जीवन पर संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित | Sanskrit shlokas on life with Hindi meaning

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जीवन पर संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सहित | Sanskrit shlokas on life with Hindi meaning

वाणी रसवती यस्य,यस्य श्रमवती क्रिया।
लक्ष्मी : दानवती यस्य,सफलं तस्य जीवितं।।

हिंदी अर्थ – जिस मनुष्य की वाणी मीठी हो, जिसका काम परिश्रम से भरा हो, जिसका धन दान करने में प्रयुक्त हो, उसका जीवन सफ़ल है।

परस्वानां च हरणं परदाराभिमर्शनम्।
सचह्रदामतिशङ्का च त्रयो दोषाः क्षयावहाः।।

हिंदी अर्थ– दूसरों के धन का अपहरण, पर स्त्री के साथ संसर्ग और अपने हितैषी मित्रों के प्रति घोर अविश्वास ये तीनों दोष जीवन का नाश करने वाले हैं।

मूर्खशिष्योपदेशेन दुष्टास्त्रीभरणेन च।
दुःखितैः सम्प्रयोगेण पण्डितोऽप्यवसीदति।।

हिंदी अर्थ– मुर्ख शिष्यों को पढ़ाकर, दुष्ट स्त्री के साथ अपना जीवन बिताकर, रोगियों और दुखियों के साथ रहकर विद्वान भी दुखी हो जाता है।

सर्वे क्षयान्ता निचयाः पतनान्ताः समुच्छ्रयाः।
संयोगा विप्रयोगान्ता मरणान्तं च जीवितम्।।

हिंदी अर्थ– सभी प्रकार के संग्रह का अंत क्षय है। बहुत ऊंचे चढ़ने के अंत नीचे गिरना है। संयोग का अंत वियोग है और जीवन का अंत मरण है।

अष्टौ गुणाः पुरुषं दीपयन्ति,
प्रज्ञा च कौल्यं च दमः श्रुतं च।
पराक्रमश्चाबहुभाषिता च,
दानं यथाशक्ति कृतज्ञता च।।

हिंदी अर्थ:- बुद्धिमत्ता, अच्छे कुल में जन्म, इंद्रियों पर संयम, शास्त्रों का ज्ञान, वीरता, मितभाषण, यथाशक्ति दान और कृतज्ञता। ये आठ गुण मानव के जीवन को उज्जवल करते हैं।

जीवितं क्षणविनाशिशाश्वतं किमपि नात्र।

हिंदी अर्थ:- यह जीवन क्षणभंगुर है यहाँ कुछ भी शाश्वत नहीं है।

जीवितं बुबुप्रायम्

हिंदी अर्थ:- जीवन जल के बुलबुले की तरह क्षणभंगुर है

नदाक्षिण्यं न सौशील्यं न कीर्तिः
न सेवा नो दया कि जीवनं ते।

हिंदी अर्थ:- न दान है। न सुशीलता है। न सेवा है| नदया है। तो तुम्हारा जीवन क्या है?

एति जीवन्तमानन्दो नरं वर्षशतादपि।

हिंदी अर्थ:- यदि मनुष्य जीवित रहे तो सौ वर्ष के बाद भी उसे आनन्द लाभ होता है।

जीविताशा बलवती धनाशा दुर्बला मम्।।

हिंदी अर्थ:- मेरी जीवन की आशा बलवती है, परन्तु धन की आशा दुर्लभ है।

विकृतिर्जीवितमुच्यते बुधैः।।

हिंदी अर्थ:- बुद्धिमान ने जीवन को विशिष्ट कृतिका है|

जीवचक्रं भ्रमत्येवं मा धैर्यात्प्रच्युतो भव।

हिंदी अर्थ:- जीवन का चक्र ऐसे ही चलता है, इसलिए तुम धैर्य मत छोड़ो।

जीवितं बुबुदप्रायम्।

हिंदी अर्थ:- जीवन तो जल के बुलबुले की तरह नश्वर है

परंतु मृत्युरामृतं न एतु|

हिंदी अर्थ:- हमसे मृत्यु दूर भागे और हमे अमरता मिले|

मत्तांगनापांगलोलं हि जीवितम्।।

हिंदी अर्थ:- जीवन मतवाली कामिनी के नेत्र की चितवन के समान चञ्चल होता है।

समाप्तिं गते नाटके जीवनाख्ये
यदान्तमाप्नोति तदा न किञ्चित्।
न वित्तं न रूपंन वर्णो न जातिः
सर्वं तदैकम्, मनुष्यः शरीरम्।

