भारत की सबसे पहली ट्रेन कहाँ और कब चली थी

0
55
भारत में कब और कहाँ चली थी सबसे पहली ट्रेन (रेल)

दोस्तो, क्या आप जानना चाहते भारत में सबसे पहली ट्रेन (रेल) कब और कहाँ चली थी (when and Where first train of India ran in Hindi)|

दोस्तो अंग्रेजों ने भारत के लोगों और भारत की खनिज सम्पदा का शोषण किया जरुर था| लेकिन इसके साथ साथ कई महान तकनीक का निर्माण भी भारत में किया जिनको अभी भी हम प्रयोग कर रहे हैं|

इन्ही में से एक है रेल (Train)|

आइये चर्चा करते हैं, भारत में सबसे पहली ट्रेन (रेल) किस साल में और कब चली थी. भारत की सबसे पहली ट्रेन का क्या नाम था और कहाँ से कहाँ तक चली थी|

भारत में रेलवे का संशिप्त इतिहास

भारत में रेलवे की कहानी शुरू होती है 1832 से, भारत में रेल चलाने के लिए प्रथम प्रस्ताव 1832 में मद्रास में पेश किया गया|

1837 में रेड हिल्स (Red Hills) से चिंताद्रिपेत पुल (Chintadripet) तक पहली ट्रेन चलाई गई| इसका नाम रेड हिल रेलवे था|

इसमें एक भाप से चलने वाला इंजन लगा हुआ था जिसे विलियम अवेरी (William Avery) ने बनाया था|

यह रेल सर आर्थर कॉटन (Sir Arthur Cotton) ने बनाई थी| यह ट्रेन ग्रेनाइट पत्थरों को एक जगह से दूसरी जगह
ले जाने काम करती थी|

1845 में कॉटन ने दोव्लेस्वरम राजामुद्री ( Dowleswaram Rajahmundry) में एक और रेल ‘गोदावरी डैम कंस्ट्रक्शन’ रेलवे का निर्माण किया|

इस ट्रेन को, गोदावरी डेम तक पत्थर ले जाने के लिए प्रयोग में लाया जाता था|

ब्रिटिश राज में रेलवे विभाग की सूचि

8 मई 1845 को मद्रास रेलवे और ईस्ट इंडिया रेलवे विभाग बनाया गया|

1 अगस्त 1849 को ग्रेट इंडिया पेनिनसुलर रेलवे (GIPR) विभाग को संसद में कानून प्रस्तावित करके निर्माण किया गया|
1851 में सोलानी अकुएदुक्ट रेल (Solani Aqueduct Railway) का निर्माण किया गया जिसमें एक भाप का इंजन लगा हुआ था जिसका नाम था थोमसन|

इस रेल को सोनाली नदी तक निर्माण सामग्री भेजने के लिए प्रयोग किया जाता था|

1853 में चली थी भारत में सबसे पहली यात्री रेल (पेसेंजर ट्रेन)

भारत में पहली यात्री रेल 16 अप्रैल 1853 को चलाई गई थी|

यह रेल मुंबई (बोरी बंदर) छत्रपति शिवाजी टर्मिनल से ठाणे के बीच में चलाई गई थी|

इस ट्रेन में 14 यात्री डब्बे लगे हुए थे|

इस ट्रेन को खीचने के लिए तीन भाप इंजन लगाए गए थे इनका क्रमश नाम था ‘साहिब’, ‘सिंध’, और सुल्तान.

इस यात्री ट्रेन में 400 यात्री बेठे थे और इसने करीब 34 किलोमीटर की दूरी तय की थी|

दरअसल जो पटरी थी वो केवल 34 किलोमीटर लम्बी थी इससे ज्यादा दूरी यह रेल तय भी नहीं कर सकती थी|

यह पटरी ग्रेट इंडिया पेनिनसुलर रेलवे (GIPR) ने बनाई थी|

यह पटरियां 5 फीट 6 इंच ब्रॉड गेज पर बनाई गई थी|

यह ट्रेन दोपहर 3.30 पर छत्रपति शिवाजी टर्मिनल से चली और शाम 4.45 पर ठाणे पहुंची|

दक्षिण भारत में इस दिन चली थी पहली पसेंजर ट्रेन

दक्षिण भारत में सबसे पहली रेल चेन्नई के रोयापुरम स्टेशन से वाल्लाजाह मार्ग (Wallajah Road) जो की अब अर्काट (Arcot) के नाम से जाना जाता है के बीच में 1 जुलाई 1856 को चली थी| इसने करीब 97 किलोमीटर का सफ़र तय किया था|

क्या आप जानते हैं विश्व में कब चली थी सबसे पहली पसेंजर ट्रेन (यात्री रेल)

यदि विश्व की बात करें, भाप के इंजन का आविष्कार जार्ज स्टीफेंसन ने 1814 में किया था|

इस इंजन की सहायता से विश्व में पहली यात्री रेल (पेसंजर ट्रेन) 27 सितम्बर 1825 को लन्दन में चलाई गई| इस यात्री ट्रेन में 38 डिब्बे थे और 600 यात्री सवार थे|

इस ट्रेन को लन्दन में डार्लिंगटन से स्टॉकटोन तक का 37 मील का सफ़र 14 मील प्रति घंटे की रफ़्तार से पूरा किया| यह पटरियां 5 फीट 6 इंच ब्रॉड गेज पर बनाई गई थी|

यह भी पढ़ें:-

भारतीय लोक नृत्य की सूचि

भारत के इतिहास में प्रथम महिला की सूचि

क्यों होते हैं माला में 108 दाने | क्यों करते हैं मन्त्र जाप में माला का प्रयोग

Loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here