नवरात्री क्यों मनाते हैं | Why Navratri is Celebrated in Hindi

नवरात्री क्यों मनाते (मनाई जाती) है | चैत्र और शरद नवरात्री का महत्त्व इन हिंदी | Chaitra or sharad Maha Narvatre Navratri History story Importance in Hindi

नवरात्री, भारत का एक प्रमुख त्यौहार है| मुख्यतः साल में 2 बार पुरे भारत में नवरात्री का त्यौहार मनाया जाता है| लेकिन दोस्तो, इस आधुनिक समय में हम अपने रीती रिवाजों और धर्म से बहुत दूर हो गए हैं|

आपके मन में भी प्रश्न होगा की, नवरात्रे (नवरात्री) क्यों मनाते हैं और इसका महत्त्व क्या है| आज इस पोस्ट में हम इसी की चर्चा करेंगे|

नवरात्री क्यों मनाई जाती है

Why Navratri is celebrated in Hindi

नवरात्री क्यों मनाई जाती है

नवरात्री एक संस्कृत शब्द है,जिसका अर्थ है ‘नौ रातें’| इन नौ दिन माँ शक्ति दुर्गा के 9 रूपों की विधि विधान से पूजा की जाती है|

भारत के अलग क्षेत्रों में नवरात्री का अपना एक अलग महत्त्व है| जहाँ पश्चिम बंगाल में देवी शक्ति को माँ दुर्गा और काली के रूप में पूजा जाता है|

वहीं उत्तर भारत में भगवान् राम की रावण पर विजय के रूप में भी यह त्यौहार मनाया जाता है|

दक्षिण भारत में नवरात्रों के प्रथम दिन गुड़ी पड़वा तेलगू में उगदी का त्यौहार भी मनाया जाता है|

मुख्यतः हिन्दुओं में यह त्यौहार असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है|

जहाँ शक्ति ने दुर्गा का रूप धारण कर असुरों का संघार किया और भगवान् राम ने रावण का वध कर प्रजा को एक दुष्ट राजा से छुटकारा दिलाया|

साल में 2 बार क्यों मनाते हैं नवरात्री

हिन्दू धर्म ग्रंथों शक्ता और वैष्णव पुराण के अनुसार साल में चार बार नवरात्रे आते हैं| लेकिन हिन्दू कैलेंडर के अनुसार 2 नवरात्रे ही प्रमुख हैं| पहला है

शरद नवरात्री (महानवरात्रि):-

चारों नवरात्री में सबसे ज्यादा मनाई जाने वाली नवरात्री शारदा नवरात्री है| यह अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आगे नौ दिन तक मनाई जाती है|

इसे महानवरात्रि भी कहा जाता है| अग्रेजी कैलेंडर के अनुसार सितम्बर और अक्टूबर के महीने में यह नवरात्री मनाई जाती हैं|

हर साल की तारीख अलग होती हैं| तारीख हिन्दू कैलेंडर की तिथि के अनुसार ही तय की जाती हैं|

चैत्र नवरात्री (वसंत नवरात्री):-

चैत्र नवरात्री चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से अगले 9 दिनों तक मनाई जाती है| अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार मार्च और अप्रैल के महीने में इस त्यौहार को मनाया जाता है|

इस नवरात्री को राम नवरात्री भी कहते हैं|

माघ नवरात्री:-

यह नवरात्री माघ के महीने में आती है| अग्रेजी कैलेंडर के अनुसार जनवरी और फरवरी के महीने में| इस नवरात्री का पांचवां दिन वसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है|

इस त्यौहार में माँ शक्ति की सरस्वती के रूप में पूजा की जाती है|

असाढ़ नवरात्री:-

यह नवरात्री असाढ़ के महीने में आती है| इस नवरात्री का कोई ज्यादा महत्त्व नहीं है|

इस त्यौहार में अलग स्थानों पर माता शक्ति सभी स्वरुप माँ दुर्गा, काली, सरस्वती की पूजा की जाती है|

नवरात्री क्यों मनाते हैं और इसके मुख्य धार्मिक कारण

चैत्र और शरद नवरात्री मनाने के अपने अपने कारण हैं| पहले जान लेते हैं चैत्र नवरात्री मनाने के क्या धर्मिक कारण हैं|

