Chanakya Niti Chapter 6 Hindi English | चाणक्य नीति छठवाँ अध्याय अर्थ सहित

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Chanakya Niti Chapter 6 with Meaning in Hindi English

Chanakya Niti chapter 6 shlokas with meaning in Hindi English | चाणक्य नीति छठवाँ अध्याय श्लोक हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित

दोस्तो, चाणक्य का नाम भारतीय इतिहास में एक प्रसिद्द शिक्षक और कूटनीतिज्ञ के रूप में मशहूर है| चाणक्य कोटिल्य के नाम से भी प्रसिद्द हैं|

इन्होने अपने जीवन के अनुभव के आधार पर विभिन्न धर्म ग्रंथों में से प्रमुख श्लोकों का संग्रह किया| यह श्लोक मनुष्य के राजनीती और समाजिक जीवन से सरोकार रखते हैं|

आप भी इस ज्ञान में दुबकी लगाएं| आज यहाँ चाणक्य नीति के छठवाँ अध्याय (Chanakya Niti Chapter 6 with meaning in Hindi English) की चर्चा करेंगे|

Chanakya Niti Chapter 6 with Meaning in Hindi English (1-10)

चाणक्य  नीति छठवाँ अध्याय हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित

संस्कृत श्लोक – 1

श्रुत्वा धर्म विजानाति श्रुत्वा त्यजति दुर्मतिम्।
श्रुत्वा ज्ञानमवाप्नोति श्रुत्वा मोक्षमवाप्नुयात्।।1।।

दोहा – 1

सुनिके जाने धर्म को, सुनि दुर्बुधि तजि देत ।
सुनिके पावत ज्ञानहू, सुनहुँ मोक्षपद लेत ।।१।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि सुनकर ही मनुष्य को अपने धर्म का ज्ञान होता है, सुनकर ही वह दुर्बुद्धि का त्याग करता है। सुनकर ही उसे ज्ञान प्राप्त होता है और सुनकर ही मोक्ष मिलता है।

अभिप्राय यह है कि अपने पूज्य लोगों या महापुरुषों के मुंह से सुनकर ही मनुष्य को अपने धर्म, अर्थात् कर्तव्य का ज्ञान होता है, जिससे वह पतन के मार्ग पर ले जानेवाले कार्य को त्याग देता है। सुनकर ही ज्ञान तथा मोक्ष भी मिलता है।

English Meaning:- By means of hearing one understands dharma, malignity (hatred) vanishes, knowledge is acquired, and liberation from material bondage is gained.

संस्कृत श्लोक – 2

पक्षीणां काकश्चाण्डाल पशूनां चैव कुक्कुरः।
मुनीनां पापश्चाण्डालः सर्वेषु निन्दकः।।2।।

दोहा – 2

वायस पक्षिन पशुन महँ, श्वान अहै चंडाल ।।
मुनियन में जेहि पाप उर, सबमें निन्दक काल ।।२।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य चांडाल (नीच) के बारे में बताते हुए कह रहे हैं कि पक्षियों में कौआ, पशुओं में कुत्ता, मुनियों में पापी तथा निन्दक सभी प्राणियों में चाण्डाल होता है।

अभिप्राय यह है कि पक्षियों में कौए को चाण्डाल समझना चाहिए। पशुओं में कुत्ते को तथा मुनियों में पापी को चाण्डाल मानना चाहिए।

लेकिन दूसरों की बुराई करनेवाला व्यक्ति पक्षियों, पशुओं तथा मनुष्यों में भी सबसे बड़ा चाण्डाल माना जाता है। अर्थात् निन्दक चाण्डालों का भी चाण्डाल होता है |

क्योंकि जो व्यक्ति किसी की निंदा करता है, इसका दंड निन्दक को ही भुगतना पड़ता है। अतः अच्छा है कि निंदा की प्रवृत्ति से बचें।

मनुष्य की यह सबसे बड़ी कमजोरी है कि वह निन्दा में अधिक रस लेता है। इसमें समय नष्ट होने के अतिरिक्त कुछ हाथ नहीं आता।

English Meaning:- Among birds the crow is vile; among animal the dog; the ascetic whose sins is abominable, but he who blasphemes others is the worst vile.

