गाय की आकृति की एक चट्टान है| लेकिन उत्तराखंड में आई भयंकर बाड़ में यह चट्टान कहीं छुप गई है या बह गई है|

आप निचे दिए गए चित्र में साफ देख सकते हैं, पहले और वर्तमान का गोमुख

इस पहली धारा को भागीरथी के नाम से जाना जाता है| एक और धारा हिमालय से निकलती है जिसे अलकनंदा कहते हैं| भागीरथी के मुकाबले अलकनंदा गंगा में ज्यादा पानी छोड़ती है|

अलकनंदा में पानी हिमालय के सतोपंथ ग्लेशियर बद्रीनाथ से आता है, 

उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में स्थित देवप्रयाग नामक स्थान पर भागीरथी और अलकनंदा की धारा एक दुसरे से मिलती हैं| और इसी स्थान से इस पवित्र धारा को गंगा के नाम से बोला जाता है|

पंच प्रयाग का गंगा नदी से सम्बन्ध

शायद आप जानकर आश्चर्यचकित हो जाएँ, गंगा नदी (Ganga River) 6 अलग अलग जल धाराओं से मिलकर बनी है|

यह 6 धाराएं हैं

  1. भागीरथी
  2. अलकनंदा
  3. धौलीगंगा
  4. नंदाकिनी
  5. पिंडर
  6. मन्दाकिनीं

यह धाराएं एक दुसरे से पांच अलग अलग स्थानों पर एक दुसरे से मिलती हैं| इन्ही पांच स्थानों को पंच प्रयाग बोला जाता है| हालाँकि 4 धाराएं धौलीगंगा, नंदाकिनी, पिंडर और मन्दाकिनीं क्रमशः अलकनंदा में मिलती हैं| अलकनंदा अंततः भागीरथी के साथ मिलकर गंगा जल धारा के रूप में जानी जाती है|

  • विष्णुप्रयाग – धौलीगंगा और अलकनंदा का मिलन
  • नंदप्रयाग – नंदाकिनी और अलकनंदा का मिलन
  • करनप्रयाग – पिंडर और अलकनंदा का मिलन
  • रुद्रप्रयाग – मन्दाकिनीं और अलकनंदा का मिलन
  • देवप्रयाग – भागीरथी और अलकनंदा का मिलन

ऋषिकेश होती हुई समतल धरती पर हरिद्वार में अवतरित होती है गंगा

करीब 250 किलोमीटर तक हिमालय के संकरे रास्तों से होते हुए पहली बार ऋषिकेश में हिमालय से बाहर आती है गंगा| यहाँ गंगा नदी (Ganga River) का वेग बहुत तेज होता है| आपने राफ्टिंग के बारे में तो सुना ही होगा| ऋषिकेश में गंगा के तेज बहाव में ही राफ्टिंग की जाती है|

ऋषिकेश होते हुए गंगा पहली बार समतल धरती पर हरिद्वार में अवतरित होती है| हरिद्वार, गंगा नदी (Ganga River) का सबसे बड़ा धार्मिक दर्शनीय स्थल है| हर साल गंगा दशहरा के अवसर पर लाखों श्रद्धालु हरिद्वार में आते हैं|

हरिद्वार में गंगा पर बना है भीमगोड़ा बाँध

हरिद्वार में हर की पौड़ी के पास भीमगोड़ा बाँध बना हुआ है| यह बाँध गंगा के पानी को गंगा नहर में मोड़ देता है| इसी पानी से उत्तर प्रदेश के दोअब क्षेत्र की सिंचाई होती है|

इस स्थान से पहले गंगा का बहाव दक्षिण पूर्व है लेकिन इस स्थान के बाद गंगा का बहाव दक्षिण पश्चिम की और हो जाता है|

