इस मंदिर में प्रार्थना से होती है पुत्र प्राप्ति | Markandey Mahadev Mandir Varanasi

मार्कंडेय महादेव मंदिर का इतिहास धार्मिक महत्त्व की सम्पूर्ण जानकारी | Markandey Mahadev Temple History Importance Information in Hindi

भारत में महादेव शिव को सभी मनोकामना पूरी करने बाले भगवान के रूप में जाना जाता है| मान्यता है, भगवान् शिव थोड़ी सी ही सेवा पूजा से प्रसन्न हो जाते हैं और मन मागी मुराद पूरी करते हैं|

वैसे तो भोले नाथ के कई मंदिर भारत में स्तिथ हैं| लेकिन कुछ एक मंदिर की अपनी एक विशेष मान्यता है| ऐसा ही एक मंदिर है मार्कंडेय महादेव मंदिर (Markandey Mahadev Mandir) |

आइये आज मार्कंडेय महादेव मंदिर के इतिहास और धार्मिक महत्त्व की सम्पूर्ण जानकारी आपको देंगे| बस बने रहिये हमारे साथ

मार्कंडेय महादेव मंदिर कहाँ स्तिथ है

मार्कंडेय महादेव मंदिर की सम्पूर्ण जानकारी

यह मंदिर उत्तर प्रदेश में स्तिथ है| मार्कंडेय महादेव मंदिर (Markandey Mahadev Mandir)वाराणसी से करीब 25 किलोमीटर दूर चौबेपुर के पास, कैथी नामक गाँव में स्तिथ है|

यह गाँव वाराणसी गाजीपुर मार्ग के दाहिनी और को पड़ता है|

कैथी गाँव वह स्थान है जहाँ गोमती और गंगा का संगम होता है| इसी संगम स्थान पर बना हुआ है भव्य मार्कंडेय महादेव मंदिर (Markandey Mahadev Mandir) |

मार्कंडेय महादेव मंदिर का इतिहास

Markandey Mahadev Temple History in Hindi

यह मंदिर कितना पुराना है, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है| इस मंदिर में राजा दशरथ ने भी पूजा अर्चना की थी| आप इसी से अनुमान लगा सकते हैं की मंदिर रामायण काल से भी पुराना प्रतीत होता है|

इस मंदिर में पुत्र प्राप्ति की कामना जरुर पूरी होती है| लाखों की संख्या में पुत्र विहीन दम्पति यहाँ मन्नत मांगने आते हैं| यदि श्रधा से भगवान् शिव की यहाँ पूजा अर्चना की जाए तो पुत्र प्राप्ति निश्चित है|

पुत्र विहीन दंपत्ति के लिए पूजा विधि आगे बताएँगे| सबसे पहले जान लेते हैं क्यों पड़ा मार्कंडेय महादेव इस मंदिर का नाम

मार्कंडेय महादेव मंदिर की पोराणिक कथा

एक बार की बात है, प्राचीन समय में मृकण्ड ऋषि तथा उनकी पत्नि मरन्धती दोनों पुत्रहीन थे| दोनों दम्पति सीतापुर के नेमिषारण्य तीर्थ में रहते थे और पूजा पाठ तपस्या में लीन रहते थे|

पुत्र न होने की वजह से अन्य ऋषि गण इनका उपहास किया करते थे| हिन्दू धर्म में मान्यता है  “बिना पुत्रो गति नाश्ति” अर्थात “बिना पुत्र के गति नहीं होती।” मृकण्ड ऋषि इससे बहुत दुखी थे|

एक दिन वह नेमिषारण्य तीर्थ को छोड़कर विन्ध्याचल आ गए| यहाँ इन्होने ब्रह्मा की कठोर तपस्या की| भगवन ब्रह्मा प्रसन्न होकर प्रकट हुए| मृकण्ड ऋषि ने पुत्र प्राप्ति की कामना जताई|

ब्रह्मा ने उन्हें सलाह दी आप आप भगवान् शिव की आराधना करें वे ही आपको पुत्र प्राप्ति का वरदान दे सकते हैं| मृकण्ड ऋषि ने तपस्या के लिए गंगा गोमती के संगम का स्थान चुना और घोर तपस्या में लीन हो गए|

एक दिन भगवान् शिव प्रसन्न होकर प्रकट हुए और मन चाहा वर मांगने को कहा| मृकण्ड ऋषि ने पुत्र प्राप्ति की कामना जाहिर की|

इस पर भगवान शिव ने कहाँ आपको गुणहीन और दीर्घायु पुत्र चाहिए या गुणवान अल्पायु| इस पर ऋषि ने गुणवान पुत्र की इच्छा जाहिर की |

