Chanakya Niti Chapter 9 Hindi English | चाणक्य नीति नवां अध्याय अर्थ सहित

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Chanakya niti chapter 9 in hindi english

Chanakya Niti ninth Chapter 9 slokas meaning in Hindi English | चाणक्य नीति नवां अध्याय हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित | कौटिल्य निति नवां अध्याय 

दोस्तो, चाणक्य जिन्हें कोटिल्य के नाम से भी जाना जाता है, भारत के इतिहास के महान अर्थशास्त्री और राजनीतिज्ञ थे| इन्होने अपने जीवन के अनुभव और वेदों के अध्यन से एक ग्रन्थ की रचना की जिसे चाणक्य निति के नाम से जाना जाता है|

इसी चाणक्य नीति के नवें (9) अध्याय की हिंदी और इंग्लिश अर्थ सहित (Chanakya Niti Chapter 9 slokas with hindi and English Meaning) आज हम विस्तार से चर्चा कर रहे हैं| आशा करते हैं यह ज्ञान आपके जीवन में जरुर सकारात्मक परिवर्तन लेके आएगा|

Chanakya Niti Chapter 9 in Hindi English

चाणक्य नीति नवां अध्याय हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित

संस्कृत श्लोक – 1

मुक्तिमिच्छसि चेतात विषयान् विषवत् त्यज।
क्षमाऽऽर्जवदयाशौचं सत्यं पीयूषवत् पिब।।1।।

दोहा – 1

मुक्ति चहो जो तात ! वि षयन तजु वि ष सरिस ।
दयाशील सच बात, शोच सरलता क्षमा गहु ।।1।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य यहां मोक्ष के लिए जरुरी स्थितियों की चर्चा करते हुए कहते हैं , यदि तुम मुक्ति चाहते हो तो विषयों को विष समझकर इनका त्याग कर दो। क्षमा, आर्जव, दया, पवित्रता, सत्य आदि गुणों का अमृत के समान पान करो। |

अर्थात् मनुष्य को अपनी सारी इच्छाओं-बुराईयों को त्याग देना चाहिए। फिर क्षमा, दया आदि गुणों को अपनाना चाहिए तथा सच्चाई की राह पर चलते हुए अपनी आत्मा को पवित्र करना चाहिए। तभी मोक्ष मिल सकता है।

English Meaning:- Chanakya advises to humans, if you desire to be free from the cycle of birth and death, then abandon the objects of sense gratification as poison. Drink instead the nectar of forbearance, upright conduct, mercy, cleanliness, and truth.

संस्कृत श्लोक – 2

परस्परस्य मर्माणि ये भाषन्ते नराधमाः।
ते एव विलयं यान्ति वल्मीकोदरसर्पवत्।।2।।

दोहा – 2

नीच अधम नरभा अते, मर्म परस्पर आप ।
ते विलाय जै हैं यथा, मघि बिमवट को साँप ।।2।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जो मनुष्य परस्पर एक-दूसरे की बातों को सुनकर अन्य लोगों को बता देते हैं वे बांबी के अंदर के सांप के समान नष्ट हो जाते हैं।

अर्थात् जो दुष्ट पहले तो दूसरे का भेद सुन लेते हैं और फिर उन भेदों को अन्य लोगों को बता देते हैं, ऐसे लोग उस सांप के समान नष्ट हो जाते हैं, जो अपने बिल के अन्दर ही मारा जाता है सांप के बिल में कोई और दूसरा रास्ता न होने के कारण बचने का कोई अवसर ही नहीं मिलता।

English Meaning:- Those crook human who disclose of the secret faults of others destroy
themselves like serpents who stray onto its own den.

संस्कृत श्लोक – 3

गन्धं सुवर्णे फलमिक्षुदण्डे नाकारिपुष्पं खलु चन्दनस्य।
विद्वान धनी भूपतिर्दीर्घजीवी धातुः पुरा कोऽपि न बुद्धिदोऽभूत।।3।।

दोहा – 3

गन्ध सोन फल इक्षु धन, बुध चिरायु नरनाह।
सुमन मलय धातानि किय, काहु ज्ञान शुरुनाह ।।3।।

हिंदी अर्थ:- चाणक्य संसार के सत्य हो बताते हुए कहते हैं, कि सोने में सुगंध, गन्ने में फल, चंदन में फूल नहीं होते। विद्वान धनी नहीं होता और राजा दीर्घजीवी नहीं होते। क्या ब्रह्मा को पहले किसी ने यह बुद्धि नहीं दी?