संस्कृत श्लोक – 3

भस्मना शुद्ध्यते कांस्यं ताम्रमम्लेन शुद्ध्यति।
रजसा शुद्ध्यते नारी नदी वेगेन शुद्ध्यति।।3।।

दोहा – 3

कॉस होत शुचि भस्म ते, ताम्र खटाई थोड़।
रजोधर्म ते नारि शुचि, नदी वेळा ते होई ।।3।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य शुद्धि की चर्चा करते हुए कहते हैं कि कांसा भस्म से शुद्ध होता है, तांबा अम्ल (खटाई) से, नारी रजस्वला होने से तथा नदी अपने वेग से शुद्ध होती है।

English Meaning:- Brass is polished by ashes, copper is cleaned by tamarind, a woman, by her menses; and a river by its flow.

संस्कृत श्लोक – 4

भ्रमन्सम्पूज्यते राजा भ्रमन्सम्पूज्यते द्विजः।
भ्रमन्सम्पूज्यते योगी स्त्री भ्रमती विनश्यति।।4।।

दोहा – 4

पूजे जाते भ्रमण से, द्विज योगी ओ भूप ।
भ्रमण किये नारी नौ, ऐसी नीति अनूप ।।4।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य भ्रमण के महत्त्व को बताते हैं और कहते हैं कि भ्रमण करता हुआ राजा पूजा जाता है, भ्रमण करता हुआ ब्राह्मण पूजा जाता है, भ्रमण करता हुआ योगी पूजा जाता है और भ्रमण करती हुई स्त्री नष्ट हो जाती है।

English Meaning:- The king, the brahmana, and the ascetic yogi who go on excursion and wanders are respected, but the woman who wanders is utterly ruined.

संस्कृत श्लोक – 5

यस्यार्थास्तस्य मित्राणि यस्यार्थास्तस्य बान्धवाः।
यस्यार्थाः स पुमांल्लोके यस्यार्थाः स च पण्डितः।।5।।

दोहा – 5

मित्र ओर है बन्धु तेहि, सोइ पुरुष बाण जात ।
धन है जाके पास में, पण्डित सोइ कहात ।।5।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य धन की गुणवत्ता की चर्चा करते हुए कहते हैं कि जिस व्यक्ति के धन है पैसा है, लोग आसानी से उसके मित्र बन जाते हैं, बंधु-बांधव भी सम्मान देते हैं।

जो धनवान है उसी को आज के युग में विद्वान और सम्मानित व्यक्ति माना जाता है। धनवान व्यक्ति को ही विद्वान और ज्ञानवान भी समझा जाता है।

वस्तुतः सैकड़ों वर्ष पूर्व आचार्य चाणक्य द्वारा कही गई यह बात आज के युग में पूरी तरह सत्य सिद्ध हो रही है। यह देखा गया है कि जिसके पास धन नहीं होता, मित्र-बन्धुगण उससे मुंह मोड़ लेते हैं|

बन्धु-बान्धव मित्र और सगे सम्बन्धी उसका त्याग कर देते हैं। यहां तक कि निर्धन व्यक्ति को इंसान भी नहीं समझा जाता है|

English Meaning:- He who has wealth has friends. He who is wealthy has relatives. The rich one alone is called a man, and the wealthy alone are respected as pandits.

