भारत की प्रथम महिला महापौर कौन थी | Who was the first woman Mayer of India in Hindi

भारत की प्रथम (पहली) महिला महापौर कौन थी और किस राज्य की थी | Who was the first woman Mayer of India in Hindi and name of state

दोस्तो, महिलायें भी प्रतिभा की धनी होती है| यदि इन्हें सही अवसर उपलब्ध कराएं जाएँ तो समाज के हर एक क्षेत्र में अपनी योग्यता का लोहा मनवा ही लेती हैं|

आज भारत की महिला हर क्षेत्र में आगे हैं चाहे वो विज्ञान का क्षेत्र और या राजनीती का |

आज हम बात कर रहे हैं ऐसी ही एक प्रतिभाशाली नारी की जो एक भारत के एक राज्य की प्रथम महिला महापौर बनी|

आइये इनके जीवन के बारे में संक्षिप्त में चर्चा करते हैं|

भारत की प्रथम महिला महापौर कौन थी

Who was the first woman Mayer of India in Hindi

भारत की प्रथम महिला महापौर (मेयर) तारा चेरियन थी| नवम्बर 1957 में इन्हें मद्रास शहर की मेयर के रूप में चुना गया|

इसके अलावा 1967 में इन्हें भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया गया|

भारत की प्रथम महिला महापौर (मेयर) कौन थी
पूरा नाम तारा चेरियन
जन्म मई, 1913
पति पी.वी चेरियन
नागरिकता भारतीय
जन्म भूमि मद्रास
शिक्षा स्नातक
विद्यालय वीमेन्ट्र क्रिश्चियन कॉलेज
पुरस्कार-उपाधि पद्म भूषण’ (1967)
प्रसिद्धि समाज सेविका
राजनितिक उपलब्धियांमद्रास, महापौर 1957
मृत्यु 7 नवम्बर, 2000

तारा चेरियन का जन्म मई 1913 में मद्रास में हुआ था| इनकी शिक्षा मद्रास विश्वविद्यालय से पूरी हुई| पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होने समाज सेवा का कार्य प्रारंभ कर दिया|

इनके पति पी वी चेरियन भी एक राजनेता और समाज सेवक थे|

इन्हें नवम्बर 1957 में मद्रास का मेयर चुना गया| इसके अलावा सामाजिक और राजनीती में इनके योगदान के लिए, भारत सरकार ने इन्हें 1967 में पदम् भूषण से सम्मानित किया|

विधार्थी जीवन

तारा चेरियन शुरू से ही मेधावी छात्र थी लेकिन कभी भी अंक तालिका में ज्यादा अंक लाने के पीछे नहीं भागी| इन्होने विधार्थी जीवन के हर पहलू को पूर्ण रूप से जीया|

पढ़ाई के साथ खेल कूद, कला और रंग मंच के कार्यकमों में भी बढ़ चढ़ कर भाग लिया|

प्रथम महिला महापौर के रूप में किये गए कार्य

1957 में मद्रास की महापौर बनी और समाज के गरीब बच्चों के लिए कार्य करने का मन बनाया| अक्सर मद्रास के गरीब इलाकों का दोरा करती थी और उनकी समस्याओं का समाधान करने की कोशिश करती थी|

मेयर के रूप में उन्होंने स्कूली बच्चों के लिये शिक्षा पद्धति में कई सुधार किये तथा उनके स्वास्थ्य के लिये दोपहर में पोषक तत्वों से पूर्ण भोजन की व्यवस्था कराई, जिसके फलस्वरूप बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ।

इन्होने विकलांगों के लिए भी कई सरकारी योजनायें चलाई|

तारा चेरियन के सेवाभाव को देखकर ही भारत सरकार ने उन्हें 1967 में पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया था।

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