भगवान् गणेश से जुडी 10 प्रसिद्ध पोराणिक कथाएँ | 10 Famous Lord Ganesha story in hindi

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Lord Ganesha story in hindi for kids :- गणपति… बप्पा….. मोरिया…. अगले… बरस…. तू.. जल्दी आ| हमारे.. प्यारे, गणपति बप्पा का त्यौहार,.. “गणेश चतुर्थी” पूरे हर्षौल्लास के साथ पूरे भारत देश में मनाया जाता है|लेकिन महाराष्ट्रा में स्पेशल तैयारिओं के साथ बप्पा का जन्मदिन सेलिब्रेट करते हैं| खासकर बच्चों को गणेशजी बहुत प्रिय हैं| आखिर बप्पा प्यारे ही इतने हैं| There are Mythological interesting Ganpati Bappa story in hindi are famous among kids.

बाल गणेश, बुद्धि के देवता हैं, और बच्चों को तो.. जरुरत है न.. तेज दिमाग की,… पढाई कैसे करेंगे… बताओ! इसलिए हमारे प्यारे गणेश बच्चों…. के….सबसे प्रिय भगवान् हैं|

शास्त्रों के अनुसार गणेशजी प्रथम पूज्यनीय देवता हैं|

अर्थार्थ किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले गणेश जी की आराधना और पूजा करनी चाहिए| बप्पा हर मुसीबत और विघ्न से हमारी रक्षा करते हैं|

बच्चों का तो पढाई और खेलने का ही.. तो काम होता है| जब भी आप कोई भी कम्पटीशन एग्जाम और खेल प्रतियोगिता में participate करो|

तो सिद्धिविनायक मंगल करता, भगवान गणेश का नाम और ध्यान लेकर निचे लिखे मंत्र का 11 बार जाप जरुर करना, आपको जरुर सफलता मिलेगी|

ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।

हाँ, आज हम बात कर रहे हैं कुछ प्रेरणादायक गणेश भगवान्(Lord Ganesha) की short stories की जो बच्चों को बहुत प्रिय हैं| आप इन stories को समय समय पर अपने बच्चों को सुना सकते हैं|

अरे…, बच्चे बोलते नहीं हैं क्या, मम्मा मम्मा…. एक story सुनाओ न…., नीद… नहीं आ रही है|

okke….Jokes Aprat….आइये जानते हैं  गणपति बप्पा भगवान् गणेश की पोराणिक मजेदार और प्रेरणा दायक short stories(कहानियां) हिंदी में|we have compiled 10 mythological lord ganeha story in hindi. These  interesting and moral ganpati bappa story in hindi are quite famous among children

10 Famous and Interesting Lord Ganesha story in hindi 

भगवान्  गणेश और कुबेर की कहानी – Lord Ganesha and kubera story

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एक बार की बात है, धन के देवता कुबेर को अपने ऊपर घमंड हो गया, की वो सबसे अमीर देवता हैं| अपने धन का वैभव दिखाने के लिए एक बार इन्होने एक शानदार भोज(पार्टी) रखी, और सारे देवताओं को आमंत्रित(invite) किया|

भगवान् शिव को भी किया| किसी कारण वश शिवजी भोज में जा नहीं पाए| अरे भई…., जब कोई न्योता आता है, तो किसी न किसी को तो जाना ही पडता है, हाजरी देने के लिए|

तो शिव भगवान् ने हमारे प्यारे गणपति बप्पा को बोला बेटा तू चला जा, आज में थोडा कहीं और बिजी हूँ| तो चले गए बाल गणेश भोज(पार्टी) अटेंड करने|

फिर क्या था, वहां जा कर गणेशजी ने भोजन(डिनर) करना शुरू किया, और देखते देखते सारा की सारा खाना खा गए|

गणेशजी की भूख ही न मिटे| उन्होंने वहां रखे हुए बर्तनों को भी खाना शुरू कर दिया| जब बर्तन भी नहीं बचे तो पूरे अलकापुरी(कुबेर सिटी) शहर में जो कुछ भी मिला उसे ही खा गए|