संस्कृत श्लोक – 6

तादृशी जायते बुद्धिर्व्यवसायोऽपि तादृशः।
सहायास्तादृशा एव यादृशी भवितव्यता।।6।।

दोहा – 6

तैसोई मति होत है, तैसोई व्यवसाय ।
होनहार जैसी है, तैसोइ मिलत सहाय ।।६।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य यहां भाग्य को महत्त्व देते हुए बुद्धि और भाग्य के बीच संम्बंध को बताते हुए कहते हैं कि मनुष्य जैसा भाग्य लेकर आता है उसकी बुद्धि भी उसी के समान बन जाती है, कार्य-व्यापार भी उसी के अनुरूप मिलता है।

उसके सहयोगी, संगी-साथी भी उसके भाग्य के अनुरूप ही होते हैं। सारा क्रियाकलाप भाग्यानुसार ही संचालित होता है।

कहने का अभिप्राय यह है कि मनुष्य की होनी प्रबल है। जो होना है। वह होकर रहेगा। इसलिए कई बार मनुष्य द्वारा सोची हुई बातें, उसकी कुशलता और उसके प्रयास सब बेकार हो जाते हैं।

English Meaning:- Chanakya says life of Human Being is controlled by fate given by almighty. According to that one’s intellect work, so is his business and friends surround him. Everything happen according to the fate.

संस्कृत श्लोक – 7

कालः पचति भूतानि कालः संहरते प्रजाः।
कालः सुप्तेषु जागर्ति कालो हि दुरतिक्रमः।।7।।

दोहा – 7

काल पचावत जीव सब, करत प्रजन संहार।
सबके सोयर जायितु, काल टरे नहिं टार।।७।।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य यहां काल (समय) के प्रभाव की चर्चा करते हुए कहते हैं कि काल ही प्राणियों को निगल जाता है। काल सृष्टि का विनाश कर
देता है। यह प्राणियों के सो जाने पर भी उनमें विद्यमान रहता है। इसका कोई भी अतिक्रमण नहीं कर सकता।

भाव यह है कि काल (समय) सबसे बलवान है। समय धीरे-धीरे सभी प्राणियों और सारे संसार को भी निगल जाता है। प्राणियों के सो जाने पर
भी समय चलता रहता है। प्रतिपल उनकी उम्र कम होती रहती है। इ

से कोई नहीं टाल सकता, क्योंकि काल के प्रभाव से बचना व्यक्ति के लिए संभव नहीं है। चाहे योग-साधन किए जाएं अथवा वैज्ञानिक उपायों का सहारा लिया जाए तो भी काल के प्रभाव को हटाया नहीं जा सकता।

समय का प्रभाव तो हर वस्तु पर पड़ता ही है। शरीर निर्बल हो जाता है, वस्तुएं जीर्ण और क्षरित हो जाती हैं।

English Meaning:- Time eats all living beings as well as kills them, it alone is awake when all others are asleep. Time is insurmountable.

संस्कृत श्लोक – 8

नैव पश्यति जन्मान्धः कामान्धो नैव पश्यति।
मदोन्मत्ता न पश्यन्ति अर्थी दोषं न पश्यति।।8।।

दोहा – 8

जन्म अन्ध देखे नहीं, काम अन्ध नहिं जान ।।
तैसोई मद अन्ध है, अर्थी दोष न मान ।।8।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य करते हैं कि जैसे जन्म से अँधा कुछ नहीं देख सकता। उसी प्रकार काम वासना से भरा हुआ और नशे में पागल बना व्यक्ति भी कुछ नहीं देखता।

स्वार्थी व्यक्ति भी किसी में कोई दोष नहीं देखता। अर्थार्थ, काम वासना, नशे और स्वार्थ से भरा हुआ व्यक्ति भी एक नेत्रहीन के समान ही है

English Meaning:- Those born blind cannot see, similarly persons filled with lust, intoxicatio, selfishness is also no more than a blind.

