Lawyer, Advocate और Barrister में क्या अंतर है

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क्या आप सर्च कर रहे है की इंडिया में Lawyer, Advocate और Barrister में क्या अंतर है| यदि हाँ तो आप सही जगह पर आये हैं| इस पोस्ट में हम डिटेल में discuss करेंगे की वकील (lawyer) और अधिवक्ता (Advocate) में क्या अंतर होता है|

इसके साथ साथ यह भी चर्चा करेंगे की बैरिस्टर, लॉयर और advocate में क्या अंतर होता है

इसके अलावा भी आपने कोर्ट में कई और तरह की शब्दावली भी सुनी होगी जैसे Advocate General, Attorny General, Solicitor General, Public Prosecutor. इन सभी कानून से जुड़े लोगों के बारे में भी आपको संक्षिप्त में जानकारी देंगे.

लॉयर और एडवोकेट में क्या अंतर है

आम तौर पर लॉयर(Lawyer), अधिवक्ता(Advocate), और बैरिस्टर(Barrister) के बारे में कही न कही मिल ही जाता है|

लेकिन क्या आप जानते है की इन सब में क्या अंतर होता है|

क्या लॉयर, एडवोकेट और बैरिस्टर एक ही इंसान होते है या इनके अलग-अलग नाम है|

लॉयर, एडवोकेट और बैरिस्टर बनने के लिए लॉ(Law) की डिग्री लेना जरुरी है इसी प्रकार के प्रश्नों और शब्दों को आईये इस लेख के माध्यम से पढते है|

Lawyer और advocate में क्या अंतर है (टेबल के साथ)

s.no.लॉयरएडवोकेट
1 .Lawyer को हिंदी में वकील कहते है| Advocate को हिंदी में अधिवक्ता कहते है|
2 . लॉयर उसे कहते है जिसने llb कि डिग्री ले ली हो,और बार काउंसिल में अपना नाम दर्ज नहीं कराया हो, यदि वह कानून की अदालत में अपने ग्राहकों का रिप्रजेंटेशन करना चाहता है तो उसे बार काउंसिल का एग्जाम देना होगा एडवोकेट ने पहले ही बार काउंसिल में अपना नाम रजिस्टर करा लिया है और वह बहस के लिए कानून की अदालत में अपने ग्राहकों का रिप्रजेंटेशन होने के लिए तैयार है।
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3 .
वकीलों के पास इस को फील्ड में कम एक्सपीरियंस है क्योंकि वे कानून के क्षेत्र में फ्रेशर हैं।
एडवोकेट के पास इस फील्ड में फुल नॉलेज और एक्सपीरियंस होता है
4.लॉटर वह होता है जिसके कोर्ट में किसी अन्य व्यक्ति की तरफ से प्रतिपादन करने का राइट नहीं प्राप्त हो| एडवोकेट वह होता है, जिसको कोर्ट में किसी अन्य व्यक्ति की तरफ से प्रतिपादन करने का राइट प्राप्त हो|
5 .कोई भी लॉयर अपने ग्राहकों को कानूनी सलाह दे सकता है लेकिन वह अदालत में उसके लिए लड़ नहीं कर सकता।एडवोकेट्स के पास कानून के फील्ड में बहुत नॉलेज और एक्सपीरियंस है। वे कानूनी सलाह देने में अधिक काबिल हैं और यदि ग्राहक को कानून की अदालत में प्लैन या लिखित बयान को स्थापित करने की आवश्यकता (need to institute) है, तो वे ऐसा भी कर सकते हैं।
6 .लॉयर कम फीस लेता है क्योंकि वे अपने ग्राहकों रिप्रजेंटेशनको कानूनी सलाह दे सकते है| एडवोकेट कानून के फील्ड में अपने नॉलेज और एक्सपीरियंस के कारण एक वकील की तुलना में बहुत अधिक फीस लेता है। वह अपने ग्राहकों को रिप्रजेंटेशन करके भी केस लड़ सकता है और इसके लिए चार्ज लेगा।
7 .लॉयर एडवोकेट नहीं हो सकता है पर एक एडवोकेट लॉयर हो सकता है

लॉयर (Lawyer) कौन होता है?