अब कुछ बचा नहीं खाने को, तो कुबेर को ही खाने के लिए उसकी तरफ दोड़े| फिर क्या था, अपनी जान बचाने के लिए कुबेर ने हिमालय पर्वत पर भगवान शिव की शरण ली, और कहा मुझे गणेशजी से बचाओ|

भगवान् शिव ने एक कटोरे में थोड़े से उबले हुए चावल गणेशजी को दिए| तब जाकर उनकी भूख मिटी| बस गणेशजी ने ये सब कुबेर को सबक सीखने के लिए किया|

Moral:-

बच्चो इससे हमें क्या सीखने को मिला बताओ| कभी भी आपके पास चाहे कितना भी धन हो आप कितने भी अमीर हो कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए|

बल्कि हमारे पास अगर धन ज्यादा है तो उसे अच्छे कामों में खर्च करना चाहिए| नहीं तो गणपति बप्पा आ जाएँगे सबक सिखाने|

भगवान् गणेश और कावेरी नदी की कहानी – Lord Ganesha and Kaveri river Story

एक बार की बात है, अगस्त्य ऋषि भगवान् विष्णु और शिव का आशीर्वाद लेने के लिए गए|

अगस्त्य ऋषि एक नदी का निर्माण करना चाहते थे जो दक्षिण भारत के लोगों के लिए सिचाई और पीने का पानी उपलब्द करवा सके|

भगवान् शिव ने उनकी प्रार्थना को स्वीकार किया और उनके कमंडल में दिव्य पानी डाल दिया| और कहा इस कमंडल का पानी जिस जगह गिरेगा वहीँ से नदी का आरंभ होगा|

कमंडल ले कर अगस्त्य ऋषि अब ऐसी जगह की तलाश करने लगे जहाँ से नदी की शुरुआत हो सके| स्थान खोजने के लिए वो कूर्ग पहाड़ियों पर घूम रहे थे| लेकिन किसी निर्णय पर नहीं पहुँच पा रहे थे|

अचानक अगस्त्य ऋषि को एक छोटा बच्चा वहां दिखाई दिया| ऋषि को लघुशंका(toilet) के लिए जाना था| ऋषि ने अपना कमंडल कुछ देर के लिए उस छोटे बच्चे को देखभाल के लिए दे दिया|

वो छोटा बालक और कोई नहीं, भगवान् गणेश थे| भगवान् गणेश को पता था, कोन सा स्थान नदी के प्रारम्भ के लिए ठीक होगा| जिससे ज्यादा से ज्यादा दक्षिण भारत के क्षेत्रों को पानी मिल सके|

उन्होंने कमंडल वहीँ धरती पर रख दिया| तभी एक कोवा कमंडल पर पानी पिने के लिए बेठा| और कमंडल को वही गिरा दिया| बस वहीँ से नदी का प्रारंभ हुआ| इसी नदी को कावेरी के नाम से जाना जाता है|

Moral:-

जीवन में जो कुछ भी होता है, अच्छे के लिए होता है| अगर आपको लगता है की कुछ आपके साथ बुरा हुआ है| Dont worrry उस घटना के अच्छे परिणाम हमें भविष्य में देखने को मिलेंगे|

So be happy never get sad and enjoy your every moment of your life| Every Thing happen happen for good

भगवान् गणेश और कार्तिकेय की कहानी – Lord Ganesha and kartikay story

एक बार की बात है, गणेश और कार्तिकेय में झगडा हो गया की कोन श्रेष्ठ है| अपने झगडे को सुलझाने के लिए दोनों भगवान् शिव के पास गए|

भगवान् शिव ने कहा की जो इस पृथ्वी के तीन चक्कर लगाकर सबसे पहले वापस आएगा, वही श्रेष्ठ है| बस सुनते ही कार्तिकेय जी अपने वाहन मोर को लेकर निकल पड़े|