संस्कृत श्लोक – 9

स्वयं कर्म कोत्यात्मा स्वयं तत्फलमश्नुते।
स्वयं भ्रमति संसारे स्वयं तस्माद्विमुच्यते।।9।।

दोहा – 9

जीव कम आपे करै, भोकात फलहू आप।
आप भ्रमत संसार में, मुक्ति लहत है आप ।।९।।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य यहां कर्म-फल के प्रभाव को स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि प्राणी स्वयं कर्म करता है और स्वयं उसका फल भोगता है। स्वयं संसार में भटकता है और स्वयं इससे मुक्त हो जाता है।

भाव यह है कि मनुष्य स्वयं कर्म करता है। कर्मों के ही आधार पर उसे अच्छा या बुरा फल मिलता है। इन फलों के आधार पर ही संसार में उसका बार-बार जन्म होता है और बार-बार मृत्यु होती है।

अच्छे कर्म होने पर दूसरे जन्म में सुख तथा बुरे कर्म होने पर दुःख मिलते हैं। बारबार जन्म-मृत्यु का यह चक्कर ही संसार में भटकना है।

इन सबका सामना प्राणी को स्वयं करना पड़ता है। जब कभी जाकर उसे ज्ञान होता है तो वह स्वयं ही इस चक्कर से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है।

English Meaning:- The spirit soul goes through his own course of karma and he himself suffers the good and bad results thereby accrued.

By his own actions he entangles himself in this life cycle of death and rebirth, and at last by his own efforts and experiences, he freed himself from it and never rebirth.

संस्कृत श्लोक – 10

राजा राष्ट्रकृतं पापं राज्ञः पापं पुरोहितः।
भर्ता च स्त्रीकृतं पापं शिष्य पाप गुरुस्तथा।।10।।

दोहा – 10

प्रजापाप नृप भोशियत, प्रेरित नृप को पाप ।।
तिय पातक पति शिष्य को, शुरु भोगत है आप ।।१०।।

हिन्दी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कर्म के प्रभाव की चर्चा करते हुए कहते हैं कि राष्ट्र द्वारा किए गए पाप को राजा भोगता है। राजा के पाप को उसका पुरोहित, पत्नी के पाप को पति तथा शिष्य के पाप को गुरु भोगता है|

क्योंकि देखा जाये तो इसका सीधा सम्बन्ध राजा द्वारा अपने कर्तव्यपालन न करने से है।

राजा यदि अपने राज्य में कर्तव्यपालन नहीं करता और उदासीन रहता है तो वहां पाप-वृत्तियां बढ़ती हैं, अराजकता आ जाती है, उसका दोष राजा को नियंत्रित रखने का दायित्व उन्हीं का है।

इसी प्रकार पति का कर्तव्य है कि पत्नी को पापकर्म की ओर प्रेरित न होने दे, उसे अपने नियन्त्रण में रखे। पत्नी यदि कोई गलत काम करती है तो उसका फल अथवा परिणाम पति को ही भोगना पड़ता है।

इसी प्रकार गुरु का कर्तव्य है कि शिष्य का सही मार्गदर्शन करे, उसे सत्कर्मों की ओर प्रेरित करे। यदि वह अपने इस कर्तव्य के प्रति सावधान न हीं रहता और शिष्य पापकर्म में प्रवृत्त होता है तो उसका दोष गुरु के सिर पर मढ़ा जाता है।

राजा, पुरोहित और पति का कर्तव्य है कि वे प्रजा, राजा, पत्नी व शिष्य को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करें।

English Meaning:- The king has to bear the sins of his subjects; the purohit (priest) bears and sufferes for those of the king; a husband suffers for those of his wife; and the guru bears for those of his pupils.

