मंगलमय श्लोक हिंदी अर्थ सहित | Mangalmay Sanskrit Shlokas with meaning in Hindi

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मंगलमय श्लोक हिंदी अर्थ सहित | Sanskrit Shlokas with meaning in Hindi | suprabhat mangalmay shlok with meaning in Hindi |

स्वस्मै स्वल्पं समाजाय सर्वस्वं।

हिंदी अर्थ:- अपने लिए थोड़ा और दूसरों के लिए सब कुछ।

ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।

हिंदी अर्थ:- जो सभी में श्रेष्ठ है, मंगलमय है, जो भगवान शिव की अर्धांगनी है, जो सभी की इच्छाओं को पूरा करती हैं | ऐसी माँ भगवती को नमस्कार करता हूँ

अलसस्य कुतो विद्या, अविद्यस्य कुतो धनम्।
अधनस्य कुतो मित्रम्‌, अमित्रस्य कुत: सुखम्।।

हिंदी अर्थ:- आलसी को विद्या कहाँ, अनपढ़/मूर्ख को धन कहाँ, निर्धन को मित्र कहाँ और अमित्र को सुख कहाँ।

नातिक्रान्तानि शोचेत प्रस्तुतान्यनागतानि चित्यानि।

हिंदी अर्थ:- बीती बातों पर दुःख न मनाये। वर्तमान की तथा भविष्य की बातों पर ध्यान दें।

मङ्गलं भगवान् विष्णुः मङ्गलं गरूडध्वजः ।
मङ्गलं पुण्डरीकाक्षः मंगलायतनो हरिः ॥

भावार्थ भगवान् विष्णु मंगल हैं, गरुड वाहन वाले मंगल हैं, कमल के समान नेत्र वाले मंगल हैं, हरि मंगल के भंडार हैं ।
मंगल अर्थात् जो मंगलमय हैं, शुभ हैं, कल्याणप्रद हैं ।

विवेकख्यातिरविप्लवा हानोपायः।

हिंदी अर्थ:- निरंतर अभ्यास से प्राप्त​ निश्चल और निर्दोष विवेकज्ञान हान (अज्ञानता) का उपाय है।

चन्दनं शीतलं लोके, चन्दनादपि चन्द्रमाः।
चन्द्रचन्दनयोर्मध्ये शीतला साधुसंगतिः।

हिंदी अर्थ:- संसार में चन्दन को शीतल माना जाता है लेकिन चन्द्रमा चन्दन से भी शीतल होता है। अच्छे मित्रों का साथ चन्द्र और चन्दन दोनों की तुलना में अधिक शीतलता देने वाला होता है।
सुप्रभातम्

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती ।
करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम ॥

हिंदी अर्थ:- हथेली के सबसे आगे के भाग में लक्ष्मी जी, बीच के भाग में सरस्वती जी और मूल भाग में ब्रह्माजी निवास करते हैं, इसलिए सुबह दोनों हथेलियों के दर्शन करना चाहिए।

अति सर्वनाशहेतुर्ह्यतोऽत्यन्तं विवर्जयेत्।

हिंदी अर्थ:– अति सर्वनाश का कारण है। इसलिये अति का सर्वथा परिहार करे।

न कालमतिवर्तन्ते महान्तः स्वेषु कर्मसु

हिंदी अर्थ:- महान लोग अपने कर्तव्यों में देरी नहीं करते हैं।

आलसय्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान्‌ रिपुः।
नास्त्युद्यमसमो बन्धु: कृत्वा यं नावसीदति।

हिंदी अर्थ:- मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही (उनका) सबसे बड़ा शत्रु होता है। परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा) कोई अन्य मित्र नहीं होता।

समुद्र वसने देवी पर्वत स्तन मंडिते ।
विष्णु पत्नी नमस्तुभ्यं पाद स्पर्शं क्षमश्वमेव ॥

अर्थ : समुद्ररूपी वस्त्र धारण करनेवाली, पर्वतरूपी स्तनोंवाली एवं भगवान श्रीविष्णुकी पत्नी हे भूमिदेवी, मैं आपको नमस्कार करता हूं । मेरे पैरों का आपको स्पर्श होगा । इसके लिए आप मुझे क्षमा करें ।

शतहस्त समाहर सहस्रहस्त संकिर।

हिंदी अर्थ:- सौ हाथ से कमाओ और हजार से दान करो।

सर्वं परवशं दुःखं सर्वमात्मवशं सुखम्।
एतद् विद्यात् समासेन लक्षणं सुखदुःखयोः।।

हिंदी अर्थ:- जो सब अन्यों के वश में होता है, वह दुःख है। जो सब अपने वश में होता है, वह सुख है। यही संक्षेप में सुख एवं दुःख का लक्षण है।

ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: शशि भूमि सुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतव सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु ।।

हिंदी अर्थ:- ब्रम्हा, विष्णु और भगवान शिव, सूर्य, चंद्रमा, भूमि सुत यानी मंगल , बुद्ध, गुरु, शुक्र, शनि राहु और केतु सभी ग्रहों की शांति करें और हमारी रक्षा करें |

गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलऽस्मिन्सन्निधिं कुरु।।

हिंदी अर्थ:- इस मंत्र का जाप नहाते समय करना चाहिए। इस मंत्र का अर्थ ये है कि हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु, कावेरी नदियों! मेरे स्नान करने के इस जल में आप सभी पधारिए।

सिंहवत्सर्ववेगेन पतन्त्यर्थे किलार्थिनः।।

हिंदी अर्थ:- जो कार्य संपन्न करना चाहते हैं, वे सिंह की तरह अधिकतम वेग से कार्य पर टूट पड़ते हैं।

