परिवार पर संस्कृत श्लोक | Sanskrit Shlokas on family with meaning in Hindi

परिवार (गृहस्थी) पर संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित | Sanskrit Shlokas on Family with meaning in Hindi | कुटुंब, कुनबा, खानदान, घराना पर संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित

दोस्तो, हिन्दू समाज में हमेशा से ही परिवार का महत्त्व रहा है| खानदान को देख कर ही पिता अपनी बेटी की शादी करता है|

खानदान पर संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित

आइये जानते हैं हमारे शास्त्रों में परिवार के बारे में क्या लिखा गया है|

कुलं च शीलं च वयश्च रुपम विद्यां च वित्तं च सनाथता च ।
तान् गुणान् सप्त परीक्ष्य देया कन्या बुधैः शेषमचिन्तनीयम् ॥

हिंदी अर्थ:- कुल, शील (शालीनता), आयु, रुप (सुन्दरता), विद्या (योग्यता), द्रव्य (धन), और पालक (पालने वाला) – ये सात बातें ध्यान में रखकर देखकर, अन्य किसी बात का विचार न करके बुद्धिमान मनुष्य कोअपनी कन्या (पुत्री) का विवाह करना चाहिए ।

अविनीतः सुतो जातः कथं न दहनात्मकः ।
विनीतस्तु सुतो जातः कथं न पुरुषोत्तमः ||

हिंदी अर्थ :- यदि किसी व्यक्ति का पुत्र अविनीत (दुष्ट तथा दुर्व्यवहार करने वाला) हो जाये तो ऐसे पिता की आत्मा दुःख की आग में जलती है , और यदि उसका पुत्र विनयशील और आज्ञाकारी हो तो ऐसा पिता एक श्रेष्ठतम पुरुष कहलाया जायेगा ?

यदि पुत्रः कुपुत्रः स्यात् व्यर्थो हि धनसञ्चयः ।
यदि पुत्रः सुपुत्रः स्यात् व्यर्थो हि धनसञ्चयः ॥

हिंदी अर्थ:- यदि पुत्र कुपुत्र (व्यभिचारी, दुष्ट और आलसी) हो तो धनसंचय व्यर्थ है| और यदि पुत्र सुपुत्र हो, तो भी धनसंचय व्यर्थ है।

यदि पुत्र कुपुत्र है तो उसके लिए धन संचय व्यर्थ है क्योंकि वह आपके द्वारा अर्जित की गई धन समपदा को व्यर्थ ही खर्च करके नष्ट कर देगा| और यदि पुत्र सुपुत्र है, तो ऐसे पुत्र के लिए भी धन संचय करने का कोई ओचित्य नहीं क्योंकि वह खुद ही धन अर्जित कर लेगा|

वरमेको गुणी पुत्रो न च मूर्खशतान्यपि।
एकश्चन्द्रस्तमो हन्ति न च तारागणोऽपि च ॥

हिंदी अर्थ:- सौ मूर्ख पुत्रों से तो एक गुणवान पुत्र अच्छा जैसे अकेला चंद्रमा ही रात के अंधकार का नाश कर देता है, पर असंख्य तारों के समूह से भी अंधकार का नाश नहीं होता।

प्रीणाति य सुचरितैः पितरं स पुत्रो यद्भर्तुरेव हितमिच्छति तत्कलत्रम् ।
तन्मित्रमापदि सुखे च समक्रियं यत् एतत् त्रयं जगति पुण्यकृतो लभन्ते ॥

हिंदी अर्थ:- पिता को अपने सदाचरण से खुश करने वाला पुत्र, केवल पति का हित चाहने वाली पत्नी, और जो सुख-दुःख में समान आचरण रखता हो ऐसा मित्र – ये तीन जगत में पुण्यवान को हि प्राप्त होते हैं।

ऋणकर्ता पिता शत्रुः माता च व्यभिचारिणी।
भार्या रूपवती शत्रुः पुत्रः शत्रुरपण्डितः ॥

हिंदी अर्थ:- कर्जा करने वाला पिता, व्यभिचारिणी माता, रुपवती स्त्री, और अनपढ पुत्र – शत्रुवत् हैं।

दिग्वाससं गतव्रीडं जटिलं धूलिधूसरम् ।
पुण्याधिका हि पश्यन्ति गंगाधरमिवात्मजम ॥

हिंदी अर्थ:- गंगा को धारण करने वाले महादेव की भाँति दिगंबर, निर्लज्ज, जटावाले, और धूल से मैले बालक को तो कोई विशेष पुण्यशाली जीव हि देख सकता (अर्थात् ऐसा बच्चा किसे अच्छा लगेगा?

पात्रं न तापयति नैव मलं प्रसूते स्नेहं न संहरति नैव गुणान् क्षिणोति ।
द्रव्यावसानसमये चलतां न धत्ते सत्पुत्र एष कुलसद्मनि कोऽपि दीपः ॥

हिंदी अर्थ:- कुलवान के घर में प्रकट हुआ पुत्र तो एक विलक्षण दिये जैसा है। दिया तो पात्र को तपाता है, पर पुत्र कुल को नहीं तपाता; दिया मेश बनाता है पर पुत्र मैल नहीं निकालता; दीपक तेल पी जाता है पर पुत्र स्नेह का नाश नहीं करता; #दिया गुण (वाट) को कम करता है पर पुत्र गुण कम नहीं करता; दिया सामग्री कम होने पर बूझ जाता है पर पुत्र द्रव्य कम होने पर कुल का त्याग नहीं करता।

कोऽर्थः पुत्रेण जातेन यो न विद्वान न धार्मिकः ।
काणेन चक्षुषा किं वा चक्षुःपीडैव केवलम् ॥

