हनुमान जी का व्रत कैसे करें, महत्त्व, पूजा विधि

हनुमान जी का व्रत कैसे करें | मंगलवार के व्रत का महत्त्व, पूजा विधि | How to do tuesdya fast for Hanuman ji in Hindi |

दोस्तो, हनुमानजी ही ऐसे देवता है जो बहुत जी जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं| हनुमानजी बल बुद्धि और विवेक के देवता है| और यदि आपके अन्दर, शक्ति, समझ और विवेक का विकास हो जाए तो आप जीवन की सभी परेशानियों पर पार पाके एक उन्नत जीवन जी सकते हैं|

हनुमान की व्रत किसे रखना चाहिए

वैसे तो हिन्दू धर्म के मानने वाले सभी लोगों को हनुमानजी का व्रत रखना चाहिए| लेकिन जिनकी कुंडली में मंगल गृह कमजोर है और जीवन में गलत प्रभाव डाल रहा है|

उनके लिए हनुमानजी का व्रत विशेष तोर कर करना ही चाहिए|

इसके अलावा यदि आपके ऊपर शनि की महादशा और साड़े साती चल रही है| तब भी हनुमान जी का व्रत लाभकारी है|

आइये जानते हैं हनुमानजी को प्रसन्न रखने के लिए कैसे इनका व्रत रखा जाता है|

हनुमानजी के व्रत के फायदे

मंगलवार का व्रत सम्मान, बल, साहस, और पुरुषार्थ को बढ़ाता है और संतान प्राप्ति के साथ संतान संबंधी सभी परेशानियों को दूर करता है। साथ ही इस व्रत से जादु, टोना और काली शक्तियों से भी बचा जा सकता है।

हनुमान जी का व्रत किस दिन रखना चाहिए

हनुमान जी का व्रत मंगलवार को रखना चाहिए | स्कन्दपुराण के अनुसार हनुमान जी का जन्म मंगलवार को ही हुआ था| एक तरह से आप यह समझ सकते हैं की मंगलवार के दिन श्रधा पूर्वक व्रत रखने से हनुमानजी प्रसन्न रहते हैं|

हनुमानजी का व्रत कब से शुरू करें

हनुमानजी के व्रत का आरंभ किसी भी महीने की शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार से करना शुभ माना गया है|

हनुमानजी (मंगलवार) का व्रत कितने दिन रखें

यदि आप मंगलवार के व्रत प्रारंभ करें तो कम से कम 21 और 45 मंगलवार तक व्रत रखना चाहिए|

और हाँ, यदि आपकी कुंडली में मंगल बहुत ही ज्यादा कमजोर है और जीवन में अशुभ परिणाम देखने को मिल रहे हैं तो आपको आजीवन मंगलवार का व्रत रखना ही चाहिए|

हनुमानजी के व्रत की विधि

हनुमान जी के व्रत की एक विशेष विधि है उसे आप विधिवत अपनाएँ और उसका अनुसरण करें |

जिस मंगलवार से आप व्रत प्रारंभ कर रहे हैं, उस मंगलवार आप सूर्योदय से पहले उठ जाएँ| उठते ही हनुमानजी का ध्यान करेंऔर मन में ही श्रधा पूर्वक उन्हें प्रणाम करें|

शोच और स्नान से निवृत होकर, हनुमानजी के पूजन की तैयारी करें|

हनुमानजी के पूजन के लिए आप सबसे पहले तो लाल वश्त्र धारण करें और यह लाल वश्त्र सिले हुए नहीं होने चाहिए|

अब अपने घर के ईशान (उत्तर – पूर्व) कोण में एक लकड़ी को चोकी लगाकर उस पर लाल कपडा बिछाएं| अब भगवान् राम सीता की मूर्ति या तस्वीर रखें और उसके साथ हनुमानजी की मूर्ति राम सीता के समीप रखें|

हनुमान चालीसा ले लें|

सबसे पहले राम सीता की स्तुति करें| हनुमान चालीसा में ही राम सीता की स्तुति दी हुई है|

श्री राम चन्द्र कृपाल भज मन, हरण भव भय दारुणं ………………….