Chanakya Niti Chapter 6 with Meaning in Hindi English (11-21)

संस्कृत श्लोक – 11

ऋणकर्ता पिता शत्रुर्माता च व्यभिचारिणी।
भार्या रूपवती शत्रुः पुत्र शत्रुर्न पण्डितः।।11।।

दोहा – 11

अरणकर्ता पितु शत्रु, पर-पुरुषशामिनी मत । |
रूपवती तिय शत्रु है, पुत्र अपडित जात ।।11।।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य यहां शत्रु के स्वरूप की चर्चा करते हुए कहते हैं कि ऋण करने वाला पिता शत्रु होता है। व्यभिचारिणी मां भी शत्रु होती है। रूपवती पत्नी शत्रु होती है तथा मूर्ख पुत्र शत्रु होता है।

वस्तुतः कर्जा लेकर घर का खर्च चलाने वाला पिता शत्रु होता है, क्योंकि उसके मर जाने पर उस कर्ज का बोझ सन्तान पर आ जाता है।

व्यभिचारिणी मां भी शत्रु के रूप में निन्दनीय है और संतान के लिए मुसीबत है, क्योंकि वह धर्म से गिरकर पिता और पति के कुल को कलंकित करती है।

इसी प्रकार जो स्त्री अपने सौन्दर्य का अभिमान करके पति की उपेक्षा करती है, उसे भी शत्रु ही मानना चाहिए। क्योंकि वह कर्तव्यविमुख हो जाती है।

मूर्ख पुत्र भी कुल का कलंक होता है। वह भी त्याज्य है। इसलिए अपने उद्यम से परिवार का निर्वाह करनेवाला पिता, पतिव्रता माता और अपने रूप और सौन्दर्य के प्रति अहंकार न रखनेवाली स्त्री और विद्वान पुत्र ही हितकारी होते हैं।

English Meaning:- A father who is a chronic debtor, an adulterous mother, a beautiful wife, and an unlearned son are enemies.

संस्कृत श्लोक – 12

लुब्धमर्थेन गृह्णीयात्स्तब्धमंजलिकर्मणा।
मूर्खश्छन्दानुरोधेन यथार्थवादेन पण्डितम्।।2।।

दोहा – 12

धन लोभी वश करे. विहिं जोरि खपान ।
मूरख के अनुसरि चले, बुध जन सत्य कहान ।।12।।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य किसी को भी मोहित करने के मन्त्र के बारे में बताते हैं कि लालची को धन देकर, अहंकारी को हाथ जोड़कर, मूर्ख को उपदेश देकर तथा पंडित को यथार्थ बात बताकर वश में करना चाहिए।

अर्थार्थ लालची व्यक्ति को धन और अहंकारी देकर के सामने हाथ जोड़कर, अपना काम कराया जा सकता है। मूर्ख व्यक्ति को केवल समझा-बुझाकर ही वश में किया जा सकता है। विद्वान व्यक्ति से सत्य बात कहनी चाहिए, उन्हें स्पष्ट बोलकर ही वश में किया जा सकता है।

English Meaning:- Control a greedy man by means of a gift, an arrogant man with folded hands in salutation, a fool by humouring him, and a learned man by truthful words.

संस्कृत श्लोक – 13

कुराजराज्येन कुतः प्रजासुखं कुमित्रमित्रेण कुतोऽभिनिवृत्तिः।
कुदारदारैश्च कुतो गृहे रतिः कृशिष्यमध्यापयतः कुतो यशः।।3।।

दोहा – 13

नहिं कुराज बिनु राज भल, त्यों कुमीतहू मीत ।
शिष्य बिना बरु है भलो, त्यों कुदार कहू जीत ।।13।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य कहते हैं कि दुष्ट राजा के राज्य में प्रजा सुखी कैसे रह सकती है। दुष्ट मित्र और मूर्ख शिष्यसे आनंद कैसे मिल सकता है। दुष्ट पत्नी से घर में सुख कैसे हो सकता है,

English Meaning:- No one can live happily under a crooked king better to be without a friend than to befriend a rascal; better to be without a disciple than to have a stupid one; and better to be without a wife than to have a bad one.