लॉयर वह इंसान होता है जिसके पास लॉ की डिग्री होती है, जो कानून के फील्ड में माहिर (Trained) होता है, और क़ानूनी मामलों (Case) पर सलाह और सहायता देता है, यानि ग्रेजुएट, कानून की जानकारी (Knowledgeable in Law) है या जिसने LLB की डिग्री ले ली हो, वह लॉयर बन जाता है लेकिन उसके पास कोर्ट में केस लड़ने की परमिशन नही होती है लेकिन जैसे की उसको Bar council of indian (BCI) से सर्टिफिकेट मिलता है जो BCI के पेपर को पास कर लेता है तो उसे किसी भी कोर्ट में खड़े होने के लिए परमिशन मिल जाती है , तब वह एडवोकेट बन जाता है|

LLB क्या होती है

LLB को  लेगम बैकॉलारियस (Legum Baccalaureus) कहते है जो एक लैटिन भाषा का शब्द है, इसका अर्थ है, बैचलर ऑफ़ लॉ (Bachelor of Law) भी कहते है, 12th के बाद या ग्रेजुएशन के बाद भी स्टूडेंट लॉ की पढ़ाई कर सकते है और कानून का ज्ञान ले सकते है, उसी को वकील कहते है|

Qualification of Lawyer | लॉयर के लिए योग्यता

  • सबसे पहले आपको 12th class अच्छे marks से पास करनी होगी उसके बाद एलएलबी कोर्स करने के लिए आपको (B.a, B.com, B.se) जैसी किसी भी विषय में ग्रेजुएशन पूरी करनी होगी साथ ही आपको ग्रेजुएशन में कम से कम 50% से 55% marks  होने जरूरी है| 
  • भारत में एक वकील बनने के लिए, एक व्यक्ति के लिए कानून में स्नातक की डिग्री (Bachelor’s degree in Law), L.L.B लेगम बैकॉलारियस (Legum Baccalaureus) को पूरा करना जरूरी है कानून की स्नातक डिग्री (Bachelor’s Degree in Law)  3 साल या 5 साल की हो सकती है| 
  • एग्जाम के लिए उम्मीदवार भारतीय नागरिक होना चाहिए| 
  • उम्मीदवार को एसपीसी  में से किसी एक का सदस्य होना चाहिए| 
  •  उम्मीदवार के पास वैलिड लॉयर आइडेंटी कार्ड होना चाहिए| 

उम्र सीमा –स्टूडेंट्स को बिना किसी आयु  सीमा के L.L.B या L.L.M कोर्स में कॉलेज में प्रवेश लेने  की अनुमति है इस  नियम  से पहले L.L.B कोर्स के लिए सामान्य वर्ग के लिए उम्र सीमा 25 साल और एससी (SC)/एसटी (ST) और ओबीसी के लिए उम्र सीमा 35 साल  है| 

Lawyer course fees  | लॉयर कोर्स  फीस 

कोर्स  फीस सभी  कॉलेजों में अलग-अलग होती  है प्राइवेट कॉलेजों में  llb कोर्स फीस 90000  से 1  लाख तक की सालाना होती है और सरकारी  कॉलेजों में llb  कोर्स फीस 50000 से 70000 तक होती है|

एडवोकेट कौन होता है

एडवोकेट को हिंदी में अधिवक्ता भी कहते है, एडवोकेट एक योग्य क़ानूनी पेशेवर होता है जिसके पास किसी की तरफ से बोलने का अधिकार होता है, और एक एडवोकेट लॉयर हो सकता है लेकिन एक लॉयर एडवोकेट नहीं हो सकता है|

एडवोकेट वह होता है, जिसको कोर्ट में किसी अन्य व्यक्ति की तरह से प्रतिपादन करने का राइट प्राप्त हो, आसान शब्द में कहे तो एडवोकेट दूसरे इंसान की तरफ से दलीली को कोर्ट में प्रेसेंटेड करता है,एडवोकेट बनने के लिए लॉ की पढ़ाई को पूरा करना जरुरी (compulsory) है|

यानि पहले लॉयर बनना होता है, फिर एडवोकेट बनना होता है

What are the type of advocate? | अधिवक्ता कितने प्रकार के होते है?

