करवीर शक्तिपीठ का इतिहास |Karveer shakti Peetha History in Hindi

करवीर शक्ति पीठ का इतिहास जानकारी और रोचक तथ्य | Karveer Shakti Peetha History, information and interesting facts in Hindi, स्थान, महत्त्व

भारतीय उपमहाद्वीप में माँ शक्ति के 51 शक्ति पीठों का वर्णन पुराणों और पौराणिक कथाओं में मिलता है| जब भगवान् शंकर, अपनी पत्नी सती के मृत शरीर को लेकर आकाश मार्ग में भटक रहे थे|

तब भगवान् विष्णु ने माता सती के शरीर के कई टुकड़े कर दिए| इन्होने ऐसा केवल शंकर को माँ सती के स्मरण से निकालने के लिए किया|

जहाँ जहाँ माता सती के आभूषण और शरीर के अंग गिरे, वहां एक अध्यात्मिक उर्जा श्रोत का निर्माण हुआ| यह क्षेत्र माता शक्ति के शक्ति पीठों के नाम से जाने जाते हैं|

ऐसी ही एक जगह है, जहाँ माता सती का त्रिनेत्र गिरा था| यह क्षेत्र करवीर शक्ति पीठ के नाम से जाना जाता है|

करवीर शक्ति पीठ का इतिहास

क्रमांकParticularDetail
1.नामकरवीर शक्ति पीठ
2.अन्य नाममहालक्ष्मी मंदिर
3.स्थानमहाद्वार रोड, बी वार्ड,कोल्हापुर, महाराष्ट्र
4.समय6:00 am तो 12 am
4:30 am से 10:00 am
5.आरती का समयसुबह – 7 am, 6:30 pm (धुप आरती )
7:30 pm, 10 pm (सैया आरती)
6.विशेष उत्सवविजयदशमी, दुर्गा पूजा नवरात्रि
7.नजदीक रेलवे स्टेशनसी.एस.एम्.टी टर्मिनल कोल्हापुर
8.नजदीक हवाई अड्डाकोल्हापुर एअरपोर्ट

करवीर शक्ति पीठ कहाँ स्तिथ है

करवीर शक्ति पीठ का इतिहास

यह शक्ति पीठ महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र में स्तिथ है| कोल्हापुर में महाद्वार रोड, बी वार्ड में यह मंदिर आपको देखने को मिल जाएगा|

पाँच नदियों के संगम-पंचगंगा नदी तट पर स्थित कोल्हापुर प्राचीन मंदिरों की नगरी है।

किस देवी को समर्पित है करवीर शक्ति पीठ

पुरातन समय में कोल्हापुर स्थान ही करवीर के नाम से जाना जाता है| यहाँ विराजमान देवी स्वयंम लक्ष्मी रूप में हैं| इस
शक्ति पीठ को महालक्ष्मी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है|

यहाँ विराजमान देवी शक्ति महिषासुरमर्दनी और भैरव क्रोधशीश के रूप में पूजे जाते हैं|

महालक्ष्मी मंदिर की बनावट

महालक्ष्मी के मंदिर में शिवलिंग तथा नंदी का मंदिर भी है तथा व्यंकटेश, कात्यायिनी और गौरीशंकर भी
देवकोष्ठ में हैं।

परिसर में अनेक मूर्तियाँ हैं। खुले अहाते में मणिकर्णिका कुण्ड है, जिसके किनारे विश्वेश्वर महादेव का मंदिर है। उल्लेख है कि वर्तमान कोल्हापुर ही पुराण प्रसिद्ध करवीर क्षेत्र है। ऐसा उल्लेख देवीगीता में मिलता है-

‘‘कोलापुरे महास्थानं यत्र लक्ष्मीः सदा स्थिता।’’

इस मंदिर की वास्तुरचना श्रीयंत्र पर है। यह पाँच शिखरों, तीन मण्डपों से शोभित है।

तीन मण्डप हैं- गर्भ गृह मण्डप, मध्य मण्डप, गरुड़ मण्डप|

मत्स्यपुराण के अनुसार काराष्ट्र देश के बीच में श्री लक्ष्मी निर्मित पाँच कोस का करवीर क्षेत्र है, जिसके दर्शन से ही सारे पाप धुल जाते हैं-