संस्कृत श्लोक – 14

सिंहादेकं बकादेकं शिक्षेच्चत्वारि कुक्कुटात्।
वायसात्पंच शिक्षेच्च षट् शुनस्त्रीणि गर्दभात्।।14।।

दोहा – 14

एक सिंह एक बकन से, अरु मूळ ते चारि।।
काक पंच षट् खान ते, गर्दभ ते शुन तारि।।15।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य सीखने की बात, किसी भी पात्र से सीखने का पक्ष रखते हुए कहते हैं कि सिंह से एक, बगुले से एक, मुर्गे से चार, कौए से पांच, कुत्ते से छः तथा गधे से सात बातें सीखनी चाहिए |

चाणक्य ने बताया है कि सीखने को तो किसी से भी मनुष्य कुछ भी सीख सकता है, पर इसमें भी मनुष्य जिनसे कुछ गुण सीख सकता है उनमें उसे शेर और बगुले से एक-एक, गधे से तीन, मुर्गे से चार, कौए से पांच और कुत्ते से छः गुण सीखने
चाहिए।

इसका मूल भाव यह है कि व्यक्ति को जहां से भी कोई अच्छी बात मिले, सीखने में संकोच नहीं करना चाहिए। यदि नीच व्यक्ति के पास भी कोई गुण है तो उसे भी ग्रहण करने का यत्न करना चाहिए।

English Meaning:- Learn one thing from a lion; one from a crane; four from a cock; five from a crow; six from a dog; and three from an ass.

संस्कृत श्लोक – 15

प्रभूतं कार्यमपि वा तत्परः प्रकर्तुमिच्छति।
सर्वारम्भेण तत्कार्यं सिंहादेकं प्रचक्षते।।15।।

अति उन्नत कारज कछ. क्रिय चाहत नर कोय ।
करे अनन्त प्रयत्न तें, आहत सिंह गुण सोय ।।१६।।

दोहा – 15

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य शेर से ली जाने वाली सीख के बारे में बता रहे हैं कि छोटा हो या बड़ा, जो भी काम करना चाहें, उसे अपनी पूरी शक्ति लगाकर करें? यह गुण हमें शेर से सीखना चाहिए। |

अर्थार्थ, भाव यह है कि शेर जो भी काम करता है, उसमें अपनी पूरी शक्ति लगा देता है। अतः जो भी काम करना हो उसमें पूरे जी-जान से जुट जाना चाहिए।

English Meaning:- The one excellent thing that can be learned from a lion is that whatever a man intends to do, should be done by him with a whole-hearted and with 100% effort.

संस्कृत श्लोक – 16

इन्द्रियाणि च संयम्य बकवत्पण्डितो नरः।
देशकाल बलं ज्ञात्वा सर्वकार्याणि साधयेत्।।16।।

दोहा – 16

देशकाल बल जानिके, हि इन्द्रिय को थाम ।
बस जैसे पण्डित पुरुष, कारज करहिं समान ।।१७।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य बगुले से सीख के बारे में बता रहे हैं। बगुले के समान इन्द्रियों को वश में करके देश, काल एवं बल को जानकर विद्वान अपना कार्य सफल करें। |

भाव यह है कि बगुला सब कुछ भूलकर एकटक मछली को ही देखता रहता है और मौका लगते ही उसे झपट लेता है। मनुष्य को भी काम करते समय अन्य सब बातों को भूलकर केवल देश, काल और बल का विचार करना चाहिए।

इस देश-स्थान पर इस काम को करने से क्या लाभ होगा? यहां इस वस्तु की कितनी मांग है? इत्यादि पर विचार करना देश-स्थान पर विचार करना है।

काल-समय, कौन-सा समय किस काम के लिए अनुकूल होगा| तथा बल-मेरी शक्ति कितनी है, मेरे पास कितना पैसा या अन्य साधन कितने हैं?

इन सब बातों पर काम आरम्भ करने से पहले विचार कर लेना चाहिए।

English Menaing:- The wise man should restrain his senses like the crane and accomplish his purpose with due knowledge of his place, time and ability.