आइये जानते हैं भारत में वकीलों के प्रकार

  1. बौद्धिक संपदा वकील,(Intellectual Property Lawyer)
  2. जनहित वकील,(Public Interest Lawyer)
  3.  कर वकील,(Tax Lawyer)
  4.  कॉर्पोरेट वकील(Lawyer)
  5. आप्रवासन वकील,(Immigration Lawyer)
  6. आपराधिक वकील,(Criminal Lawyer)
  7. नागरिक अधिकार वकील,(Civil Rights Lawyer)
  8.  पारिवारिक वकील,(Family Lawyer)

Qualification of Advocate | एडवोकेट के लिए योग्यता

  • सबसे पहले आपको 12th class अच्छे marks से पास करनी होगी उसके बाद एलएलबी कोर्स करने के लिए आपको (B.a, B.com, B.se) जैसी किसी भी विषय में ग्रेजुएशन पूरी करनी होगी साथ ही आपको ग्रेजुएशन में कम से कम 50% से 55% marks  होने जरूरी है| 
  • भारत में एक वकील बनने के लिए, एक व्यक्ति के लिए कानून में स्नातक की डिग्री (Bachelor’s degree in Law), L.L.B लेगम बैकॉलारियस (Legum Baccalaureus) को पूरा करना जरूरी है कानून की स्नातक डिग्री (Bachelor’s Degree in Law)  3 साल या 5 साल की हो सकती है| 
  •  उम्मीदवार के पास वैलिड एडवोकेट आइडेंटी कार्ड होना चाहिए| 
  • एग्जाम के लिए उम्मीदवार भारतीय नागरिक होना चाहिए| 
  • उम्मीदवार को एसपीसी  में से किसी एक का सदस्य होना चाहिए| 
  • उम्र सीमा –स्टूडेंट्स को बिना किसी आयु  सीमा के L.L.B या L.L.M कोर्स में कॉलेज में प्रवेश लेने  की अनुमति है इस  नियम  से पहले L.L.B कोर्स के लिए सामान्य वर्ग के लिए उम्र सीमा 25 साल और एससी (SC)/एसटी (ST) और ओबीसी के लिए उम्र सीमा 35 साल  है| 

Advocate course fees  | अधिवक्ता कोर्स  फीस 

एडवोकेट कोर्स  फीस सभी  कॉलेजों में अलग-अलग होती  है प्राइवेट कॉलेजों में  llb कोर्स फीस  3 लाख  से 6 लाख तक की सालाना होती है और सरकारी  कॉलेजों में llb  कोर्स फीस 1 लाख से 2 लाख तक होती है| 

बैरिस्टर कौन होता है?

बैरिस्टर वह व्यक्ति होता है, जिसने इग्लैंड से Law की डिग्री प्राप्त की हो, उसे Barrister कहते है|

आप को पता हो होगा की महात्मा गांधी 19 साल की उम्र में ही कानून की पढ़ाई करने के लिए लन्दन चले गए थे और वहीं पर उन्होंने बैरिस्टर की डिग्री प्राप्त की थी. उनके परिवार के लोग चाहते थे,की महात्मा गाँधी बैरिस्टर बने| फिर महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत में बैरिस्टर बन कर ही लौटे|

इससे पता चलता है कि बैरिस्टर एक तरह का वकील ही होता है जो की कानून की पढ़ाई बहार से करता है|

लोक अभियोजक (Public Prosecutor) किसे कहते हैं?

वह व्यक्ति जिसके पास लॉ (law) की डिग्री है, एडवोकेट होने की योग्यता (ability) है |

जिसने BCI की परीक्षा को पास कर लिया है और अगर ये व्यक्ति राज्य सरकार की तरफ से पीड़ित (victim) का पक्ष (side) लेता है यानी विक्टिम की तरफ से कोर्ट में प्रस्तुत होता है तो इसे ही हम पब्लिक प्रोसिक्यूटर या लोक अभियोजक कहते हैं.

लोक अभियोजक (Public prosecutor) की मुख्य भूमिका (main role) जनता के हित में न्याय (justice) दिलाना होता है|

सरकारी अभियोजक (Government prosecutor) का काम तब शुरू होता है जब पुलिस ने अपनी जांच समाप्त कर कोर्ट में आरोपी के खिलाफ चार्ज शीट दायर की हो|

सरकारी वकील से अपेक्षा की जाती है कि वह निष्पक्ष(Neutral) रूप से कार्य करे और मामले के सभी तथ्यों, दस्तावेजों, और साक्ष्य को प्रस्तुत करे ताकि सही निर्णय पर पहुंचने में अदालत की सहायता की जा सके|

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Vanshita Tiwari
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