Chanakya Niti Chapter 14 Hindi English | चाणक्य नीति चौदहवां अध्याय अर्थ सहित

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Chanakya Niti Chapter 14 in Hindi English

Chanakya Niti Fourteenth 14th Chapter 14 shlokas meaning in Hindi English | चाणक्य नीति चौदहवां अध्याय हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित

दोस्तो, आज हम चाणक्य नीति चौदहवां अध्याय का हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित (chanakya niti chapter 14 in Hindi and English ) विस्तार से अध्ययन करेंगे|

आशा करते हैं इससे आपके जीवन में अवश्य ही सकारात्मक परिवर्तन आएगा|

Chanakya Niti Chapter 14 in Hindi and English

चाणक्य नीति चौदहवां अध्याय हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित

संस्कृत श्लोक – 1

पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि अन्नमापः सुभाषितम्।
मूढः पाषाणखंडेषु रत्नसंज्ञा विधीयते।।1।।

दोहा – 1

निर्धनत्व दुःख बन्ध और विपत्ति सात ।।
है खकर्म वृक्ष जात ये फलै थरेक गात ।।1।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं, इस प्रथ्वी पर केवल तीन ही रत्न हैं, अन्न जल और मधुर वचन, मूर्खों ने पत्थर के टुकड़ों को रत्न बना दिया है| जीवन यापन के लिए अन्न जल की ही आवश्यकता है, रत्न हीरे पन्ने आपकी भूंख और प्यास को नहीं बुझा सकते हैं और इस समाज में रहने के लिए मधुर वचनों की जरुरत है|

English Meaning:- Chanakya says food, water and Melodious words are only three precious stones on this earth. But foolish on this earth has proclaimed stones like diamond the precious one.

संस्कृत श्लोक – 2

आत्मापराधवृक्षस्य फलान्येतानि देहिनाम्।
दारिद्र्यरोग दुःखानि बन्धनव्यसनानिच।।2।।

दोहा – 2

निर्धनत्व दुःख बन्ध और विपत्ति सात ।।
है खकर्म वृक्ष जात ये फलै थरेक गात ।।2।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं, दरिद्रता, रोग, दुःख बंधन और बुरी आदतें ये सभी मनुष्य के स्वयं के ही कर्मों के फल हैं| जो जैसा काम करता है उसे वैसा ही फल भी मिलता है| इसलिए सदा अच्छे कर्म ही करने चाहिए|

English Meaning:- Disease, Poetry, sorrow and Bad habits are the fuits of own bad deed and sins.

संस्कृत श्लोक – 3

पुनर्वित्तं पुनर्मित्रं पुनर्भार्या पुनर्मही।
एतत्सर्वं पुनर्लभ्यं न शरीरं पुनः पुनः।।3।।

दोहा – 3

फेरि वित्त फेरि मित्त, फेरि तो धराहु नित्त ।।
फेरि फेरि सर्व एह, ये मानुषी मिले न देह ।।3।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं, मानव शारीर का महत्व बताते हुए कहते हैं, की व्यक्ति अपने जीवन में गवायाँ हुआ धन, रूठा हुआ मित्र, हाथ से गई हुई पत्नी, छीनी हुई जमीन, तो वापस पा सकता है लेकिन एक बार यह जीवन और शरीर हाथ से चला जाए तो वापस मिलना मुश्किल है| चाणक्य ने जीवन और मानव शारीर को सर्वोपरि माना है|

English Meaning:- Chanakya says, wealth, a friend, a wife and a lost land can be regained, but ones this body ruined can not be regained agains. Human body is much more precious than anything.

संस्कृत श्लोक – 4

बहूनां चैव सत्त्वानां रिपुञ्जयः।
वर्षान्धाराधरो मेघस्तृणैरपि निवार्यते।।4।।

दोहा – 4

एक हवै अनेक लोग वीर्य शत्रु जीत योग ।।
मेघ धारिबारिजेत घास ढेर बारि देत ।।4।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य एकता की शक्ति के बल का महत्व बताते हुए कहते हैं, छोटे प्राणी भी अपने संगठन और एकता के बल पर बड़े से बड़े शत्रु को हरा देता है, जैसे तिनकों से बना हुआ छप्पर भी मुसलाधार बारिश को रोक लेता है|

English Meaning:-  Chanakya says enemy can be overpower by the collectiveness of large numbers even if they are small in size, as the collectiveness of grass roof stop the heavy rainfall.