हिंदी अर्थ:- जीवन रूपी नाटक के समाप्त हो जाने पर जब अंत आता है तो कुछ नहीं रहता ना धन रूप रंग जाती यह मनुष्य यह शरीर सब एक रूप हो जाता है

यो मृषा सज्जनानां हि वावद्यते
वत्स नक्तं दिवा यो विचञ्चूर्यते।
दुर्जनानां सकाशं च सासद्यते
जीवनं मृत्युतुल्यं हि तस्योद्यते।

हिंदी अर्थ:- सत्पुरुषों से जो असत्य कहे, संग करे जो असत्पुरुषों का || व अहर्निश भ्रमण करे, है जीवन मृत्यु-तुल्य उसका ||

मुखे मधु ते मनसि ते कालकूटः
तृणावृतकूपरे! किं जीवनम् ते

हिंदी अर्थ:- हे तृण आच्छादित कूप! है जीवन क्या तेरा| सदा मुख में मधु रहे मन में कालकूट विष तेरे

प्रहास एव जीवनं विकास एव जीवनम्।
प्रकाश एव जीवनं रविर्दिशत्ययं मुदा।।

हिंदी अर्थ:- मुदित होकर सूर्य देता है यह सन्देश प्रसन्नता, कर्तव्य, विकास, यही है जीवन का प्रकाश

नो चेज्जातस्य वैफल्यं कास्य हानिरितिः परा।

हिंदी अर्थ:- जीवन की विफलता से बढ़कर क्या हानि हो सकती है?

नष्टा नष्टा पुनर्नष्टा सष्टिरद्यापिजीवति।
दर्श दर्शमिदं मन्ये जीवितेन जिता मृतिः।।

हिंदी अर्थ:- अनेकों बार नष्ट होने के बावजूद सृष्टि अभी तक जीवित है यह देख देख कर यह सोचता हूं कि जीवन ने निश्चय ही मृत्यु को जीत लिया है|

न दाक्षिण्यं न सौशील्यं न कीर्तिः
नसेवा नो दया किं जीवनं ते।

हिंदी अर्थ:- नदान है न सुशीलता है न सेवा है न दया है तो तुम्हारा जीवन क्या है?

धिगस्तु खलु मानुष्यं धिगस्तु परवश्यताम्।
न शक्यं यत्परित्यक्तमात्मच्छेन्देनजीवितम्।।

हिंदी अर्थ:- मनुष्य जीवन को धिक्कार है परवशता को धिक्कार है यहां कोई भी अपने आप अपना जीवन त्यागने में समर्थ नहीं है|

स जीवति गुणो यस्य धर्मो यस्य स जीवति।
गुणधर्मविहिनो यो जीवनं तस्य निष्फलम्।।

हिंदी अर्थ:- गुण धर्म है जिसमें जीवन उसका सफल है। न हो ये गुण जिसमें जीवन उसका विफल है

जीवने यस्य जीवन्ति मित्राणीष्टाः सबान्धवाः।
सफलं जीवितं तस्य आत्मार्थे को न जीवति।।

हिंदी अर्थ:- स्वार्थ छोड़ परार्थ जीये जीवन उसका सफल है| मित्र, इष्टजन, बन्धु-बान्धव जिस पर जीवन जीते हो ||

नन्दन्त्युदित आदित्ये नन्दन्त्यस्तमिते रवौ।
आत्मनो नानाबुध्न्ते मनुष्या जीवितक्षयम्।।

हिंदी अर्थ:- मनुष्य सूर्योदय पर आनंदित होते हैं सूर्यास्त पर आनंद मनाते हैं उनका जीवन बितता जा रहा है व इसे नहीं समझते।

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Anurag Pathak
इनका नाम अनुराग पाठक है| इन्होने बीकॉम और फाइनेंस में एमबीए किया हुआ है| वर्तमान में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं| अपने मूल विषय के अलावा धर्म, राजनीती, इतिहास और अन्य विषयों में रूचि है| इसी तरह के विषयों पर लिखने के लिए viralfactsindia.com की शुरुआत की और यह प्रयास लगातार जारी है और हिंदी पाठकों के लिए सटीक और विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराते रहेंगे
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