ऋषि दम्पती के एक तेजस्वी बालक का जन्म हुआ| दंपत्ति ने उसका नाम रखा मार्कंडेय|

समय बिताता गया शिक्षा दीक्षा के लिए मार्कंडेयजी को आश्रम भेजा गया| समय बीतने के साथ ऋषि दंपत्ति को अपने पुत्र की अल्पायु की वजह से चिंता सताने लगी और दुखी रहने लगे|

इसे देखकर मार्कंडेय जी ने दुखी होने का कारण जानना चाहा| पुत्र के हठ करने पर दंपत्ति ने उन्हें सब कुछ सच सच बता दिया|

मार्कंडेय जी ने विचार किया जब में भगवान् शिव के आशीर्वाद से जन्मा हूं तो उन्ही की शरण में जाकर इस संकट से बाख सकता हूँ|

मार्कंडेय जी गंगा गोमती के संगम पर भगवान् शिव की घोर साधना में लीन हो गए| कई साल बीतते गए, म्रत्यु का समय निकट आ गया और यमराज से अपने दूत मार्कंडेय जी को लेने के लिए भेजे|

दूत मार्कंडेय जी को भगवान् शिव की आराधना में लीन देखकर घबरा गए और आपबीती यमराज को सुनाई| अब यमराज खुद मार्कंडेय जी को लेने आये|

जैसे ही मार्कंडेय जी को ले जाने के लिए यमराज ने अपनी रस्सी फेंकी| उसी समय भगवान् शिव प्रकट हुए और यमराज को चेतावनी दी की यहाँ से चले जाएँ|

भगवान् शिव ने कहा जब में जन्म दिया है और तो म्रत्यु की आयु भी में ही तय करूँगा|

इस दिन से ही इस शिव मंदिर, मार्कंडेय शिव मंदिर (Markandey Mahadev Mandir)के नाम से जाना जाने लगा|

इसी कथा के अनुसार इस मंदिर में पत्नी अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं और पुत्र विहीन दंपत्ति पुत्र की आशा से इस मंदिर में मन्नत माँगने आते हैं|

राम का नाम लिखे हुए बेल पत्र चढाने से पूरी होती है सभी मनोकामना

मान्यता है राम नाम लिखे बेल पात्र चढाने से संभी मनोकामना पूर्ण होती हैं| यह बेल पात्र मंदिर के बाहर पूजा सामग्री वाली दुकानों पर आसानी से मिल जाते हैं|

यह मंदिर पुत्र प्राप्ति स्थान के रूप में प्रशिद्ध है

यह मंदिर पुत्र प्राप्ति धार्मिक स्थल के रूप में प्रसिद्द है| यहाँ पुत्र विहीन दंपत्ति पुत्र की कामना से आते हैं| विधि विधान से भगवान् शिव की पूजा अर्चना करते हैं और पुत्र रत्न की प्राप्ति अवश्य होती है|

जानकारों के अनुसार हरिवंशपुराण और संतान गोपाल मन्त्र का विधि विधान पूर्वक पाठ करने से पुत्र कामना जरुर पूरी होती है|

पति पत्नी को पीताम्बर वस्त्र धारण करके और पल्लू में गांठ बांधकर हरिवंशपुराण और संतान गोपाल मन्त्र का जाप करना चाहिए|

राजा दशरथ को भी मिला था पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद

राजा दशरथ ने भी पुत्र प्राप्ति के लिए श्रृंगी ऋषि के सानिध्य में इसी स्थान पर पुत्रेष्टियज्ञ कराया था|

राजा रघु ने भी यहाँ ग्यारह बार हरिवंश पुराण का पाठ किया था और अपने राज्य के लिए उत्तराधिकारी प्राप्त किया|

सावन के महीने में लगता है मेला

महाशिवरात्रि के अवसर पर पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक करने आते हैं| आपको शायद यकीन न हो शिवरात्रि पर काशीविश्वनाथ से भी ज्यादा इस मंदिर में भीड़ होती है|

सावन के महीने में भी एक महीने का मेला लगता है| सभी प्रकार के दुःख दर्द सच्चे मन से और श्रद्धा से मार्कंडेय शिव की पूजा अर्चना से दूर हो जाते हैं|

मार्कंडेय महादेव मंदिर का महत्त्व

मान्यता है की महाशिरात्रि और उसके दुसरे दिन श्री राम नाम लिखा बेल पात्र शिव लिंग पर चढाने से पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है|

इस मंदिर में त्रयोदशी (तेरस) का भी अपना बड़ा महत्त्व है| इस दिन पुत्र रत्न की कामना और पति की दीर्घायु की प्रार्थना सफल होती है|

महाम्रत्युन्जय, शिवपुराण, रुद्राभिषेक और सत्यनारायण भगवान् की कथा का अपना महत्त्व है|

महाशिवरात्रि पर लगातार दो दिन तक जलाभिषेक करने की अनूठी परम्परा है|

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