संस्कृत श्लोक – 17

सुश्रान्तोऽपि बृहद् भारं शीतोष्णं न पश्यति।
सन्तुष्टश्चरतो नित्यं त्रीणि शिक्षेच्च गर्दभात्।।17।।

दोहा – 17

भार बहुत ताकत नहीं, शीत उष्ण सम जाहि।।
हिये अधिक सन्तोष शून, अदभ तीनिहाहि ।।17।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य गधे से सीखे जाने वाले गुणों की चर्चा करते हुए कहते हैं कि श्रेष्ठ और विद्वान व्यक्तियों को चाहिए कि वे गधे से तीन गुण सीखें।

जिस प्रकार अत्यधिक थका होने पर भी वह बोझ ढोता रहता है, उसी प्रकार बुद्धिमान व्यक्ति को भी आलस्य न करके अपने लक्ष्य की प्राप्ति और
सिद्धि के लिए सदैव प्रयत्न करते रहना चाहिए, कर्तव्यपथ से कभी विमुख नहीं होना चाहिए।

कार्यसिद्धि में ऋतुओं के सर्द और गर्म होने की भी चिन्ता नहीं करनी चाहिए।

जिस प्रकार गधा सन्तुष्ट होकर जहां-तहां चर लेता है, उसी प्रकार बुद्धिमान व्यक्ति को भी सदा संतोष रखकर, फल की
चिन्ता किए बिना, यथावत् कर्म में प्रवृत्त रहना चाहिए।

English Meaning:- Although an ass is tired, he continues to carry his burden; he is unmindful of cold and heat; and he is always contented; these three things should be learned from the ass.

संस्कृत श्लोक – 18

प्रत्युत्थानं च युद्धं च संविभागश्च बन्धुषु।
स्वयमाक्रम्य भोक्तं च शिक्षेच्चत्वारि कुक्कुटाच्च।।18।।

दोहा – 18

प्रथम उठे रण में जुरे, बन्धु विभाहिं देत ।
खोपार्जित भोजन करै, कुक्कुट शुन चहुँ लेत ।।१८।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य मुर्गे से सीखने योग्य चार महत्त्वपूर्ण बातों की चर्चा करते हुए कह रहे हैं कि समय पर जागना, लड़ना, भाईयों के साथ भगा देना और उनका हिस्सा स्वयं झपटकर खा जाना, ये चार बातें मुर्गे से सीखें।

उनका कहना है कि मुर्गे की चार विशेषताएं हैं-तड़के उठ जाना, अन्य मुर्गों से लड़ना, उन्हें झपटकर भगा देना तथा उनका हिस्सा स्वयं खा जाना।

मुर्गे से यही चार बातें सीखनी चाहिए और व्यक्ति के जीवन में इनका महत्त्व मानवीय दृष्टि से मूल्यवान है।

English Meaning:- To wake at the proper time, to take a bold stand and fight, to make a fair division (of property) among relations; and to earn one’s own bread by personal exertion are the four excellent things to be learned from a cock.

संस्कृत श्लोक – 19

गूढ़ मैथुनकारित्वं काले काले च संग्रहम्।
अप्रमत्तवचनमविश्वासं पंच शिक्षेच्च वायसात्।।19।।

दोहा – 19

अधिक ढीठ अरु शूढ रति, समय सुआलय संच।।
नहिं विश्वास प्रमाद जेहि, गहू वायस शुन पंच ।।१९।।।

हिंदी अर्थ:- कौए से सीखाने योग्य बातों की चर्चा करते हुए आचार्य कहते हैं कि छिपकर मैथुन करना, समय-समय पर संग्रह करना, सावधान रहना, किसी पर विश्वास न करना और आवाज देकर औरों को भी इकट्ठा कर लेना, ये पांच गुण कौए से सीखें।

