पुरुष पर संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित | Sanskrit Shlokas on Man with Hindi meaning

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पुरुष पर संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित | Sanskrit Shlokas on Man with Hindi meaning

योगयुक्तो विशुद्धात्मा विजितात्मा जितेन्द्रियः।
सर्वभूतात्मभूतात्मा कुर्वन्नपि न लिप्यते।।5.7।।

हिंदी अर्थ:- जो पुरुष योगयुक्त, विशुद्ध अन्तकरण वाला, शरीर को वश में किये हुए, जितेन्द्रिय तथा भूतमात्र में स्थित आत्मा के साथ एकत्व अनुभव किये हुए है वह कर्म करते हुए भी उनसे लिप्त नहीं होता।।

अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्यायशोबलम्।।7।।

हिंदी अर्थ:- सभी को प्रणाम करने वालों तथा वृद्धों की नित्य सेवा करने वाले पुरुषों की आयु, विद्या, यश और बल ये चार वस्तुएँ बढ़ती हैं।

अश्वस्य भूषणं वेगो मत्तं स्याद् गजभूषणं।
चातुर्यम् भूषणं नार्या उद्योगो नरभूषणं।।

हिंदी अर्थ – घोड़े की शोभा उसके वेग से होती है और हाथी की शोभा उसकी मदमस्त चाल से होती है।नारियों की शोभा उनकी विभिन्न कार्यों में दक्षता के कारण और पुरुषों की उनकी उद्योगशीलता के कारण होती है।

षड्दोषाः पुरुषेणेह हातव्या भूतिमिच्छता।
निद्रा तन्द्रा भयंक्रोध आलस्यं दीर्घसूत्रता।।12।।

हिंदी अर्थ:- यहाँ ऐश्वर्य चाहने वाले मनुष्य को नँद, थकान, डर, गुस्सा, आलस्य और धीरे-धीरे काम करने की आदत इन छ: दुर्गुणों को छोड़ देना चाहिये।।

उदेति सविता ताम्रस्ताप एवास्तमेति च।।
सम्पत्तौ च विपत्तौ च महतामेकरूपता।।18||

हिंदी अर्थ:- सूर्य लाल ही उदय होता है और सूर्य लाल ही अस्त होता है। उसी प्रकार सम्पत्ति और विपत्ति में महापुरुष एक समान रहते हैं।

उत्साहसम्पन्नमदीर्घसूत्रं क्रियाविधिज्ञ व्यसनेव्यसक्तम्।
शुर कृतज्ञं दृढ़सौहृदञ्च, लक्ष्मीः स्वयं याति निवासहेतोः।।24||

हिंदी अर्थ:- उत्साह से पर्ण, आलस्य न करने वाले, कार्य की विधि को जानने वाले, बुरे कामों में न फंसने वाले वीर अहसान मानने वाले, पक्की मित्रता रखने वाले पुरुष के पास रहने के लिए लक्ष्मी स्वयं जाती है।

पापान्निवारयति योजयते हिताय,
गुह्यं निगृहति गुणान् प्रकटीकरोति।
आपदगतं च न जहाति ददाति काले,
सन्मित्रलक्षणमिदं प्रवदन्ति सन्तः।। 27||

हिंदी अर्थ:- उत्तम मित्र अपने भित्र को पापों से दूर करता है, हित भलाई. के कार्यों में लगाता है, उसकी गुप्त बातों को छिपाता है, गुणों को दर्शाता है प्रकट करता है., आपत्ति पड़ने पर साथ नहीं छोड़ता, समय पड़ने पर
सहायता करता है। महान् पुरुषों ने अच्छे मित्र के यही लक्षण बताये हैं।

निन्दन्तु नीतिनिपुणाः यदि वा स्तुवन्तु,
लक्ष्मीः समाविशतु गच्छतु वा यथेष्टम्।।
अद्यैव वा मरणस्तु युगान्तरे वा,
न्याय्यात् पथः प्रविचलन्ति पदं न धीराः।। ।।

हिंदी अर्थ:- नीति में निपुण लोगों की चाहें निन्दा करें अथवा प्रशंसा, लक्ष्मी आये या अपनी इच्छानुसार चली जाये, मृत्यु आज ही हो जाय या युग के बाद हो लेकिन धैर्यशाली पुरुष न्याय के मार्ग से एक कदम पीछे नहीं हटते।।

षड् दोषा: पुरुषेणेह हातव्या भूतिमिच्छता।
निद्रा तन्द्रा भयं क्रोध आलस्यं दीर्घसूत्रता।।

हिंदी अर्थ:- नींद, तन्द्रा (ऊँघना), डर, क्रोध, आलस्य और दीर्घ शत्रुता इन 6 दोषों को वैभव और उन्नति प्राप्त करने के लिए पुरूष को त्याग करना चाहिए।

द्यूतं पुस्तकवाद्ये च नाटकेषु च सक्तिता ।
स्त्रियस्तन्द्रा च निन्द्रा च विद्याविघ्नकराणि षट् ॥

हिंदी अर्थ:- जुआ, वाद्य, नाट्य (फिल्म) में आसक्ति, स्त्री (या पुरुष), तंद्रा, और निंद्रा – ये छः विद्या पाने में विघ्न होते हैं.