गणेशजी सोच में पड़ गए क्या करें, एक तो भारी शरीर ऊपर से वाहन भी चूहा बहुत मुश्किल है जीतना| बस बप्पा ने अपना दिमाग लगाया, और अपने माता पिता शिव और पार्वती के 7 परिक्रमा करके वहीँ खड़े हो गए|

कुछ देर के बाद आये हमारे कार्तिकेय जी, और लगे जीत का जश्न मनाने| भगवान् शिव ने गणेशजी से पूछा आप पृथ्वी के चक्कर लगाने क्यों नहीं गए|

इस पर गणेश भगवान ने कहा, मेरे लिए मेरा संसार मेरे माता पिता के चारों और ही हैं| माता पिता की सेवा ही मेरे लिए पृथ्वी के चक्कर लगाने के बराबर है|

इसे सुन पिता शिव बहुत प्रसन्न हुए और उन्हें विजेता घोषित कर दिया|

Moral:-

हमेशा अपने दिमाग(wisdom) का सही इस्तेमाल करें|

माता पिता से बढ़कर कुछ नहीं है, Always respect your Parents|

भगवान् गणेश और माँ पार्वती की कहानी – Lord Ganesh and Goddess Parvati 

एक बार की बात है, गणेश भगवान् एक बिल्ली के साथ खेल रहे थे| लेकिंग खेलते खेलते कभी उसकी पूंछ पकड़कर खींच रहे थे| कभी उसे जमीन पर जोर से पटक रहे थे|

इससे बिल्ली के शरीर पर काफी चोटें आ गई थी| जब बाल गणेश का मन भर गया तो उसे छोड माँ पार्वती से मिलने कैलाश चले गए|

लेकिन पार्वती माँ को देखकर उनके आश्चर्य की सीमा न रही| जब इन्होने देखा माँ पार्वती के शरीर पर चोट लगी हुई है|

पुत्र गणेश के पूछने पर माँ पार्वती ने बताया की आपने जो बिल्ली को प्रताड़ित किया है| उसका फल मुझे भोगना पड़ा है

यह सुनकर बाल गणेश बहुत शर्मिंदा हुए और उन्हें अपने गलती का एहसास हुआ|

Moral:-

पृथ्वी पर सभी को जीने का सामान हक़ है| हमें जानवरों को भी बिना बात के परेशान नहीं करना चाहिए|

जब पिता शिव ने बाल गणेश को लगाया हाथी का सर

एक बार की बात है, माता पार्वती अपने स्नान गृह में स्नान कर रही थी| लेकिन द्वार की सुरक्षा करने के लिए कोई द्वारपाल नहीं था| तो माता पार्वती ने अपने शरीर पर लगे हुए चन्दन के लेप के मेल से एक बालक को बनाया|

उस बालक में प्राण डाल कर उसे द्वार की सुरक्षा के लिए खड़ा कर दिया| कुछ ही देर बाद भगवान् शिव पार्वती से मिलने वहां आये|

लेकिन उस बालक ने उन्हें अन्दर जाने से रोक दिया| शंकर ने बालक को बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन वो नहीं माना| इस पर क्रोध में शिवजी ने बालक के सर को धड से अलग कर दिया|

जब माता पार्वती ने यह द्रश्य देखा तो विलाप करने लगी और शंकर से अपना रोद्र रूप धारण करके बोला आप मरे पुत्र को किसी भी कीमत पर जीवित कीजिये|

इस पर भगवान् शंकर ने नंदी को आदेश दिया| तुम्हे जो भी सबसे पहले जीवित प्राणी मिले उसका सर काट कर ले आओ|

रास्ते में सबसे पहले एक हथनी और उसका छोटा सा नवजात बच्चा मिला| हथनी दूसरी तरफ मुह करके सो रही थी|