हिंदी अर्थ:- जो विद्वान और धार्मिक नहीं ऐसा पुत्र जनने से क्या लाभ| एक आँख का क्या उपयोग| वह तो केवल पीडा ही देती है।

विद्याविहीना बहवोऽपि पुत्राः कल्पायुषः सन्तु पितुः किमेतैः ।
क्षयिष्णुना वापि कलावता वा तस्य प्रमोदः शशिनेव सिन्धोः ॥

हिंदी अर्थ:- चंद्र क्षयरोग से पीडित है, फिर भी कलावान होने से समंदर को आनंद होता है। वैसे हि एक दो भी गुणवान पुत्र से पिता को आनंद होता है, परंतु, विद्याविहीन अनेक दीर्घायु पुत्र होने से पिता को कोई हर्ष नहीं होता|

कुम्भःपरिमितम्भः पिबत्यसौ कुम्भसंभवोऽम्भोधिम् ।
अतिरिच्यते सुजन्मा कश्चित् जनकं निजेन चरितेन ॥

हिंदी अर्थ:- मटका अपने माप जितना ही पानी पीता है, किंतु मटके में से जन्मे हुए अगत्स्य मुनि समंदर को पी जाते है । उसी तरह पुत्र अपने चरित्र से पिता के मुकाबले सर्वथा बेहतर होना चाहिए|

एकेनापि सुपुत्रेण विद्यायुक्तेन भासते ।
कुलं पुरुषसिंहेन चन्द्रेणेव हि शर्वरी ॥

हिंदी अर्थ:- जैसे अकेले चंद्र से रात्रि शोभा देती है, वैसे विद्यावान और पुरुषों में सिंह जैसे एक सत्पुत्र से कुल शोभा देता है ।

पितृभिः ताडितः पुत्रः शिष्यस्तु गुरुशिक्षितः ।
धनाहतं सुवर्णं च जायते जनमण्डनम् ॥

हिंदी अर्थ:- पिता द्वारा पीटा गया पुत्र, गुरुद्वारा शिक्षा दिया गया शिष्य, और हथौडे से टीपा गया सोना लोगों में आभूषणरुप बनता है।

यं मातापितरौ क्लेशं सहेते सम्भवे नृणाम् ।
न तस्य निष्कृतिः शक्या कर्तुं वर्षशतैरपि ॥

हिंदी अर्थ:- मनुष्य के जन्म के बाद, माता-पिता उसके लिए जो क्लेश सहन करते हैं, उसका बदला सौ साल बाद चुकाना भी असंभव है।

श्रावयेद् मृदुलां वाणी सर्वदा प्रियमाचरेत् ।
पित्रोराज्ञानुकारी स्यात् स पुत्रः कुलपावनः ॥

हिंदी अर्थ:- जो मृदु वाणी सुनकर सदा प्रिय आचरण करता है, माता-पिता की आज्ञा मानता है, वह पुत्र कुल को पावन करता है ।

आचारो विनम्रो विद्या प्रतिष्ठा तीर्थदर्शनम् ।
निष्ठावृत्तिस्तपो ज्ञानं नवधा कुल लक्षणम् ॥

हिंदी अर्थ:- आचार, नम्रता, शास्त्रज्ञान, समाज प्रतिष्ठा, पवित्रता, श्रद्धा, व्यवसाय, व्रतपालन, और अनुभव ज्ञान – ये नौ कुल (परीक्षा) के लक्षण हैं ।

कुलं च शीलं च वयश्च रुपम् विद्यां च वित्तं च सनाथता च ।
तान् गुणान् सप्त परीक्ष्य देया कन्या बुधैः शेषमचिन्तनीयम् ॥

हिंदी अर्थ:- कुल, शील, आयु, रुप, विद्या, द्रव्य, और पालक – ये सात बातें देखकर, अन्य किसी बात का विचार न करके
बुद्धिमान मनुष्य ने अपनी कन्या देनी चाहिए।

राजपत्नी गुरोः पत्नी भ्रातृपत्नी तथैव च ।
पत्नीमाता स्वमाता च पञ्चैते मातरः स्मृतः ॥

हिंदी अर्थ:- राजपत्नी, गुरुपत्नी, भाभी, सास, और जन्मदात्री माँ ये पाँच माताएँ हैं ।

कुले कलङ्कः कवले कदन्नता सुतः कुबुद्धिः भवने दरिद्रता ।
रुजः शरीरे कलहप्रिया प्रिया गृहागमे दुर्गतयः षडेते ॥

हिंदी अर्थ:- घर में आने पर कलंकित कुल, कुअन्न का भोजन, दुर्बुद्धि पुत्र, दारिद्र्य, शरीर में रोग, और कलहप्रिय पत्नी – ये छे दुर्गति का अहेसास कराते हैं ।

त्रयः कालकृताः पाशाः शक्यन्ते न निवर्तितम ।
विवाहो जन्म मरणं यथा यत्र च येन च ॥

हिंदी अर्थ:- विवाह, जन्म, और मरण – ये कालांतरगत है, अनिवार्य है। ये जैसे, जहाँ, और जिसके साथ होने होते हैं, वैसे हि होते हैं।

त्यागाय समृतार्थानां सत्याय मिभाषिणाम् ।
यशसे विजिगीषूणां प्रजायै गृहमेधिनाम् ॥

हिंदी अर्थ:- सत्पात्र को दान देने के लिए धन इकट्ठा करनेवाले, यश के लिए विजय चाहनेवाले, सत्य के लिए मितभाषी और
संतान के लिए विवाह करनेवाले, वे कहते हैं कि प्रजानार्थ गृहसंस्था थी।

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