गंगा के मुहाने प्रमुख शहरों के नाम

  • ऋषिकेश
  • हरिद्वार
  • कन्नौज
  • फरुखाबाद
  • कानपुर
  • अल्लाहबाद
  • चुनर
  • मिर्ज़ापुर
  • वाराणसी
  • गाजीपुर
  • पटना
  • हाजीपुर
  • छपरा
  • भागलपुर

 

गंगा की प्रमुख सहायक नदियाँ

 

गंगा नदी (Ganga River) के बायें किनारे से निचे दी गई प्रमुख सहायक नदियाँ गंगा में मिलती हैं 1. रामगंगा, 2. गोमती, 3. घाघरा (कर्नाली, सरयू), 4. गंडक, 5. कोसी (सप्तकोसी), 6. महानंदा

और गंगा के दायें किनारे से नीचे दी गई प्रमुख सहायक नदियाँ गंगा में मिलती हैं 1. यमुना, 2. तमसा, 3. सोन

निचे दिए गए छायाँ चित्र से आप बेहतर समझ पायेंगे

गंगा नदी (Ganga River) की सहायक नदियों की ज्यादा जानकारी के लिए आप हमारी यह पोस्ट को विस्तार से पढ़ लें – Click Here

प्रयागराज में गंगा का होता है यमुना और सरस्वती नदी से संगम

अलाहबाद शहर का नाम तो आपने सुना ही होगा, उत्तर प्रदेश राज्य के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जी ने अब इस शहर का नाम प्रयागराज कर दिया है| वास्तव में इस शहर का नाम प्रयागराज ही था| मुग़ल शासकों ने इस शहर का नाम बदल कर अल्लाहाबाद कर दिया था|

यह शहर हिन्दुओं की प्रगाड़ आस्था का प्रतीक है| इसी शहर में भारत की प्रमुख तीन नदियों का संगम होता है, गंगा यमुना सरस्वती. सरस्वती नदी हिमालय से निकलती तो है लेकिन एक स्थान पर पाताल में समा जाती है|

अंततः प्रयागराज में सरस्वती दुवारा से प्रथ्वी पर अवतरित होती है और गंगा में मिल जाती है|

वाराणसी शहर में गंगा बहती है विपरीत दिशा में

दोस्तो आपने सुना होगा, बनारस शहर में गंगा विपरीत दिशा में बहती है| वैसे ऐसा कुछ नहीं है, वाराणसी में गंगा का बहाव वक्रीय हो जाता है, सीधा रास्ता लेने के बजाय गंगा का बहाव तिरछा हो जाता है|

ऊपर दिए गए मानचित्र से आप बेहतर समझ पायेंगे

पाकुर में गंगा बंट जाती है दो नदियों में

पाकुर पश्चिम बंगाल में गंगा दो नदियों में बंट जाती है 1. भागीरथी हुगली और 2. गंगा गंगा की प्रमुख धारा बंगला देश में प्रवेश करती है| बांग्लादेश में गंगा को पद्मा कहा जाता है| यहाँ ब्रह्मपुत्र नदी की एक सहायक नदी जमुना और मेघना आकर मिलती है|

अंततः गंगा बंगाल की खाड़ी में जाकर मिल जाती है|

गंगा की दूसरी धारा पश्चिम बंगाल में हुगली कहलाती है|

भारत सरकार ने एक बाँध बंगला देश से पहले गंगा पर बनाया हुआ है| इस बाँध से हुगली नदी में गंगा का कुछ पानी मोड़ लिया जाता है| हुगली नदी समय समय पर छिछली (पानी कम हो जाना) हो जाती है| जिससे इस पर बने बंदरगाह में जहाजों की आवाजाही पर फर्क पड़ता था| लेकिन यह समस्या फरक्का बाँध बनने से दूर हो गई है|

सुंदरबन डेल्टा

गंगा और ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियाँ एक डेल्टा का निर्माण करती हैं जिसे सुंदरबन डेल्टा कहा जाता है| यहाँ गंगा बहुत छोटी छोटी धाराओं में बदल जाती है और अंततः बंगाल की खाड़ी में समाहित हो जाती है|

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