नंदी उसी बच्चे का सर काट कर ले आये| और शंकर ने हाथी के बच्चे का सर उस बालक पर लगा कर उसे जीवित कर दिया|

पार्वती की संतुष्टि के लिए भगवान् शिव ने गणेश को आशीर्वाद दिया| किसी भी शुभ काम से पहले विश्व में भगवान् गणेश की पूजा की जाएगी|

Moral Lord Ganesha story in hindi for Kids

भगवान् गणेश और पिता शंकर की कहानी – Lord Ganesha and Lord shankar story 

भगवान शंकर ने गणेशजी को आशीर्वाद दिया था| किसी भी कार्य की शरुआत से पहले उनकी पूजा अर्चना की जाएगी

एक बार शंकर त्रिपुर देत्यों को मारने के लिए निकले | लेकिन यात्रा से पहले गणेशजी का पूजन करना भूल गए|

रास्ते में उनके रथ का पहिया टूट गया| और सेना के सामने मुश्किल ख़डी हो गयी|

अचानक शंकर को ध्यान आया, की गणपति की पूजा करना वो भूल गए थे| अपनी गलती का अहसास होते ही विधिवत गणेश भगवान् की पूजा अर्चना की और अपनी यात्रा पर आगे बढे|

Moral:-

हमें हमेशा अपने जीवन में बनाये हुए नियमों का पालन करना चाहिए|

भगवान् गणेश और विष्णु की कहानी – Lord ganesh and Lord vishnu story

एक बार की बात है, भगवान् विष्णु का वालमपुरी शंख गुम हो गया| कुछ देर के बाद शंख की आवाज़ हिमालय से आती हुई सुनाई दी|

भगवान् विष्णु समझ गए की बाल गणेश ही शंख ले गए होंगे| विष्णु ने शंकर से प्रार्थना की|

शंकर ने विष्णुजी को गणेश पूजा रखने के लिए बोला| भगवान् विष्णु ने गणेश पूजा पूरे भाव से की| गणेशजी ने खुश होकर वालमपुरी शंख विष्णुजी को वापस कर दिया|

तबसे ही भगवान् गणेश को वालमपुरी/सिद्धिविनायक गणेशजी भी कहा जाता है| वालमपुरी गणेशजी की प्रतिमा की सूड दाई(right) साइड होती है|

Moral :-

इस story में कोई नेतिक शिक्षा नहीं है, लेकिन बच्चों को गणेशजी के अन्य नाम भी पता होने चाहिए

गणेश जी और बुढिया की कहानी – Ganeshji and old lady story

एक बार की बात है, एक बूढी ओरत भगवान् गणेश की बहुत बड़ी भक्त थी| सुबह शाम उनकी पूजा किया करती थी| लेकिन उनकी बहू को यह सब पसंद नहीं था|

एक दिन मोका पाकर बहू ने गणपति की प्रतिमा को पास के कुए में फेंक दिया| अब भगवान् गणेश की मूर्ति मंदिर में न पाकर बुढिया बहुत दुखी हुई|

उसको रास्ते में जो कोई भी मिलता उससे गणेशजी की मूर्ति बनाने के लिए कहती| चलते चलते वह एक राजा महल के पास पहुंची| राजा का महल अभी बन ही रहा था|

वहां पर काम करने वाले मिस्त्री से उसने गणेश जी की मूर्ति बनाने के लिए कहा| लेकिन मिस्त्री ने बुढिया को डांट कर भगा दिया और उसकी बहुत बेइजती भी की|

लेकिन जैसे ही उसने महल की तरफ पलट के देखा महल टेड़ा हो गया था| यह देखकर मिस्त्री राजा के पास गया और राजा को सारी कहानी बताई|

राजा भी गणेश जी का भगत था| उसने बूढी ओरत को बुलाया और कहा की आपके लिए गणेश भगवान् का मंदिर यहाँ महल के पास बनवा देंगे|