संस्कृत श्लोक – 5

जले तैलं खले गुह्यं पात्रे दानं मनागपि।
प्राज्ञे शास्त्रं स्वयं याति विस्तारे वस्तुशक्तितः।।5।।

दोहा – 5

थोर तेल बारि माहिं । गुप्तहू खलानि माहिं।।
द्वान शास्त्र पात्रज्ञानि। ये बड़े खभाव आहि ।।5।।

हिंदी अर्थ:-  आचार्य चाणक्य कहते हैं, यदि जल में तेल डाल दिया जाए तो वह तेजी से फेल जाता है, दुष्ट से कही गई गुप्त बात बहुत तेजी से फेल जाती है,  योग्य व्यक्ति को दिया धन बहुत तेजी से बढ़ जाता है, योग्य व्यक्ति उस धन का सदुपयोग करके उस धन को बढ़ा लेता है, विद्वान को थोडा सा भी सिखा दिया जाय या शिक्षा दे दी जाए वह उसका विस्तार कर लेता है|

English Meaning:- Acharya chanakya says, a small amount of oil dropped in water spread fast, the secret disclose to wicked never remain secret, the money given to worthy soon multiply and the little knowledge given to meritorious soon increases.

संस्कृत श्लोक – 6

धर्माऽऽख्याने श्मशाने च रोगिणां या मतिर्भवेत्।
सा सर्वदैव तिष्ठेच्चेत् को न मुच्येत बन्धनात्।।6।।

दोहा – 6

धर्म वीरता मशान । रोया माहिं जोन ज्ञान ।।
जो रहे वही सदाङ । बन्ध को न मुक्त होइ ।।6।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं, धार्मिक कथाओं को सुनने से, शमशान में जाने पर और रोगी को देखकर मन में जो वैराग्य उत्पन्न होता है यदि वह सदा बना रहे दो दुःख कैसा| चाणक्य के अनुसार सारे दुःख का कारण तृष्णा है जो क्षण भर का ही है, यदि पूरे जीवन मन में एक वैराग्य की भावना बनी रहे तो दुःख कैसा|

English Meaning:- If men always retain the state of mind they experience when hearing
religious instruction, when present at a crematorium ground, and when in sickness, then who could not attain self realization.

संस्कृत श्लोक – 7

उत्पन्नपश्चात्तापस्य बुद्धिर्भवति यादृशी।
तादृशी यदि पूर्वा स्यात्कस्य स्यान्न महोदयः।।7।।

दोहा – 7

आदि चूकि अन्त शोच । जो है विचारि दोष ।।
पूर्वही बने जो वैस । कौन को मिले न ऐश ।।7।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं, कोई बुरा करने के बाद पछतावा करने से क्या फायदा नुकसान तो हो ही चूका है, लेकिन कोई कार्य करने से पहले ही यदि हम पछ्ताले तो दुःख ही न हो, इसलिए चाणक्य कहते हैं कोई भी कार्य सोच समझ कर ही करना चाहिए|

English Meaning:- If a man should feel before, as he feels after, repentance then who would not attain perfection?

संस्कृत श्लोक – 8

दाने तपसि शौर्ये च विज्ञाने विनये नये।
विस्मयो न हि कर्तव्यो बहुरत्ना वसुन्धरा।।8।।

दोहा – 8

दान नय विनय नीच शूरता विज्ञान बीच ।।
कीजिये अचर्ज नाहिं, रत्न ढेर भूमि माहिं ।।8।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं कभी भी मनुष्य को दान, तप, शूरता (बहादुरी), विद्वता (ज्ञान), सुशीलता और नीतिनिपुणता का कभी अहंकार नहीं करना चाहिए, क्योंकि आपसे भी बड़े इस सभी गुणों में महान इस दुनिया में मिल जायेंगे| इस संसार में से के सवा शेर मिल ही जाते हैं| इसलिए कभी भी अहंकार मत करो|

English Meaning:- Never proud, your virtue of charity, hard work, courage, knowledge and Good Character. As you are not alone having that, In this world There are others who have all these more than you.

संस्कृत श्लोक – 9

दूरस्थोऽपि न दूरस्थो यो यस्य मनसि स्थितः।
यो यस्य हृदये नास्ति समीपस्थोऽपि दूरतः।।9।।

दोहा – 9

दूरहू बसे नीच, जासु जौन चित्त बीच ।।
जो न जासु चित्त पूर। है समीपहूँ तो दूर।।9।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य यहाँ कहते हैं जो ह्रदय में विधमान है वह दूर रहते हुए भी समीप है, लेकिन जो ह्रदय के समीप नहीं है वह पास रहते हुए भी दूर है|

English Meaning:- Chanakya says, he who is in heart always felt nearby even if he is far away. But a person is not in heart is always at a distance even if he is nearby.

