व्यायाम पर संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित | Sanskrit Shlokas on Exercise with meaning in Hindi

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व्यायाम पर संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित | Sanskrit Shlokas on Exercise with meaning in Hindi

व्यायामात् लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखं।
आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम् ॥

हिंदी अर्थ:- व्यायाम से स्वास्थ्य, लम्बी आयु, बल और सुख की प्राप्ति होती है। निरोगी होना परम भाग्य है और स्वास्थ्य से अन्य सभी कार्य सिद्ध होते हैं ।

हिंदी अर्थ:- व्यायाम से निरोगी काया, ताकत, लम्बी उम्र और सुख की प्राप्ति होती है| निरोगी काया सोभाग्य की बात है और स्वस्थ शरीर से सभी मनोरथ और कार्य सिद्ध होते हैं|

व्यायामं कुर्वतो नित्यं विरुद्धमपि भोजनम् ।
विदग्धमविदग्धं वा निर्दोषं परिपच्यते ॥

हिंदी अर्थ:- नियमित व्यायाम करने से मनुष्य यदि गरिष्ठ, जला, कच्चा भोजन भी खाए तो वो भी आसानी से पचा लेता है और शरीर को कोई भी हानि नहीं होती है|

न चास्ति सदृशं तेन किंचितस्थौल्यापकर्षणम्।
प्रसन्नात्मेन्द्रियमनाः है स्वस्थ इत्यभिधीयते।।

हिंदी अर्थ:- अधिक स्थूलता को दूर करने के लिए व्यायाम से बदकर कोई और दवा नही है व्यायामी मनुष्य से उसके शत्रु सदेव डरते है और उसे कभी दुःख नही पहुचाते है

शरीरोपचयः कान्तिर्गात्राणां सुविभक्तता ।
दीप्ताग्नित्वमनालस्यं स्थिरत्वं लाघवं मृजा ॥

हिंदी अर्थ व्यायाम से शरीर शक्तिशाली बनता है व्यायाम से शरीर की सुन्दरता बदती है शरीर के सब अंग खुबसूरत होते है पाचनशक्ति तीव्र होती है आलस दूर होता भागता है शरीर में स्फूर्ति आती है सभी दोषों की शुद्धि होती है

न चैनं सहसाक्रम्य जरा समधिरोहति ।
स्थिरीभवति मांसं च व्यायामाभिरतस्य च ॥

हिंदी अर्थ:- से व्यायामी मनुष्य पर बुढ़ापा सहज ही आक्रमण नही करता है ,व्यायामी पुरुष का शरीरबहुत मजबूत होता है और रोगों से लड़ने की शक्ति होती है

श्रमक्लमपिपासोष्णशीतादीनां सहिष्णुता ।
आरोग्यं चापि परमं व्यायामदुपजायते ॥

हिंदी अर्थ:- श्रम थकावट ग्लानि (दुःख) प्यास शीत (जाड़ा) उष्णता (गर्मी) आदि सहने की शक्ति व्यायाम से ही आती है और परम आरोग्य अर्थात् स्वास्थ्य की प्राप्ति भी व्यायाम से ही होती है ।

व्यायामस्विन्नगात्रस्य पद्भ्यामुद्वर्तितास्य च।
व्याधयो नोपसर्पन्ति वैनतेयमिवोरगः
वयोरुपगुणैः हीनमपि कुर्यात्सुदर्शनम्।।

हिंदी अर्थ:- व्यायाम करने से उत्पन्न पसीने से लथपथ शरीर वाले के और दोनों पैरों को ऊपर उठाकर व्यायाम करने वाले के पास रोग उसी प्रकार नहीं जाते हैं जिस प्रकार गरुड़ के पास साँप नहीं जाते हैं। अतः व्यायाम आयु, रूप और गुण से रहित व्यक्ति को भी सुन्दर दिखाई देने वाला बना देता है।

समदोषः समाग्निश्च समधातुमलक्रियः।
प्रसन्नात्मेन्द्रियमनाः स्वस्थ इत्यभिधीयते।।

हिंदी अर्थ:- जिस मनुष्य के दोष वात, पित्त और कफ, अग्नि, रसादि सात धातु, सम अवस्था में तथा स्थिर रहते हैं, मल मूत्रादि की क्रिया ठीक होती है और शरीर की सब क्रियायें समान और उचित हैं, और जिसके मन इन्द्रिय और आत्मा प्रसन्न रहें वह मनुष्य स्वस्थ है।

शरीरायासजननं कर्म व्यायामसंज्ञितम्।
तत्कृत्वा तू सुखं देहं विमृद्नीयात् समन्ततः।।

हिंदी अर्थ:- ऐसे परिश्रम से परिपूर्ण कार्य जिससे शरीर में थकावट आती है व्यायाम कहलाते हैं अर्थात उसे व्यायाम कहते हैं उसे करके सुखपूर्वक शरीर की पूरी तरह से मालिश करनी चाहिए।

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Suvidha Pathak
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