राजा ने गणेश भगवान् का मंदिर बवाया मूर्ति स्थापित कर प्राणप्रतिष्ठा की| कुछ देर के बाद महल भी सीधा हो गया| ऐसी है महिमा हमारे बाल गणेश की|

Moral:-

हमेशा हमें अपने कर्म करना चाहिए फल की चिंता नहीं करना चाहिए और भगवान् सब अच्छा करेंगे ऐसा विस्वास मन में होना चाहिए

गणेश की कथा ( खीर बन गई हीरे जवाहरात )

एक बार भगवान् गणेश बालक का रूप धर के पृथ्वी लोक पर भक्तों की परीक्षा लेने के लिए आए| अपने हाथ में एक चुटकी चावल और एक चम्मच में दूध लेकर जो भी मिले उससे खीर बनाने के लिए कहते हैं|

जो भी रास्ते में मिलता था भगवान् गणेश का मजाक बना के आगे बढ़ जाता था| घूमते घूमते वो एक बूढी अम्मा के पास पहुचते हैं| वो बच्चे का मन रखने के लिए खीर बनाने के लिए तैयार हो जाती हैं|

वो एक कटोरी लेकर आती हैं| लेकिन गणेश जी कहते हैं ये तो बहुत छोटा बर्तन है, कोई बड़ा बर्तन लेकर आओ| बूढी अम्मा बड़ा बर्तन ले कर आती हैं|

गणेश जी उसमे खीर और दूध डालते हैं| लेकिन वो बर्तन भर जाता हैं लेकिंग चम्मच और चावल ख़तम नहीं होते| बूढी अम्मा के घर के सारे बर्तन भर जाते हैं|

बाल गणेश, अम्मा को बोलते हैं आप इसकी खीर बना कर पूरे गाँव को न्योता दे दो| गाँव का हर एक आदमी अम्मा के घर खीर आकर खाता है|

लेकिन तब भी खीर बच जाती है| अब बूढी अम्मा गणेश जी से पूछती है इस खीर का क्या करें|

भगवान् गणेश कहते हैं, इस खीर को किसी बर्तन से ढककर घर के चारों कोनों में रख दो| अम्मा ऐसा ही करती है|

अम्मा जब सुबह उठकर बर्तनों को हटाकर देखती है| तो वहां खीर की जगह हीरे जवाहरात होते हैं|

इस तरह जैसे भगवान गणेश ने बुढ़िया पर कृपा बनाई, वैसे ही वह सब भक्तों पर कृपा बनाए रखें। बोलो, गणेश जी महाराज की जय।

Moral:-

कभी किसी को कमजोर और छोटा मत समझो, क्या पता कोन कब जीवन में काम आ जाए| समय बहुत बलवान है

कैसे बना मूषक(चूहा) गणेश की सवारी – How Rat becomes the ganesha’s vehicle

एक बार की बात है, एक गजमुख नाम के राक्षस का बहुत आतंक था| वह सबसे शक्तिशाली बनना चाहता था| अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए, भोले नाथ की तपस्या करने जंगल चला गया|

जंगल में उसने कई बर्षों तक घोर तपस्या की| उसकी तपस्या से प्रसन्न हो कर शंकर प्रकट हुए और मन चाहा वर मांगने को कहा|

इस पर उसने माँगा की में किसी भी अस्त्र से न मरूं| भोले नाथ ने उसे वरदान दे दिया| उसके बाद वो देवताओं पर अत्याचार करने लगा|

उसके अत्याचारों से परेशान होकर देवता भगवान् शंकर से मदद माँगने गए| भोले नाथ ने गणेश जी को इस राक्षस से लड़ने भेजा|

भयंकर युद्ध हुआ, लेकिन जैसा की उसने वरदान लिया हुआ था वो किसी भी शस्त्र से नहीं मर सकता|

गणेश भगवान् ने उसे मूषक(चूहा) बनाकर अपनी सवारी बना लिया| और गजमुख का आतंक ख़त्म किया|

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