आशय यह है, की इस संसार पर मनुष्य का कोई जोर नहीं चलता| सब कुछ उस परमात्मा के हाथों में है| और इस संसार में सभी की आयु निश्चित है चाहे वो विद्वान् हो या राजा, सब प्रकृति के सामने बरावर हैं |

English Meaning:- Perhaps nobody has advised Lord Brahma, the creator, to impart perfume to gold, fruit to the sugarcane; flowers to the sandalwood tree, wealth to  the learned, and long life to the king.

संस्कृत श्लोक – 4

सर्वोषधीनामममृतं प्रधानं सर्वेषु सौख्येष्वशनं प्रधानम्।
सर्वेन्द्रियाणां नयनं प्रधानं सर्वेषु गात्रेषु शिरः प्रधानम्।।4।।

दोहा – 4

शुरच औषधि सुखन में, भोजन कहो प्रमान ।
चक्षु इन्द्रिय सब अंश में, शिर प्रधान भी जान ।।4।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य यहां वस्तु महत्ता बताते हुए कहते हैं कि सभी औषधियों में (गिलोय) प्रधान है।
सभी सुखों में भोजन प्रधान है। सभी इन्द्रियों में आंखें मुख्य हैं। सभी अंगों में सिर महत्त्वपूर्ण है।

English Meaning:- giloy is the best among medicines, eating good food is the best of all types of material happiness, the eye is the must needed among all senses organ, and the head occupies the chief position among all parts of the body.

संस्कृत श्लोक – 5

दूतो न सञ्चरित खे न चलेच्च वार्ता
पूर्वं न जल्पितमिदं न च संगमोऽस्ति। |
व्योम्निस्मिं रविशशिग्रहणं प्रशस्तं
जानाति यो द्विजवरः स कथं न विद्वान्।।5।।

दोहा – 4

दूत वचन गति । नहिं, नभ न आदि कहुँ कोय ।।
शशि रविण बखानु जो, नहिं न विदुष किमि होय ।।5।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य का कहना है कि आकाश में न तो कोई दूत ही जा सकता है, और न उससे कोई वार्ता ही हो सकती है, न तो पहले से किसी ने बताया है, और न ही वहां किसी से मिल ही सकते हैं। फिर भी विद्वान लोग सूर्य और चन्द्र ग्रहण के विषय में पहले ही बता देते हैं। ऐसे लोगों को कौन विद्वान नहीं कहेगा।

English Meaning:- No messenger can travel about in the sky and no message come from there. neither The voice of its residents so far never heard, any contact be established with them. Therefore the brahmana who predicts the eclipse of the sun and moon which occur in the sky must be considered as a scholars of great learning.

संस्कृत श्लोक – 6

विद्यार्थी सेवकः पान्थः क्षुधार्ता भयकातरः।
भाण्डारी च प्रतिहारी सप्तसुप्ता प्रबोधयेत।।6।।

दोहा – 6

दुवारपाल सेवक पथिक, समय क्षुधातर पाय ।।
भंडारी, विद्याथी, सोअत सात जणाय ।।6।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि विद्यार्थी, सेवक, पथिक, भूख से दुःखी, भयभीत, भंडारी, द्वारपाल इन सातों को सोते हुए से जगा देना चाहिए।

English Meaning:- The student, the servant, the traveller, the hungry  person, the frightened man, the treasury guard, and the watch man, these  seven ought to be awakened if they fall asleep.

संस्कृत श्लोक – 7

अहिं नृपं च शार्दूलं वराटं बालकं तथा।
परश्वानं च मूर्ख च सप्तसुप्तान्न बोधयेत्।।7।।

दोहा – 7

भूपति नृपति मुढमति, त्यों बरे ओ बाल ।
सावत सात जाइये, नहिं पर कूकर व्याल ।।7।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य का कहना है कि सांप, राजा, शेर, ततैया, बच्चा, दूसरे का कुत्ता तथा मूर्ख इनको सोए से नहीं जगाना चाहिए। अगर जाग गए तो नुकसान कर सकते हैं और पंहुंचा सकते हैं|

English Meaning:- The serpent, the king, the tiger, the stinging wasp, the small child,
the dog owned by other people, and the fool, these seven should not be  awakened from sleep.