चैत्र नवरात्री मनाने के कारण

प्रथम कारण

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन आदिशक्ति पृथ्वी पर प्रकट हुयी थी और ब्रह्म जी से सृष्टि की
रचना के लिए कहाँ और इस दिन ब्रह्म जी और आदि शक्ति ने ब्रह्माण्ड रचने का कार्य प्रारंभ किया|

ऐसा माना जाता है, चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन ही भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लेकर पृथ्वी पर जीवन का प्रारंभ किया|

इतना ही नहीं भगवान विष्णु का सातवाँ अवतार भगवान राम का भी जन्म चैत्र नवरात्रि में ही हुआ था|

यदि आप दक्षिण भारत में जाओगे तो वहां चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष का प्रथम दिन नए साल का आरंभ माना जाता है| और इस दिन को गुड़ी पड़वा और तेलुगु में उगदी के नाम से मनाया जाता है|

दोनों में समानता है नए साल का आरंभ और स्रष्टि के आरम्भ का प्रथम दिन|

नवरात्री के नौवें दिन भगवान् राम के जन्म दिन के रूप में राम नवमी मनाई जाती है|

इसलिए चैत्र धार्मिक रूप से काफी महत्वपूर्ण हैं|

द्वितीय कारण

इसके अलावा इस दिन से ऋतू चक्र दुवारा से शुरू होता है| मौसम बदलने से बिमारियों का भी आगमन होता है| इसलिए हवन में जड़ी बूटी दाल के हवन पूजा की जाती है|

जिससे वातावरण में उपस्थित बेक्टेरिया मर जाते हैं और हवा पानी शुद्ध हो जाता है|

शारदीय नवरात्री मनाने के कारण

शारदीय नवरात्री मनाने का प्रमुख धार्मिक कारण यह है की भगवान् राम ने रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए समुद्र के किनारे 9 दिन शक्ति की पूजा की थी|

दसवें दिन भगवान् राम ने रावण का वध कर दिया था| इसी दिन को अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में मनाया जाता है|

इसलिए महानवरात्री के दसवें दिन रावण का पुतला जलाकर दशहरा भी मनाया जाता है|

यह परम्परा भगवान् राम के समय से अब तक चली आ रही है

भगवान् राम के द्वारा की गई चंडी पाठ की पौराणिक कथा

रावण के विरुद्ध युद्ध मे विजय प्राप्त करने के लिए श्रीराम जी ने ब्रह्माजी के सुझाव पर माँ दुर्गा (चंडी) देवी को प्रसन्न करने के लिए हवन की व्यवस्था की|

इस हवन के लिए दुर्लभ एक सौ आठ (108) नीलकमल का प्रबंध किया गया. अमरता की चाह मे रावण ने भी चंडी पूजा प्रारम्भ की|

रावण ने अपनी शक्ति से एक नीलकमल दुर्गा (चंडी) पूजन की हवन सामग्री से गायब कर दिया| जिससे श्रीराम के
संकल्प टूटने और देवी के रुष्ट होने का भय था|

तब भगवान राम को स्मरण हुआ कि उन्हें लोग ‘कमलनयन नवकंच लोचन‘कहते हैं, तो क्यों न संकल्प पूरा करने के लिए अपना एक नेत्र अर्पित कर दिया जाए|

अपने बाण से अपना नेत्र निकालने ही वाले थे की देवी प्रकट हो गयी और श्रीराम से प्रसन्न हुई और उन्हे विजयश्री का आशीर्वाद दिया।

वहीं रावण के चंडी पाठ में हनुमान ब्राहमण का रूप धारण कर यज्ञ में शामिल हो गए|

हनुमानजी का ज्ञान और सेवा भाव देखकर ब्राह्मण खूश हो गए और उनसे वरदान माँगने को कहा।

इस पर हनुमानजी ने विनम्रतापूर्वक कहा- प्रभु, आप प्रसन्न हैं तो जिस मंत्र से यज्ञ कर रहे है, उसका एक अक्षर मेरे कहने से बदल दीजिए।

मंत्र में जयादेवी… भूर्तिहरिणी में ‘ह’ के स्थान पर ‘क’ उच्चारित करें, यही मेरी इच्छा है।

