Chanakya Niti Chapter 12 Hindi English | चाणक्य नीति बारहवां अध्याय अर्थ सहित

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Chanakya niti chapter 12 in hindi english

Chanakya Niti twelfth 12th Chapter 12 shlokas with meaning in Hindi English | चाणक्य नीति बारहवां (12th) अध्याय हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित

दोस्तो आज यहाँ चाणक्य नीति बारहवें अध्याय की हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित ( Chanakya Niti Chapter 12 hindi english meaning) चर्चा करेंगे| आशा करते हैं यह ज्ञान आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य लेके आएगा|

Chanakya Niti Chapter 12 In Hindi and English

चाणक्य निति बारहवां अध्याय हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित

संस्कृत श्लोक – 1

सानन्दं सदनं सुताश्च सुधयः कान्ता प्रियालापिनी,
इच्छापूर्तिधनं स्वयोषिति रतिः स्वाज्ञापरः सेवकाः।
आतिथ्यं शिवपूजनं प्रतिदिनं मिष्टान्नपानं गृहे,
साधोः संगमुपासते च सततं धन्यो गृहस्थाश्रमः।।1।।

दोहा – 1

सानन्दमंदिरपण्डित पुत्र सुबोल रहै तिरिया पुनि प्राणपियारी
इच्छित सतति और वतीय रती है सेवक भौंह निहारी ।1।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य सुखी गृहस्थ जीवन की चर्चा करते हुए कहते हैं, जिस गृहस्थ घर में समय समय पर निरंतर उत्सव यज्ञ भजन कीर्तन होते रहते हैं, संतान आज्ञाकारी और शिक्षित हों, पत्नी मधुर भाषी और मिलनसार हो, सभी सांसारिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन हो, नौकर आज्ञाकारी हों, महात्मा पुरुषों का आना जाना हो और अतिथियों का आदर सहित सत्कार होता हो, ऐसा पुरुष अत्यंत भाग्यशाली होता है|

English Meaning:- A Householder is said to be blessed if theres is a positive atmosphere in his house, who’s children are well educated, wife is mild spoken and social, sufficient wealth to meet worldly needs, servents are obedient and where guest are always welcome. such men is absolutely blessed one.

संस्कृत श्लोक – 2

आर्तेषु विप्रेषु दयान्वितश्चेच्छ्रद्धेन यः स्वल्पमुपैति दानम्।
अनन्तपारं समुपैति दानं यद्दीयते तन्न लभेद् द्विजेभ्यः।।2।।

दोहा – 2

दिया द्यायुत साधुसो, आरत विप्रहिं जौन ।
थोरी मिले अनन्त द्वे, विज से मिले न तोन ।।2।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि दुःखियों और विद्वानों को जो व्यक्ति दान देता है और जरुरत के समय मदद करता है| उसे अक्षय पुण्य प्राप्त होता है| और दान दिए गए धन से लाख गुना धन उसे पुनः प्राप्त हो जाता है|

English Meaning:- Chanakya says, who donate to the needy ones in their distress is compensated abundantly in return.

संस्कृत श्लोक – 3

दाक्षिण्यं स्वजने दया परजने शाठ्यं सदा दर्जने।
प्रीतिः साधुजने स्मय खलजने विद्वज्जने चार्जवम्।
शौर्यं शत्रुजने क्षमा गुरुजने नारीजने धूर्तताः
इत्थं ये पुरुषा कलासु कुशलास्तेष्वेव लोकस्थितिः।।3।।

दोहा – 3

दक्षता वजनबीच ढ्या परजन बीच शठता सदा ही रहे बीच दुरजन के।
प्र ति साधुजन में शूरता सयानन में क्षमा पूर धुताई राखे फेरि बीच नारिजन के।
ऐसे सब काल में कुशल रहें जेते लोग लोक थिति रहि रहे बीच तिनहिन के।।३।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य महापुरुष लोगों के गुणों की चर्चा करते हुए कहते हैं, जो अपने लोगों से प्रेम, परायों पर दया, दुष्टों के साथ सख्ती, सज्जनों से सरलता, मूर्खों से दुरी, विद्वानों का आदर, शत्रुओं के साथ बहादुरी, शिक्षकों का सम्मान और अपनी स्त्री को छोड़कर पराई स्त्रियों पर आसक्ति नहीं रखते ऐसे पुरुष ही महापुरुष हैं इन्ही की वजह से यह दुनिया चल रही है|

English Meaning:- Acharya chanakya explain the traits of a holy man and says, he who generous to their relatives, kind to strangers, tough with wicked, loving to the good,
maintain distance with foolish, respect to the scholars, courageous with enemies, respect to gurus and maintain distance with other woman.