संस्कृत श्लोक – 8

अर्थाधीताश्च यैर्वेदास्तथा शूद्रान्नभोजिनः।
ते द्विजाः किं करिष्यन्ति निर्विषा इव पन्नगाः।।8।।

दोहा – 8

अर्थहेत वेदहिं पढे, खाय शूद्र को धान ।
ते द्विवज क्या कर सकता हैं, बिन वि में व्याल समान ।।8।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य का कहते है कि धन कमाने के लिए’ वेदों का अध्ययन करने वाला, दुष्ट और चांडाल का अन्न खाने वाला ब्राह्मण विषहीन सांप के समान है,

अभिप्राय यह है कि वेदों का अध्ययन ज्ञान प्राप्त करने के लिए किया जाता है, किन्तु जो ब्राह्मण धन कमाने के लिए वेद पढ़ता है तथा दुष्टों के यहाँ अन्न खाता है, वह ब्राह्मण विषहीन सांप के समान होता है।

English Meaning:- those who study Vedas for earning wealth, and those who accept foodstuffs offered by evil and crooked one, what potential have they? They are just like serpents without fangs.

संस्कृत श्लोक – 9

यस्मिन् रुष्टे भयं नास्ति तुष्टे नैव धनागमः।
निग्रहोऽनुग्रहो नास्ति स रुष्टः किं करिष्यति।।9।।

दोहा – 9

रुष ट भये भय तुष ट में, नहीं धनागम सोय ।।
दण्ड सहाय न कर सके का रिसाय करु सोय ।।9।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य यहां कहते हैं कि जिसके नाराज होने पर कोई भय नहीं होता और न प्रसन्न होने पर धन ही मिलता है, जो किसी को दंड नहीं दे सकता तथा न किसी पर कृपा कर सकता है, ऐसा व्यक्ति नाराज होने पर क्या लेगा?

आशय यह है कि जो व्यक्ति किसी ऊंचे पद पर न हो और धनवान भी न हो, ऐसा व्यक्ति रूठ जाने पर किसी का क्या बिगाड़ लेगा और प्रसन्न हो जाने पर किसी को क्या देगा? ऐसे व्यक्ति का रूठना या खुश हो जाना कोई माने नहीं रखता।

English Meaning:- He who neither rouses fear by his anger, nor confers a favour when he is pleased can neither control nor protect. What can he do.

संस्कृत श्लोक – 10

निर्विषेणापि सर्पण कर्तव्या महती फणा।
विषमस्तु न वाप्यस्तु घटाटोपो भयंकरः।।10।।

दोहा – 10

बिन बि पहू के साँप सो, चाहिय फने बढाय ।।
होउ नहीं या होउ वि ष, घटाटोप भयदाय ।।10।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य यहां आडम्बर की चर्चा करते हुए कहते हैं कि विषहीन सांप को भी अपने फन को फैलाना ही चाहिए। विष हो या न हो, इससे लोगों को भय तो होता ही है।

आशय यह है कि चाहे सांप में विष हो या न हो, किन्तु उठे हुए सांप के फन को देखकर लोग डर अवश्य जाते हैं।
इसी प्रकार समाज में जीवित रहने के लिए व्यक्ति को कुछ दिखावा या क्रोध भी करना ही पड़ता है।

English Meaning:- He who neither rouses fear by his anger, nor confers a favour when he is pleased can neither control nor protect. What can he do.

संस्कृत श्लोक – 11

प्राप्त द्यूतप्रसंगेन मध्याह्ने स्त्रीप्रसंगतः।
रात्रौ चौरप्रसंगेन कालो गच्छति धीमताम्।।11।।

दोहा – 11

प्रातः द्युत प्रसंग से मध्य श्री परमं ।।
सायं चोर प्रसंग कह काल हे सब अड्का ।।११।।

हिंदी अर्थ:- महापुरुषों की जीवन चर्चा बताते हुए आचार्य चाणक्य कहते हैं कि विद्वानों का प्रातःकाल का समय जुए के प्रसंग (महाभारत की कथा) में बीतता है, दोपहर का समय स्त्री प्रसंग (रामायण की कथा) में बीतता है, रात्रि में उनका समय चोर प्रसंग (कृष्ण कथा) में बीतता है। यही महान् पुरुषों की जीवन चर्या होती है।

आशय यह है कि विद्वान मनुष्य प्रातःकाल जुए की कथा (महाभारत) का मनन पठन करते हैं। इस कथा से जुआ, छल-कपट आदि की बुराइयों का ज्ञान होता है। जिससे इन बुराइयों से व्यक्ति को दूर रहने की प्रेरणा मिलती है|