विवादो धनसम्बन्धो याचनं चातिभाषणम्।
आदानमग्रतः स्थानं मैत्रीभङ्गस्य हेतवः।।

हिंदी अर्थ:- वाद-विवाद, धन के लिये सम्बन्ध बनाना, माँगना, अधिक बोलना, ऋण लेना, आगे निकलने की चाह रखना – यह सब मित्रता के टूटने में कारण बनते हैं।

आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर ।
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥1॥

हिंदी अर्थ:- हे आदिदेव भास्कर! आपको प्रणाम है, आप मुझ पर प्रसन्न हों, हे दिवाकर! आपको नमस्कार है, हे प्रभाकर!
आपको प्रणाम है।

सर्वं परवशं दुःखं सर्वमात्मवशं सुखम्।
एतद् विद्यात् समासेन लक्षणं सुखदुःखयोः।।

हिंदी अर्थ:- जो सब अन्यों के वश में होता है, वह दुःख है। जो सब अपने वश में होता है, वह सुख है। यही संक्षेप में सुख एवं दुःख का लक्षण है।

यस्य कृत्यं न विघ्नन्ति शीतमुष्णं भयं रति।
समृध्दिरसमृद्धिर्वा स वै पण्डित उच्यते।।

हिंदी अर्थ:- जिसका कार्य कभी ठंढ, ताप, भय, प्रेम, समृद्धि, या उसका अभाव से बाधित नहीं होता, केवल वही वास्तव में श्रेष्ठ है।

शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदा ।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते ॥

हिंदी अर्थ:- जो शुभ करता है, कल्याण करता है, आरोग्य रखता है, धन संपदा करता है और शत्रु बुद्धि का विनाश करता है, ऐसे दीप यानी दीपक की रोशनी को मैं नमन करता हूं।

जीवेषु करुणा चापि मैत्री तेषु विधीयताम्।

हिंदी अर्थ:- जीवों पर करुणा एवं मैत्री कीजिये।

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् ।
सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि ।।

हिंदी अर्थ:- कर्पूरगौरं- कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले । करुणावतारं- करुणा के जो साक्षात् अवतार हैं । संसारसारं- समस्त सृष्टि के जो सार हैं । भुजगेंद्रहारम्- इस शब्द का अर्थ है जो सांप को हार के रूप में धारण करते हैं । सदा वसतं हृदयाविन्दे भवंभावनी सहितं नमामि- इसका अर्थ है कि जो शिव, पार्वती के साथ सदैव मेरे हृदय में निवास करते हैं, उनको मेरा नमन है ।

यथा चित्तं तथा वाचो यथा वाचस्तथा क्रिया।
चित्ते वाचि क्रियायां च साधूनामेकरूपता।।

हिंदी अर्थ:- जैसा मन होता है वैसी ही वाणी होती है, जैसी वाणी होती है वैसे ही कार्य होता है। सज्जनों के मन​, वाणी और कार्य में एकरूपता (समानता) होती है।

शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम् |
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् |
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् |
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैक नाथम् |

हिंदी अर्थ:- शांत स्वरुप शेषनाग पर लेते, भगवान् विष्णु की नाभि से कमल उत्पन्न है, वे सब देवों के स्वामी हैं, वे सारे विश्व के आधार हैं, आकाश की तरह अलीप्त, और बादल की तरह सांवले हैं, जिनकी आँखें कमल के सामान, वही सभी संपत्ति के स्वामी हैं| योगी उन्हें जानने के लिए उनका ध्यान करते हैं, इस संसार के सब भय का नाश करने वाले, सब लोकों के स्वामी, श्री विष्णु भगवान् को मेरा नमस्कार

स्वस्मै स्वल्पं समाजाय सर्वस्वं।

हिंदी अर्थ:- अपने लिए थोड़ा और दूसरों के लिए सब कुछ।

धनानि भूमौ पशवश्च गोष्ठे भार्या गृहद्वारि जनः श्मशाने।
देहश्चितायां परलोकमार्गे कर्मोनुगो गच्छति जीव एकः।।

हिंदी अर्थ:- धन भूमि पर, पशु गोष्ठ में, पत्नी घर में, संबन्धी श्मशान में और शरीर चिता पर रह जाता है। केवल कर्म ही है जो परलोक के मार्ग पर साथ-साथ आता है।

मा कुरु धनजनयौवनगर्वं हरति निमेषात्कालः सर्वम्।
मायामयमिदमखिलं हित्वा ब्रह्मपदं त्वं प्रविश विदित्वा।।

हिंदी अर्थ:- धन, जन, और यौवन पर घमण्ड मत करो; काल इन्हें पल में छीन लेता है। इस माया को छोड़ कर इस ज्ञान से ब्रह्मपद में प्रवेश करो।

कल्पयति येन वृत्तिं येन च लोके प्रशस्यते सद्भिः।
स गुणस्तेन च गुणिना रक्ष्यः संवर्धनीयश्च।।

हिंदी अर्थ:- जिस गुण से आजीविका का निर्वाह हो और जिसकी सभी प्रशंसा करते हैं, अपने स्वयं के विकास के लिए उस गुण को बचाना और बढ़ावा देना चाहिए।

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Anurag Pathak
इनका नाम अनुराग पाठक है| इन्होने बीकॉम और फाइनेंस में एमबीए किया हुआ है| वर्तमान में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं| अपने मूल विषय के अलावा धर्म, राजनीती, इतिहास और अन्य विषयों में रूचि है| इसी तरह के विषयों पर लिखने के लिए viralfactsindia.com की शुरुआत की और यह प्रयास लगातार जारी है और हिंदी पाठकों के लिए सटीक और विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराते रहेंगे
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