गणगौर व्रत कथा और पूजन विधि | Gangaur Vrat Katha or Pujan vidhi

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गणगौर माता की व्रत कथा और कहानी हिंदी में | Gangaur Pooja story vrat Katha in Hindi | गणगौर पूजा के समय की कहानी | गणगौर व्रत की कहानी

गणगौर राजस्थान और मध्यप्रदेश के कुछ भागों में प्रमुख त्यौहार है| यह केवल महिलाओं का त्यौहार है और विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और अविवाहित एक योग्य पति की कामना से इस व्रत को रखती हैं|

इस त्यौहार में एक व्रत रखने और व्रत कथा सुनने का प्रावधान होता है, आज हम इसी की चर्चा करेंगे|

गणगौर व्रत कथा और पूजन विधि

गणगौर व्रत कैसे रखें

चेत्र कृष्ण पक्ष की एकदशी को सुबह स्नान करके गिले वस्त्रों में ही घर के किसी कोने में एक गमले में ज्वारे उगाने चाहिए|
इन ज्वारों को ही शिव पार्वती के रूप में माना जाता है|

इस दिन से विसर्जन तक व्रती को एक समय ही भोजन करना चाहिए|

करीब 8 दिन तक एकादशी से चेत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तक सुबह उठकर नहाकर गौरी की विधि विधान से पूजा कर उन्हें भोग लगाना चाहिए|

माँ पार्वती जी की स्थापना पर सुहाग की वस्तुएं जैसे कांच की चूड़ियाँ, सिंदूर, महावर, मेहँदी, टीका, बिंदी, कंघी, शीशा, काजल आदि चढ़ाई जाती है|

इसके पश्चात पार्वती जी का भोग लगाया जात है और कथा सुनी जाती है| कथा सुनने के बाद पार्वती जी पर चढ़ाये गए सिंदूर से मांग भरनी चाहिए|

चेत्र शुक्ल की द्वितीया (सिंजारे) को गणगौर को किसी नदी और तालाब सरोवर पर ले जाकर स्नान करना चाहिए| अगले दिन चेत्र शुक्ल पक्ष की तृतीय को गोरी शिव को स्नान कराकर पालने में बिठाए सुन्दर कपडे पहनाएं|

शाम को शोभा यात्रा निकलकर किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दें| विसर्जन के बाद उपवास खोल लें|

गणगौर पूजा के समय सुनी जाने वाली कहानी

गणगौर व्रत कथा हिंदी में

राजा ने बोये जो चने और माली ने बोई दूब, राजा के जो चने तो बढ़ें जाएँ, लेकिन माली की दूब न बढे| माली को चिंता होने लगे और सोच में डूबन लगा|

माली ने कहा कुछ तो गड़बड़ है छुपकर निगाह रखनी पड़ेगी जाने| जब माली ने छुपकर देखा तो कुछ लड़कियां दूब तोड़कर ले जा रही थी|

माली ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया और उनकी चुन्नी छीन ली| लड़कियां बोली हम ये दूब गणगौर माता के पूजन के लिए ले जा रहे हैं|

आप हमें दूब ले जाने दो हम आपको गणगौर तीज को गणगौर का पूजा पाटा आपको दे देंगे| ऐसा सुनकर माली ने उनकी चुन्नी वापस कर दी और दूब ले जाने दी|

गणगौर तीज पर लड़कियां पाटा माली के दे गई| माली ने घर आकर पाटा मालिन को दिया लेकिन मालिन ने बोला इसे ओबरी (छोटा कमरा) में रख दो|

माली ने पूजा पाटा ओबरी में रख दिया| शाम को माली मलिन का लड़का घर पर आया और कहा मुझे भूख लगी है| मलिन ने कहा ओबरी में लड़कियों का गणगौर का पूजा पाटा रखा है उसमें से लेके खा ले|

लड़के ने ओबरी खोलने की कोशिश की लेकिन ओबरी खुले ही न| गुस्से में उसने ओबरी के दरबज्जे पर खींच कर लात मारी लेकिन ओबरी नहीं खुली|

मालिन ने कहा, थारे से यो दरबज्जो न खुल रो, तू पराई जाई को कैसे ढाबेगा|

मालिन ने डिब्बी में से रोली निकली, आँखों को कोर से काजल निकाला, नाख़ून से मेहंदी निकाली और हथेली पर उसे घोर लिया|

घोर को ओबरी पर छिड़क दिया, छिड़कते ही ओबरी खुल गई| मलिन और लड़का जैसे ही ओबरी में घुसे, नज़ारा देख कर दंग रह गए|

अन्दर ईसर सुन्दर कपडे पहन कर बेठे हुए थे और गणगौर (गबरी) मांग संवार रही थी और ओबरी में पकवान और मिष्ठान का अम्बार लगा हुआ था|

मालन और लड़के ने ईसर और गणगौर के दर्शन करे, गणगौर माता जैसे इन्हें दर्शन दिए ऐसे ही हमें भी दर्शन देना, ईसर जी जैसा भाग्य और गणगौर जैसा सोभाग सबको देना, कहानी कहने वाले और कहानी सुनने वाले सबको अमर सुहाग देना|