“योजनं दश हे पुत्र काराष्ट्रो देश दुर्धटः॥ तन्मद्ये पंचकोशं च काश्याद्यादधिकं मुनि। क्षेत्रं वे करवीरारण्यं क्षेत्रं लक्ष्मी विनिर्मितः॥ तत्क्षेत्रं हि महत्पुण्यं दर्शनात् पाप नाशनम्।”

महालक्ष्मी प्रतिमा की बनावट

करवीर शक्ति पीठ की जानकारी

माता लक्ष्मी की श्री प्रतिमा हीरा मिश्रित रत्नशिला और स्वयंभू है। उसके मध्य स्थित पद्मरागमणि भी स्वयंभू है

प्रतिमा अति प्राचीन होने से घिस गई थी। अतः 1954 में कल्पोक्त विधि से मूर्ति में व्रजलेप-अष्ट वन्धादि संस्कार करने से
विग्रह स्पष्ट दिखने लगी।

चतुर्भुजी माँ लक्ष्मी के हाथ में मातुलुंग, गदा, ढाल, पानपात्र तथा मस्तक पर नाग, लिंग, योनि है|

“मातुलुंगं गदा खेटं पान पात्रं च विभ्रती। नागंलिंगं च योनि च विभ्रती नृप मूर्धनि॥

स्वयंभू मूर्ति में सिर पर किरीट उत्कीर्ण है, जिस पर शेष की छाया है। 31/2 फुट ऊँची यह प्रतिमा अति सुंदर है। देवी के चरणों के पास सिंह भी विराजमान है।

“वाराणस्याधिकं क्षेत्रं करवीरपुरं महत्। भुक्ति मुक्तिप्रदं नृणां वाराणस्या यवाधिकम्॥

कोल्हापुर क्षेत्र में अन्य दर्शनीय स्थल

यहाँ महालक्ष्मी के अलावा व्यंकटेश, कात्यायनी, गोरीशंकर के मंदिर भी प्रसिद्द हैं|

करवीर क्षेत्र का वर्णन पुराणों में भी मिलता है|

क्यों माना जाता है शक्तिपीठ

ऐसा माना जाता है, जब भगवान् शंकर शोकाकुल वश पत्नी सती के मृत शरीर को लेकर आकाश मार्ग में भटक रहे थे|

तब भगवान् विष्णु ने शंकर को इस शोक से दूर करने के लिए माता सती के मृत शरीर के कई टुकड़े कर दिए|

जहाँ माता सती के शरीर के अंग और आभूषण गिरे वहां शक्ति पीठ बन गए| पौराणिक कथाओं के अनुसार करवीर क्षेत्र में देवी सती का त्रिनेत्र गिरा था|

महालक्ष्मी देवी से जुडी पौराणिक कथा

‘करवीर क्षेत्र महात्म्य’ और ‘लक्ष्मी विजय’ शास्त्रों के अनुसार इस क्षेत्र में एक करवीर नाम से राक्षस था| उसे वरदान प्राप्त था की उसकी म्रत्यु केवल एक स्त्री से ही हो सकती है|

देवी शक्ति ने महालक्ष्मी रूप में अवतार लेकर उस राक्षस का वध किया| लेकिन मरते समय उसने महालक्ष्मी से वरदान लिया की इस क्षेत्र का नाम उसके नाम पर रखा जाए और आप इस क्षेत्र की रक्षक के रूप में हमेशा यहाँ विराजमान रहे|

तभी से यह स्थान करवीर के नास से जाना जाता है| लेकिन बाद में इसका नाम कोल्हापुर रख दिया गया|

महालक्ष्मी मंदिर मार्ग स्तिथि

मुंबई से कोल्हापुर जाने के लिए आप अहमदाबाद एक्सप्रेस से जा सकते हैं| इससे 8 घंटे 38 मिनट का समय लगेगा| टेक्सी से 5 घंटे और 24 मिनट का समय लगता है|

कोई हवाई जहाज मुंबई से कोल्हापुर नहीं जाता है|

मुंबई से कोल्हापुर की दुरी

हवाई – 302 KM
रेल – 419 Km
रोड – 374 Km

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