ब्राह्मण इस रहस्य को समझ नहीं सके और तथास्तु कह दिया। भूर्तिहरिणी यानी कि प्राणियों की पीड़ा हरने वाली और ‘करिणी’ का अर्थ हो गया प्राणियों को पीड़ित करने वाली, जिससे देवी रुष्ट हो गईं और रावण का सर्वनाश करवा दिया।

श्रीराम जी के द्वारा किया गया 9 दिन का चंडी पाठ और यज्ञ आज भी नवरात्री के रूप में मनाया जाता है|

नवरात्री मनाने का अन्य कारण

प्राकर्तिक कारण

चैत्र नवरात्री के ठीक बाद गर्मी शुरू हो जाती है और शारदीय नवरात्री के बाद सर्दी| दोनों नवरात्रे ऋतू परिवर्तन को दर्शाते हैं|

पूरी तरह से ऋतू परिवर्तन होने में 9 दिन लगते हैं| नवरात्रे के यह 9 दिन दो ऋतू के बीच का समय होता है| इन दिनों वातावरण में बीमारी वाले बेक्टेरिया बढ़ जाते हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधकता क्षमता भी कमजोर हो जाती है|

इसलिए इन 9 दिन हवन पूजा पाठ की जाती हैं जिससे हवा के हानिकारण कीटाणु मर जाएँ|

इसके अलावा पुरे 9 दिन केवल स्वातिक भोजन करने का विधान है क्योंकि तामसिक और गरिष्ट भोजन से शरीर में जाने वाले कीटाणुओं से कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता बचाव नहीं कर पाती और हम बीमार हो जाते हैं|

इसलिए यह 9 दिन को त्यौहार के रूप में मनाये जाना भी इसका एक कारण है|

भोगोलिक कारण

भोगोलिक कारण की बात करें तो ऋतू परिवर्तन के कारण बीमारी और शारीरिक कष्ट का भी सामना करना पड़ता है|

इसलिए लगातार 9 दिन व्रत और संयम रखकर हम अपने शरीर को ऋतू परिवर्तन से होने वाले शरीर पर दुष्प्रभाव के लिए तैयार कर लेते हैं|

नवरात्री की पौराणिक कारण

Navratri Story in Hindi

धार्मिक कथाओं के अनुसार एक बार महिसासुर राक्षस ने शिव से अमरता का वरदान ले लिया था|

इस राक्षस ने देवताओं के स्वर्ग के द्वार को नरक के द्वार के पास ले आया था| और देवताओं पर भारी अत्याचार कर रहा था|

इस राक्षस से पानी सुरक्षा के लिए देवता गण तीनों देवों से मदद मागने गए| सभी देवताओं और त्रिदेव ने अंततः अपनी उर्जा से एक देवी का निर्माण किया|

उर्जा से उत्पन्न होने के कारण माँ दुर्गा को शक्ति भी कहा जाता है| सभी देवताओं और त्रिदेव की उर्जा से उत्पन्न होने के कारण इन पर सभी देवताओं के शस्त्र भी हैं|

महिसासुर, माँ दुर्गा के स्वरुप को देखकर मोहित हो गया और इनके सामने शादी का प्रस्ताव रखा|

माँ शक्ति ने महिसासुर के सामने शर्त रखी, यदि वह उनसे विवाह करना चाहता है तो उन्हें युद्ध में हराना होगा|

9 दिन तक नवरात्री क्यों मनाई जाती है

इस तरह 9 दिन तक महिसासुर और माँ दुर्गा के बीच युद्ध चला और अंततः नौवें दिन माँ शक्ति ने महिसासुर का वध कर दिया| इसलिए भी 9 दिन तक नवरात्रे मनाये जाते हैं|

यह भी पढ़ें

9 देवियों के नाम और महत्त्व तस्वीरों के साथ

नवरात्री व्रत के नियम | नवरात्री व्रत में इन बातों का रखें ध्यान

नवरात्री व्रत कथा और विधि

नवरात्री व्रत का खाना ( सम्पूर्ण जानकारी )

नवरात्री पूजा विधि और सामग्री की सम्पूर्ण जानकारी

नवरात्री का महत्त्व ( नवरात्रि पूजा के नौ दिन ही क्यों )

Share your love
Default image
Viral Facts India
Articles: 330

Leave a Reply

close