संस्कृत श्लोक – 10

यस्माच्च प्रियमिच्छेत् तस्य ब्रूयात्सदा प्रियम्।
व्याघ्रो मृगवधं गन्तुं गीतं गायति सुस्वरम्।।10।।

दोहा – 10

जाहिते चहे सुपास, मीठी बोली तारा पारा ।
व्याध मारिबे मृगान, मंत्र गावतो सुशान ।।10।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं, यदि आपको किसी से कोई काम करवाना हो और आपको लगता है इसकी मदद से आपका कोई कल्याण हो सकता है उससे हमेशा मधुर भाषा में बोलना चाहिए|

English Meaning:- If you find a person important always speak sweetly to him.

Chanakya Niti Chapter 14 slokas meaning in Hindi English (11 – 20)

संस्कृत श्लोक – 11

अत्यासन्न विनाशाय दूरस्थान फलप्रदा।
सेव्यतां मध्यभागेन राजवह्रिगुरुस्त्रियः।।11।।

दोहा – 11

अति पास नाश हेत, दूरहू ते फलन देत ।
सेवनीय मध्य भाग, शुरु, भूप नारि आया ।।11।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं, राजा, गुरु, अग्नि और स्त्री इन चारों से न ज्यादा दूरी रखनी चाहिए और न ही ज्यादा समीप जाना चाहिए, इनके अधिक पास रहने पर भी हानि होती है और अधिक दूर रहने पर भी कार्य पूरा नहीं ही पाता|

English Meaning:- Acharya Chanakya says, One should not neither make too much distance with A King, Teacher, Fire or woman not be very so near to them. As they may harm you when you are too close or you social necessity may not fulfill if you are too distant.

संस्कृत श्लोक – 12

अग्निर्देवो द्विजातीनां मनीषीणां हृदि दैवतम्।
प्रतिमा स्वल्पबुद्धीनां सर्वत्र समदर्शिनः।।12।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं, ब्राह्मणों (द्विजातीय) का देवता अग्नि है, बुद्धिमान लोग अपने ह्रदय में ही ईश्वर के दर्शन करते हैं, कम बुद्धिवाले व्यक्ति मूर्ति को ही ईश्वर मानते हैं| समदर्शी ज्ञानी पुरुष संसार के प्रत्येक प्राणी, वास्तु या स्थान को परमात्मा को देखते हैं, गुण और धर्मसे हीन मनुष्य का जीवन व्यर्थ है|

English Meaning:-

संस्कृत श्लोक – 13

स जीवति गुणा यस्य यस्य धर्म स जीवति।
गुण धर्म विहीनस्य जीवितं निष्प्रयोजनम्।।13।।

दोहा – 13

जीवतो आणी जो होय, या सधर्म यक्त जीव ।।
धर्म और गुणी न जासु, जीवनो सुव्यर्थ तासु ।।13।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं, जिसमे गुण हैं, धर्म है, वही व्यक्ति जीवित है, जिसमें गुण और धर्म नहीं हैं ऐसे मनुष्य का जीवन व्यर्थ है|

English Meaning:- Chanakya says, He should be considered to be living who is virtuous and pious, but the life of a man who is destitute of religion and virtues is void of any blessing.

संस्कृत श्लोक – 14

यदीच्छसि वशीकर्तुं जगदेकेन कर्मणा।
परापवादशास्त्रेभ्यो गां चरन्तीं निवारय।।14।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं’ यदि आप एक ही कार्य से सारे जगत को वश में करना चाहते हैं तो दूसरों की बुराई करना छोड़ दें और कभी ऐसा विचार आये तो अपनी जीभ पर विराम लगा दें| बस यह एक काम कर ले इससे बढ़कर कोई उपाय नहीं है|

English Meaning:- Acharya chanakya says if you want control over your social well being, stop backbiting.

संस्कृत श्लोक – 15

प्रस्तावसदृशं वाक्यं प्रभावसदृशं प्रियम्।
आत्मशक्तिसमं कोपं यो जानाति स पण्डितः।।15।।

दोहा – 15

प्रिय खभाव अनुकूल, यो प्रशंशे वचन पुनि ।
निजबल के समतूल, कोप जान पण्डित सोई ।।15।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं जो व्यक्ति प्रसंग के अनुसार बातें करना, प्रभाव डालने वाला प्रेम दिखाना तथा अपनी शक्ति के अनुसार क्रोघ करना जानता है उसे ही पंडित कहते हैं|

अभिप्राय यह है की सभा में क्या बोलना है, किसको प्रेम दिखाना है और किस पर क्रोध करना है यह कला मनुष्य को आनी चाहिए वही व्यक्ति ज्ञानी है|

English Meaning:- He is a pandit (wise)) who speaks what is suitable to the  occasion, who shows loving behariour according to his ability, and who knows the limits of his anger.

