असत्य पर संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित | Sanskrit Shlokas on False-hood with Hindi Meaning

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असत्य पर संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित | Sanskrit Shlokas on False-hood with Hindi Meaning

अनृतं चारित्रभ्रशकारणम्।।

हिंदी अर्थ:- असत्य से चरित्र नष्ट होता है। अर्थात जो मनुष्य असत्य का आचरण करता है, उसका चरित्र भ्रष्ट हो जाता है।

नानृताद् पातकं परम्।।

हिंदी अर्थ:- असत्य से बढ़कर और कोई पाप नहीं है।

नानृतं हि सदा लोके पूज्यते।

हिंदी अर्थ:- संसार में कभी भी असत्य की पूजा नहीं होती।

अनृतं जीवितस्यार्थे वदन्न स्पृश्तेऽनृतैः।।

हिंदी अर्थ:- किसी जीव के प्राणों की रक्षा के लिए यदि असत्य बोलना पड़े,तो असत्य बोलने वाले को पाप नहीं लगता है |

मृषावादे भवेद् दोषाः सत्ये दोषो न विद्यते।।

हिंदी अर्थ:- असत्य बोलने से दोष लगता है। सत्य बोलने से दोष नहीं लगता।

न रूपमनृतस्यास्ति नानृतस्यास्ति संततिः।
नानृतस्याधिपत्यं च कुत एव गतिः शुभा।।

हिंदी अर्थ:- असत्य बोलने वाले मनुष्य का कोई रूप नहीं होता है, न ही असत्य बोलने वाले को संतान मिलती है| असत्य बोलने वाले मनुष्य को सम्मान भी नहीं मिलता है, उसे शुभ गति भी नहीं मिलती है।

नासत्यवादिनः सख्यं न पुण्यं न यशो भुवि।
दृश्यते नापि कल्याणं कालकूटमिवाश्नतः।।

भावार्थ:- कलाकूट पीने वाले की तरह असत्य बोलने वाले को इस संसार में कोई यश, पुण्य, यश या कल्याण नहीं मिलता।

सत्यमेव जयते नानृतम् सत्येन पन्था विततो देवयानः।
येनाक्रमत् मनुष्यो ह्यात्मकामो यत्र तत् सत्यस्य परं निधानं।।

भावार्थ:- जीत सत्य की होती है असत्य की नहीं। परमात्मा का मार्ग सत्य से परे है। जिस पथ पर मनुष्य स्वयं कर्म करता है, वही सत्य का परमधाम है।

न नर्मयुक्तं वचनं हिनस्ति न स्त्रीषु राजन् न विवाहकाले।
प्राणात्यये सर्वधनापहारे पञ्चानृतान्याहुरपातकानि||

हिंदी अर्थ:- राजन! पांच प्रकार का असत्य भाषण पापरहित बताया गया है। वह है, हंसी में, स्त्रियों से, विवाह के अवसर पर, प्राण संकट में पड़ने पर और धन के नष्ट होने पर।

नायं लोकोऽस्ति न परो न च पूर्वान् स तारयेत्।
कुत एष जनिष्यांस्तु मृषावादपरायणः।।

हिंदी अर्थ:- असत्य बोलने से मनुष्य को न इस लोक में सुख मिलता है न परलोक में। वह अपने पूर्वजों को भी नहीं सफल बना सकता है । वह होने वाली सन्तान का भी भला नहीं कर सकता है।

सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।
नासत्यं च प्रियं ब्रूयात् एष धर्मः सनातनः।।

भावार्थ:- सच और प्रिय बोलना चाहिए; लेकिन अप्रिय सत्य न बोलना और प्रिय असत्य न बोलना, यही सनातन धर्म है।

अनृतं तमसो रुपं तमसा नीयते ह्यधः।
तमोग्रस्ता न पश्यन्ति प्रकाशं तमसाSSवृत्तः।।

हिंदी अर्थ:- असत्य अंधकारमय है। अंधकारया तमोगुण से मनुष्य का अधोपतन होता है। अज्ञान के अंधकार से घिरा मनुष्य ज्ञान का प्रकाश नहीं देख पाता है।