आशय यह है कि व्यक्ति को भी कुछ कार्य कौए के समान करने चाहिए। जैसे कौआ सदा छिपकर मैथुन करता है क्योंकि यह क्रिया नितान्त व्यक्तिगत होती है, छोटी-मोटी चीजें अपने घोंसले में एकत्रित करता रहता है ताकि समय पर दूसरे का मुंह न ताकना पड़े।

सदा चौकन्ना रहता है। कांव-कांव करता हुआ अपने अन्य साथियों को भी आवश्यकता पड़ने पर बुला लेता है। कभी किसी पर विश्वास नहीं करता, क्योंकि जांच-परखकर विश्वास से छल की संभावना नहीं रहती। इन गुणों को कौए से सीखना चाहिए।

English Meaning:- Intercourse in privacy (with one’s wife), boldness, storing useful items, watchfulness, and not easily trusting others, these five things are to be learned from a crow.

संस्कृत श्लोक – 20

वह्वशी स्वल्पसन्तुष्टः सुनिद्रो लघुचेतनः।
स्वामिभक्तश्च शूरश्च षडेते श्वानतो गुणाः।।20।।

दोहा – 20

बहु मुख थोरेहु तो अति, सोवहि शीघ्र जगात ।।
खामिभक्त बड बीरता, अट्न खाननहात ।।२०।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य यहां संतोष, सतर्कता और स्वामिभक्ति की चर्चा करते हुए कुत्ते के संदर्भ में इन गुणों का बखान करते हुए इनकी आवश्यकता की दृष्टि से कहते हैं कि अधिक भूखा होने पर भी थोड़े में ही संतोष कर लेना, गहरी नींद में होने पर भी सतर्क रहना, स्वामिभक्त होना और वीरता-ये छ: गुण कुत्ते से सीखने चाहिए।

आशय यह है कि कुत्ता कितना ही भूखा क्यों न हो, उसे जितना मिल जाए, उसी में सन्तोष कर लेता है। साथ ही उसे जितना खिला दो, वह सब खा जाता है।

थोड़ी ही देर में उसे गहरी नींद आ जाती है। किन्तु गहरी नींद में भी वह थोड़ी-सी आहट पाते ही जाग जाता है। मालिक के साथ वफादारी और बहादुरी से किसी पर झपट पड़ना भी कुत्ते की आदत हैं। कुत्ते से इन्हीं छः गुणों को सीखना चाहिए। शिक्षा संबल बनाती है।

English Meaning:- Contentment with little or nothing to eat even it one may have a great appetite, to awaken instantly although one may be in a deep sleep, unconditional devotion to the master, and bravery, these six qualities should be learned from the dog.

संस्कृत श्लोक – 21

य एतान् विंशतिगुणानाचरिष्यति मानवः।
कार्याऽवस्थासु सर्वासु अजेयः स भविष्यति।।21।।

दोहा – 21

विंशति सीख विचारि यह, जो नर उर धारंत ।
सो सब नर जीवित अबसि, जय यश जात लहत ।।२२।।

हिंदी अर्थ:- यहां आचार्य चाणक्य व्यक्ति के सफल काम होने की चर्चा करते हुए कहते हैं कि जो मनुष्य इन बीस गुणों को अपने जीवन में धारण करेगा, वह सब कार्यों और सब मनोरथों में विजयी होगा।

भाव यह है कि इन बीस गुणों को अलग अलग पशुओं से सीखने का अभिप्राय मनुष्य को साहसी, अभिमान रहित और दृढ़निश्चयी बनाता है, साथ ही जीवन में अच्छे गुणों का आव्हान करता है तथा दुर्गुणों को छोड़कर एक सामाजिक रूप से सफल व्यक्ति बनने को और अग्रसर होता है|

English Meaning:- He who shall practice these twenty virtues shall become invincible in
all his undertakings.

आशा करते हैं चाणक्य नीति के छठवां अध्याय हिंदी अर्थ सहित (Chanakya Niti Chapter 6 in Hindi English)

आपके जीवन में अवश्य सकारात्मक परिवर्तन लाएगा|

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