संस्कृत श्लोक – 16

एक एव पदार्थस्तु त्रिधा भवति वीक्षति।
कुपणं कामिनी मांसं योगिभिः कामिभिः श्वभिः।।16।।

दोहा – 16

वस्त एक ही होय, तीन तरह देखी गई।
रति मृत माँसू सोय, कामी योगी कुकुर सो ।।16।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य मनुष्य के नज़रिये को बताते हुए कहते हैं की एक कामी मनुष्य स्त्री के शरीर को भोग की वस्तु समझता है वही एक सन्यासी और योगी उसे बदबूदार मुर्दे के समान देखता है, और एक कुत्ता सिर्फ एक मांस के लोथड़े के समान| केवल मनस्थिति ही आपके देखने और सोचने का नजरिया बदल देती है|

English Meaning:- Chanakya says It is our attitude towards world that makes the different, he says a woman is a woman for a sensual person, she appear as a corpse for a sanyasi, and lump of flash for a dog.

संस्कृत श्लोक – 17

सुसिद्धमौषधं धर्मं गृहछिद्रं व मैथुनम्।
कुभुक्तं कुश्रुतं चैव मतिमान्न प्रकाशयेत्।।17।।

दोहा – 17

सिध्दोषध ओ धर्म, मैथुन कुवचन भोजनो ।
अपने घरको मर्म, चतुर नहीं प्राटित करे।।17।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य गोपनीयता पर बल देते हुए कहते हैं कि बुद्धिमान व्यक्ति सिद्ध औषधि, धर्म, अपने घर की कमियां, मैथुन, खाया हुआ खराब भोजन तथा सुनी हुई बुरी बातों को गुप्त रखते हैं।

सिद्ध औषधि के बारे में किसी को बताने से उसका प्रभाव कम हो जाता है, अपने धर्म का परायण बिना किसी को बताये करते रहना चाहिए, अपने घर की कमियां किसी के सामने नहीं बतानी चाहिए इससे बदनामी होती है, मैथुन के कर्म को भी किसी को बताना असभ्यता है, और यदि आपने ऐसा भोजन कर लिया जिसका सेवन समाज में मान्य नहीं है| इससे बदनामी होती है|

English Meaning:- Chanakya says a wise man should not disclose formula of a medicine for everyone, an act of charity performed by him, domestic conflicts, private affairs
with his wife and if he served poorly prepared food. These all bring bad reputation to you if disclosed.

संस्कृत श्लोक – 18

तावन्मौनेन नीयन्ते कोकिलश्चैव वासराः।
यावत्सर्वं जनानन्ददायिनी वान प्रवर्तते।।18।।

दोहा – 18

तौलों मौने ठानि, कोकिलह दिन काटते ।।
जोलों आनन्द खानि, सब को वाणी होत है ।।18।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं कोयल जब तक वसंत नहीं आ जाता चुप ही रहती है वसंत आने पर अपनी मधुर आवाज़ से सबका मन मोह लेती है| चाणक्य कहते हैं यदि बोलो तो मीठा बोलो नहीं तो चुप रहने में सार है|

English Meaning:- Acharya chanakya says always speak sweat and mildly whenever you speak othewise its better to keep quiet. As Nightangle remain silent until spring comes and with its sweat voice makes happy all.

संस्कृत श्लोक – 19

धर्मं धनं च धान्यं गुरोर्वचनमौषधम्।
संगृहीतं च कर्तव्यमन्यथा न तु जीवति।।19।।

दोहा – 19

धर्म धान्य धनवानि, शुरु वच औषध पाँच यह।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि धर्म, धन, धान्य, गुरु की सीख तथा औषधि इनका संग्रह करना चाहिए अन्यथा व्यक्ति जीवित नहीं रह सकता।

English Meaning:- A person should always keep Dharma, Money, Food, and teaching of guru otherwise A person can not live for long.

संस्कृत श्लोक – 20

त्यज दुर्जनसंसर्ग भज साधुसमागमम्।
कुरु पुण्यमहोरात्रं स्मर नित्यमनित्यतः।।20।।

दोहा – 20

तजो दुष्ट सहवास, भजो साधु साम रुचिर।।
करो पुण्य परकास, हरि सुमिरो जश नित्यहिं ।।20।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कह रहे हैं हमेशा सज्जन का संग करना चाहिए और दुर्जनों दुष्टों का साथ छोड़ देना चाहिए| सज्जनों का अवगुण भी लाभकारी होता है और दुर्जनों से होने वाला लाभ भी दुखदायक ही होता है|

English Meaning:- Chanakya says avoid company of wicked one and associate with saintly persons. Saintly company always instill virtue in you but wicked association always
harm you.

दोस्तो चाणक्य नीति चौदहवां अध्याय हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित (Chanakya Niti Chapter 14 in Hindi English meaning) के ज्ञान से आपको अवश्य ही कुछ सिखने को मिला होगा|

आशा करते हैं आपके जीवन में एक सकारात्मक उर्जा का संचार हो आप भी जीवन में सफल बनें|

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