यथा ह्येकेन चक्रेण न रथस्य गतिर्भवेत्।
एवं परुषकारेण विना दैवं न सिद्ध्यति।।

हिंदी अर्थ – जैसे एक पहिये से रथ नहीं चल सकता। ठीक उसी प्रकार बिना पुरुषार्थ के भाग्य सिद्ध नहीं हो सकता है।

विद्याविनयोपेतो हरति न चेतांसि कस्य मनुजस्य ।
कांचनमणिसंयोगो नो जनयति कस्य लोचनानन्दम् ।।47 ||

हिंदी अर्थ:- विद्यावान और विनयी पुरुष किस मनुष्य का चित्त हरण नहि करता? सुवर्ण और मणि का संयोग किसकी आँखों को सुख नहि देता?

यथा चतुर्भिः कनकं परीक्ष्यते निर्घषणच्छेदन तापताडनैः।
तथा चतुर्भिः पुरुषः परीक्ष्यते त्यागेन शीलेन गुणेन कर्मणा।।

हिंदी अर्थ:- जिस प्रकार सोने का परिक्षण घिसने, काटने, तापने और पीटने जैसे चार प्रकारों से होता है। ठीक उसी प्रकार पुरूष की परीक्षा त्याग, शील, गुण और कर्मों से होती है।

दुर्लभं त्रयमेवैतत् देवानुग्रहहेतुकम् ।
मनुष्यत्वं मुमुक्षुत्वं महापुरुषसंश्रय: ॥

हिंदी अर्थ:- मनुष्य जन्म, मुक्ति की इच्छा तथा महापुरूषों का सहवास यह तीन चीजें परमेश्वर की कृपा पर निर्भर रहते है ।

उत्साहवन्तः पुरुषाः नावसीदन्ति कर्मसु ।

अर्थात: उत्साही लोग काम करने में पीछे नहीं हटते ।

न चैनं सहसाक्रम्य जरा समधिरोहति ।
स्थिरीभवति मांसं च व्यायामाभिरतस्य च ॥

हिंदी अर्थ:- व्यायामी मनुष्य पर बुढ़ापा सहसा आक्रमण नहीं करता, व्यायामी पुरुष का शरीर और हाड़ मांस सब स्थिर होते हैं ।

वीरभोग्या वसुन्धरा ।

हिंदी अर्थ:- पृथ्वी का उपभोग वीर पुरुष हि कर सकते है ।

करी च सिंहस्य बलं न मूषक: ॥

हिंदी अर्थ:- गुणी पुरुष ही दूसरे के गुण पहचानता है, गुणहीन पुरुष नही। बलवान पुरुष ही दूसरे का बल जानता है, बलहीन नही। वसन्त ऋतु आए तो उसे कोयल पहचानती है, कौआ नही। शेर के बल को हाथी पहचानता है, चूहा नही।

वाण्येका समलंकरोति पुरुषं या संस्कृता धार्यते ।

हिंदी अर्थ:- संस्कृत अर्थात् संस्कारयुक्त वाणी हि मानव को सुशोभित करती है ।

अप्रकटीकॄतशक्ति: शक्तोपि जनस्तिरस्क्रियां लभते निवसन्नन्तर्दारुणि लङ्घ्यो व*िनर्न तु ज्वलित:

हिंदी अर्थ:- बलवान पुरुष का बल जब तक वह नही दिखाता है, उसके बलकी उपेक्षा होती है। लकडी से कोई नही डरता, मगर वही लकडी जब जलने लगती है, तब लोग उससे डरते है।

विक्लवो वीर्यहीनो य: स दैवमनुवर्तते वीरा: संभावितात्मानो न दैवं पर्युपासते

हिंदी अर्थ:- जिसे अपने आप पे भरोसा नही है ऐसा बलहीन पुरुष नसीब के भरोसे रहता है। बलशाली और स्वाभिमानी पुरुष नसीब का खयाल नहीं करता।

न वध्यन्ते ह्मविश्वस्ता बलिभिर्दुर्बला अपि विश्वस्तास्त्वेव वध्यन्ते बलिनो दुर्बलैरपि

हिंदी अर्थ:- दुर्बल मनुष्य विश्वसनीय न होने पर भी बलवान मनुष्य उसे मारता नही है। बलवान पुरुष विश्वसनीय होने पर भी दुर्बल मनुष्य उसे मारता ही है।

यः समुत्पतितं क्रोधं क्षमयैव निरस्यति ।
यथोरगस्त्वचं जीर्णां स वै पुरुष उच्यते ॥

हिंदी अर्थ:- जिस प्रकार सांप अपनी जीर्ण-शीर्ण हो चुकी त्वचा को शरीर से उतार फेंकता है, उसी प्रकार अपने सिर पर चढ़े क्रोध को क्षमाभाव के साथ छोड़ देता है वही वास्तव में पुरुष है, यानी गुणों का धनी श्लाघ्य व्यक्ति है ।

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Anurag Pathak
इनका नाम अनुराग पाठक है| इन्होने बीकॉम और फाइनेंस में एमबीए किया हुआ है| वर्तमान में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं| अपने मूल विषय के अलावा धर्म, राजनीती, इतिहास और अन्य विषयों में रूचि है| इसी तरह के विषयों पर लिखने के लिए viralfactsindia.com की शुरुआत की और यह प्रयास लगातार जारी है और हिंदी पाठकों के लिए सटीक और विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराते रहेंगे
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