न पुत्रात् परमो लाभो न भार्यायाः परं सुखम्।
न धर्मात् परमं मित्रं नानृतात् पातकं परम्।।

भावार्थ:- पुत्र से बढ़कर कोई लाभ नहीं, पत्नी से बढ़कर कोई सुख नहीं, धर्म से श्रेष्ठ कोई मित्र नहीं और असत्य के समान पूर्ण कोई नहीं है।

नानृतात्पातकं किञ्चित् न सत्यात् सुकृतं परम्।
विवेकात् न परो बन्धुः इति वेदविदो विदुः।।

भावार्थ:- वेदों के विद्वानों का कहना है कि असत्य असत्य के अतिरिक्त और कोई बुराई नहीं है; सत्य के अलावा कोई नहीं है, और विवेक के अलावा कोई भाई नहीं है।

अनृतं न वदेद् विद्वास्तपस्तप्त्वा न विस्मयेत्।
नार्तोऽप्यभिभवेद विप्रान् न दत्त्वा परिकीर्तयेत्।।

हिंदी अर्थ:- विद्वान व्यक्ति को असत्य नहीं बोलना चाहिए। उसे तपस्या करके अभिमान नहीं करना चाहिए। कष्ट में पड़ने पर भी ब्राह्मण का अपमान नहीं करना चाहिए। दान देकर उस दान की चर्चा नहीं करनी चाहिए।

सत्यमेव जयते नानृतम् सत्येन पन्था विततो देवयानः।
येनाक्रमत् मनुष्यो ह्यात्मकामो यत्र तत् सत्यस्य परं निधानं।।

भावार्थ:- जीत सत्य की होती है असत्य की नहीं। परमात्मा का मार्ग सत्य से परे है। जिस पथ पर मनुष्य स्वयं कर्म करता है, वही सत्य का परमधाम है।

सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।
नासत्यं च प्रियं ब्रूयात् एष धर्मः सनातनः।।

भावार्थ:- सच और प्रिय बोलना चाहिए; लेकिन अप्रिय सत्य न बोलना और प्रिय असत्य न बोलना, यही सनातन धर्म है।

प्राणत्राणेऽनृतं वाच्यमात्मनो वा परस्य च।
गुर्वर्थे स्त्रीषु चैव स्याद् विवाहकरणेषु च।।

हिंदी अर्थ:- अपने या किसी दूसरे के प्राणों की रक्षा के लिए, गुरु के लिए, स्त्रियों से विनोद करते समय और विवाह के प्रसंग में यदि असत्य बोल दिया जाए तो पाप नहीं लगता है।

नानृतात्पातकं किञ्चित् न सत्यात् सुकृतं परम्।
विवेकात् न परो बन्धुः इति वेदविदो विदुः।।

भावार्थ:- वेदों के विद्वान कहते हैं कि अनृत (असत्य) के अलावा और कोई बुराई नहीं है; सत्य के अलावा कोई अच्छा नहीं है और विवेक के अलावा कोई भाई नहीं है।

नास्ति सत्यसमो धर्मो न सत्याद्विद्यते परम्।
न हि तीव्रतरं किञ्चिद् नृतादिह विद्यते।।

हिंदी अर्थ:- सत्य जैसा अन्य धर्म नहीं। सत्य से पर कुछ नहीं। असत्य से ज्यादा तीव्रतर कुछ नहीं।

असतो मा सदगमय ॥
तमसो मा ज्योतिर्गमय ॥
मृत्योर्मामृतम् गमय ॥

अर्थ : हमको – असत्य से सत्य की ओर ले चलो। अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो.

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Anurag Pathak
इनका नाम अनुराग पाठक है| इन्होने बीकॉम और फाइनेंस में एमबीए किया हुआ है| वर्तमान में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं| अपने मूल विषय के अलावा धर्म, राजनीती, इतिहास और अन्य विषयों में रूचि है| इसी तरह के विषयों पर लिखने के लिए viralfactsindia.com की शुरुआत की और यह प्रयास लगातार जारी है और हिंदी पाठकों के लिए सटीक और विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराते रहेंगे
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