वीरता पर संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित | Sanskrit Shlokas on bravery with meaning in Hindi

वीरता पर संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित | Sanskrit Shlokas on bravery with meaning in Hindi. पराक्रम पर संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित

दोस्तो, हमारे धर्म ग्रन्थ ज्ञान का भण्डार हैं| इनमें लिखे संस्कृत श्लोक में जीवन जीने की कला लिखी हुई है| यदि हम इन संस्कृत श्लोक का भावार्थ समझकर इन्हें अपने जीवन में ग्रहण करें| तो निश्चित ही हमारे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएगा|

आज हम आपके साथ वीरता पर कुछ संकृत श्कोक शेयर कर रहे हैं आशा करते हैं इनसे आपका ज्ञानवर्धन अवश्य होगा|

नाभिषेको न संस्कारः सिंहस्य क्रियते वने।
विक्रमार्जितसत्त्वस्य स्वयमेव मृगेंद्रता।।

Meaning In Hindi
शेर को जंगल का राजा नियुक्त करने के लिए न तो कोई राज्याभिषेक किया जाता है, न कोई संस्कार । अपने गुण और पराक्रम से वह खुद ही मृगेंद्रपद प्राप्त करता है। यानि शेर अपनी विशेषताओं और वीरता (‘पराक्रम’) से जंगल का राजा बन जाता है।

दाने तपसि शौर्ये च यस्य न प्रथितं वशः ।
विद्यायामर्थलाभे च मातुरूच्चार एव सः ।।

अर्थात- जिस पुरष की कीर्ति दान देने में, तपस्या में, वीरता में,विद्योपार्जन में नहीँ फैली वह पुरूष अपनी माता की केवल विष्ठा के समान होता है।

मोऽस्य दोषो न मन्तव्यः क्षमा हि पटमं बलम्।
क्षमा गुणों ह्याक्तानां शक्तानां भूषणं क्षमा ॥

भावार्थ: क्षमा तो वीटों का आभूषण होता है। क्षमाशीलता कमजोर व्यक्ति को भी बलवान बना देती है औट वीटों का तो यह भूषण ही है।

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