दोपहर में वे स्त्री कथा, अर्थात् रामायण का अध्ययन करते हैं। रामायण में रावण का स्त्री के प्रति आसक्ति का वर्णन है। यही आसक्ति रावण के विनाश का कारण बनी। इस कथा से शिक्षा मिलती है कि व्यक्ति को इन्द्रियों का दास नहीं बनना चाहिए। इन्द्रियों का दास बनकर परायी स्त्री पर बुरी नजर डालने से ही रावण का नाश हुआ था।

रात्रि में महापुरुष भगवान कृष्ण की कथा का अध्ययन करते हैं। कृष्ण के जीवन से मनुष्य यह समझ सकता है की इस संसार में रहते हुए भी हमें इससे आसक्ति नहीं रखनी चाहिए|

तात्पर्य यह है कि महापुरुषों की दिनचर्या एक नियमित समय सारिणी के अनुसार चलती है। वे सदा ज्ञान प्राप्त करने में लगे रहते हैं।

English Meaning:- Hence Chanakya Pandits advises wise persons to spend the morning absorbed in Mahabharata, that educates the bad impact of gambling the afternoon studying Ramayana, where one can learn that lust towards the other woman results in the destruction and the evening devotedly hearing the Srimad-Bhagavatam, where we can learn the objective of life in true sense.

संस्कृत श्लोक – 12

स्वहस्तग्रथिता माला स्वहस्तघृष्टचन्दनम्।
स्वहस्तलिखितस्तोत्रं शक्रस्यापि श्रियं हरेत्।।2।।

दोहा – 12

सुमन माल निजकर रचित, खलिखित पुस्तक पाठ ।
धन इन्द्वहु नाश दिये, खघसित चन्दन काठ ।।१२।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य का कहना है कि यदि भगवान् के लिए अपने हाथ से गुंथी माला, अपने हाथ से घिसा चन्दन तथा स्वयं अपने हाथों से लिखा स्तोत्र भगवन के लिए पढ़े तो आपको इन्द्र के सामान वैभव प्राप्त होगा|

English Meaning:- By preparing a garland for a Deity with one’s own hand, by grinding sandal paste for the god with one’s own hand, and by writing sacred texts with one’s own hand, one becomes blessed as equal to that of Indra.

संस्कृत श्लोक – 13

इक्षुदण्डास्तिलाः शूद्रा कान्ताकाञ्चनमेदिनी।
चन्दनं दधि ताम्बूलं मर्दनं गुणवधर्मनम्।।13।।

दोहा – 13

ऊख शूद्र दधि नायिका, हेम मेदिनी पान ।
तल चढ्न इन नवनको, मर्दनही शूण जान ।।१३।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य यहां दबाए जाने की गणवत्ता प्रतिपादित करते हुए कहते हैं कि ईंख, तिल, शूद्र, पत्नी, सोना, पृथ्वी, चन्दन, दही तथा ताम्बूल (पान) इनके प्रयोग से ही इनके गुण बढ़ते हैं।

आशय यह है कि गन्ने को और तिलों को कुचल का इनका रस निकलने से, सेवक से सेवा करवाने से, स्त्री से संभोग करने से, सोने को पीटे जाने से, पृथ्वी में परिश्रम करने से, चन्दन को घिसे जाने से, दही को मथे जाने से और पान को चबाने से ही इन सबके गुण बढ़ते हैं।

English Meaning:-

संस्कृत श्लोक – 14

दरिद्रता धीरतया विराजते, कुवस्त्रता स्वच्छतया विराजते।
कदन्नता चोष्णतया विराजते कुरूपता शीलतया विराजते।।14।। 

दोहा – 14

दारिद सोहत धीरते, कुपट सुभाता पाय ।।
लहि कुअन्न उष्यात्व को, शील कुरूप सुहाय ।।14।।

हिंदी अर्थ :- आचार्य चाणक्य चर्चा करते हुए कहते हैं। कि धीरज-गंभीर रहने से निर्धनता भी सुंदर लगती है, साफ सुथरे रहने पर साधारण वस्त्र भी अच्छे लगते हैं, गर्म किए जाने पर बासी भोजन भी सुन्दर और स्वादिष्ट लगता है| और यदि कुरूप व्यक्ति अच्छे आचरण एवं स्वभाव वाला हो, तो सभी उससे प्रेम करते हैं।

English Meaning:-

आशा करते हैं चाणक्य नीति अध्याय 9 का ज्ञान (Chanakya Niti Chapter 9 in Hindi and English) आपके सामाजिक जीवन में अवश्य ही सकारात्मक परिवर्तन लेके आएगा|

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चाणक्य निति पंचम अध्याय अर्थ सहित

 

 

 

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