बोलो गणगौर मैया की जय

गणगौर व्रत की कथा

एक बार शंकर जी माँ पार्वती और नारद के साथ प्रथ्वी पर घुमने आये और एक गाँव में जा पहुंचे| शिव पार्वती के आने का समाचार सुनकर गाँव की ओरतें आमिर और या गरीब सभी भगवान् की आव भगत करने के लिए भोजन पकवान बनाने की तैयारी करने लगी|

लेकिन गरीब ओरतें जल्दी से जो भी उनके साथ रुखा सुखा वो बना पाई, जल्दी से आकर भगवान् शिव और माँ पार्वती का भोग लगाकर आदर सत्कार दिया|

उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर माँ पार्वती ने गरीब ओरतों पर सुहार की हंल्दी छिड़ककर सदा सुहागन रहने का वरदान दिया|

कुछ देर के बाद अमीर घर की ओरतें स्वादिष्ट पकवान और मिष्ठान लेकर स्वागत के लिए पहुंची| तब भगवान् शिव ने पार्वती से पूछा, तुमने सारा सुहाग की हल्दी तो इनपर छिड़क दी अब इन्हें सदा सुहागन का आशीर्वाद कैसे देंगी|

माँ पार्वती ने कहा सभी भक्त आमिर हो या गरीब मेरे लिए समान हैं, आप निश्चिंत रहे| आमिर स्त्रियों ने माँ पार्वती और भगवान शिव की पूजा अर्चना की और पकवान और मिष्ठान से भोग लगाकर आदर सत्कार किया|

माँ पार्वती ने अपनी एक ऊँगली चीरकर अपने खून के छींटे दे कर सभी स्त्रियों को सदा सुहागन रहने का आशीर्वाद दिया|

सभी कार्यों से निवृत होकर, माँ पार्वती नदी किनारे स्नान करने चली गई| स्नान के उपरान्त बालू का शिव लिंग बनाकर पूजा अर्चना की|

शिवजी ने प्रसन्न होकर पार्वती जी को वरदान दिया की गणगौर तीज के दिन जो भक्त (स्त्री) श्रद्धा से मेरा पूजन और आपका व्रत रखेगा उसे अखंड सोभाग्यवती होने का वरदान प्राप्त होगा|

इसके बाद माँ पार्वती वापस शिवजी और नारद जी के पास आई, शिव ने देर से आने का कारण पूछा| माँ पार्वती ने ऐसे ही बोल दिया रास्ते में भाई और भाभी मिल गए|

उन्होंने दाल भात खाने का आग्रह किया इसी में देर हो गई| शिवजी ने कहा हमें भी दाल भात काने की इच्छा है हम भी वहां चलेंगे|

यह कहकर शिव नदी की और चल दिए| यह देखकर माँ पार्वती चिंतित हो गई और मन ही मन भगवान् से सब कुछ ठीक करने के लिए प्रार्थना करने लगी|

जैसे ही सब नहीं किनारे पहुंचे वहां उन्हें एक भव्य राज महल दिखा| वहां माँ पार्वती के भाई और भाभी भी थे, शिव नारदजी और पारवती ने वहां खूब दाल भात खाया और तीन दिन रुके|

तीन दिन के बाद वापस हो लिए| रास्ते में भगवान् शिव को ध्यान आया की में अपनी माला तो वहीँ भूल आया हूँ| माँ पार्वती ने कहाँ में ले आती हूँ|

लेकिन शिवजी ने कहा आप रहने दीजिये नारदजी ले आएँगे| नारदजी चल दिए उस और वहां पहुंचकर उन्हें वहां कोई भी राजमहल दिखा ही नहीं|

जंगल के अलावा वहां कुछ भी नहीं था| जंगली जानवरों की आवाजें आ रही थी, डरके मारे नारदजी भगवान् का नाम लेने लगे|

उसी समय एक तेज बिजली कडकी और भगवान् शिव की माला एक पेड़ की डाल पर टंगी हुई दिखी| नारदजी माला लेकर  वापस आये और आप बीती सुनाई|

यह सुनकर शिवजी बोले, माँ पार्वती ने अपने झूठ को छुपाने के लिए अपनी शक्ति से वहां महल बनाया था| में बस आपको सत्य से अवगत कराना चाहता था|

जैसे माँ पार्वती ने छुपकर व्रत और पूजा की थी उसी प्रकार आज के दिन सभी स्त्रियों को पति से छुपकर ही व्रत करना चाहिए|

जो भी विवाहित स्त्री इस गणगौर व्रत की कथा को सुनकर श्रधा से माँ पार्वती के व्रत करती है उसे अखंड सोभाग्य का वरदान प्राप्त होता है|

इसलिए आज के दिन पुरुष गणगौर की पूजा के समय उपस्थित नहीं होते| यह त्यौहार केवल स्त्रियों का ही त्यौहार है और इस दिन पुरुषों को गणगौर व्रत पूजा का प्रसाद भी नहीं दिया जाता है| खरी की खोटी अधूरी की पूरी

जय शिव शंकर जय माँ पार्वती!

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