राम सीता की स्तुति करने के बाद, हाथ में जल, पुष्प और पैसे रखकर मन ही मन, 21 दिन या 45 दिन या फिर आजीवन मंगलवार का व्रत रखने का संकल्प लें|

व्रत के संकल्प के बाद घी का दीपक या धूप दीप जलाकर पहले भगवान श्री राम और माता सीता की आरती करें, फिर हनुमान जी की पूजा करें।

हनुमान जी को लाल फूल, लाल वस्त्र, लाल सिंदूर और चमेली के तेल का तेल बजरंगबली को चढ़ाएं।

इसके बाद जितना आपके पास समय है उसके अनुसार हनुमान चालीसा, सुन्दर काण्ड का पाठ करें लेकिन पाठ पूर्ण श्रधा के साथ करें|

समय कम है तो केवल हनुमान चालीसा का पाठ करें

पाठ करने के बाद भगवान् जी केले, बूंदी और बेसन के लड्डू का भोग लगाएं|

हनुमान जी का मंगलवार का व्रत प्रतिदिन कैसे तोड़े

मंगलवार के दिन, आप केवल एक ही समय सूर्यास्त से पहले भोजन कर लें| भोजन में केवल कुछ मीठा ही होना चाहिए| अच्छा होगा यदि आप केवल मीठे फल और मीठा दही खाएं|

खाने में बिलकुल भी नमक नहीं होना चाहिए| किसी भी तरह का नमक चाहे वो सेंध, काला और सफ़ेद नमक हो, सभी तरह का नमक वर्जित है हनुमानजी (मंगलवार) के व्रत में|

मंगलवार के व्रत में दिन के बीच में कुछ खा सकते हैं या नहीं|

वैसे तो बीच में खाने की मनाही नहीं है, आप कुछ भी जो मीठा हो खा सकते हैं| यदि आप किसी बीमारी से पीड़ित हैं जिसमें खाना खाना आवश्यक है तो आप एक या दो केले खा सकते हैं|

अन्यथा केवल आप शाम को सूर्यास्त से पहले केवल मीठा भोजन कम मात्र में करें|

आप शाम को केले, शेव और मीठे दही का सेवन कर सकते हैं|

व्रत के दौरान इस पर रखें ध्यान

यदि आप हनुमान जी का व्रत रखते हैं तो हमेशा के लिए अपने जीवनकाल में मांस मदिरा का सेवन करना छोड़ दें औऱ अपने आचार-विचार को स्वच्छ रखें।

व्रत के दिन गरीबों में अपनी आवश्यकता अनुसार दान अवश्य करें और घर के आसपास या कहीं पर बंदर दिखें तो उन्हें केले खिलाएं। इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।

21 या 45 दिन के बाद करें हनुमानजी के व्रत का उद्यापन

जैसा भी आपने संकल्प लिया है उसके अनुसार आप 21 या 45 दिन के बाद मंगलवार के व्रत का उद्यापन करें| इसमें इस दिन उसी प्रकार हनुमानजी का प्रातःकाल पूजा करें|

पास के मंदिर में जाकर हनुमानजी को चोला चढ़ाएं या फिर चोले की सामग्री मंदिर में दान कर दें| हनुमानजी को सवा किलो लड्डू (बूंदी या बेसन) का भोग लगायें| और प्रसाद बच्चों में बाँट दें|

वैसे तो हवन कराने का भी प्रावधान है लेकिन यदि आप हवन नहीं करा सकते हैं समय नहीं है| तो हनुमानजी पर चोला चढ़ाएं और सवाकिलो लड्डू का भोग लगाएं और मंदिर में पंडितजी को अपनी श्रधा के अनुसार दान दक्षिणा दें|

Share your love
Default image
Viral Facts India
Articles: 340

Leave a Reply

close