संस्कृत श्लोक – 4

हस्तौ दानवर्जितौ श्रुतिपुटौ सारस्वतद्रोहिणी
नेत्रे साधुविलोकरहिते पादौ न तीर्थं गतौ।
अन्यायार्जितवित्तपूर्णमुदरं गर्वेण तुंगं शिरौ
रे रे जम्बुक मुञ्च-मुञ्च सहसा नीचं सुनिन्द्यं वपुः।।4।।

दोहा – 4

यह पाणि दान विहीन कान पुराण वेद सुने नहीं ।
अरु आँखि साधुन दर्शहीन न पाँव तीरथ में कहीं ।।
अन्याय वित्त भरो सपेट उथ्यो सिणे अभिमानही ।
वपु नीच निंदित छोड अरे सियार सो बेाहीं ।।4।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं, हे मनुष्य यदि तूने कभी किसी को दान नहीं दिया, कभी ज्ञान की बातें अपने कानों से नहीं सुनी, नेत्रों से कभी साधू के दर्शन नहीं किये, पावों से कभी कोई तीर्थ यात्रा नहीं की और दूसरों के साथ बेईमानी और अन्याय कर धन इकठ्ठा करके घमंड से सर को ऊँचा उठाये हुए है| तू मनुष्य नहीं एक गीदड़ के सामान है तू अभी अपने इस शारीर को त्याग दे|

English Meaning:- Acharya chanakya says, If A man hands has never given charity, whose earns never listen the word of wise, never visited a holy man, never visited a holy place, earned money through crooked practices and whose head is high with ego, is like a jackal.

संस्कृत श्लोक – 5

येषां श्रीमद्यशोदासुत-पद-कमले नास्ति भक्तिर्नराणाम्
येषामाभीरकन्या प्रियगुणकथने नानुरक्ता रसज्ञा।
तेषां श्रीकृष्णलीला ललितरसकथा सादरौ नैव कर्णो,
धिक्तान् धिक्तान् धिगेतान्, कद्ययति सततं कीर्तनरस्था मृदंग।।5।।

दोहा – 5

जो नर यमुमतिसुत चरणन में भक्ति हृदय से कीन नहीं ।
जो राधाष्ट्रिय कृष्ण चन्द्र के गुण जिह्वा नाहिं कहीं ।।
जिनके दोउ कानन माहिं कथास कृष्ण को पीय नहीं ।।
कीर्तन माहिं मृदा इन्हे धिक्रएहि भॉति कहेहि कहीं ।।5।।

हिंदी अर्थ:- यहाँ प्रभु के गुणगान की महत्त्व बताते हुए आचार्य चाणक्य कहते हैं, की म्रदंग की ध्वनि बहुत मधुर होती है, इससे आवाज़ आती है धिक्तान कवि ने कल्पना कर इसका अर्थ निकाला धिक्कार है|

चाणक्य कहते हैं ऐसा मनुष्य जिनका भगवान् श्री कृष्ण के प्रति प्रेम नहीं, मुख में राधा रानी और गोपियों का गुणगान नहीं, जिसके कान भगवान् श्री कृष्ण की कथा सुनने के लिए लालायित नहीं रहते ऐसे मनुष्य पर धिक्कार है|

English Meaning:- Acharya chanakya says shame upon on those who have no devotion to the feet of shri lord krishna, who have no devotion to shri RAdha Rani, who’s ears are not earer to listen the moral stories of lord krishna. Even the mradanga says dhintak (dhikaar hai in hindi) shame on you.

संस्कृत श्लोक – 6

पत्रं नैव यदा करीरविटपे दोषो वसन्तस्य किं
नोलूकोऽप्यवलोकयते यदि दिवा सूर्यस्य किं दूषणम्?
वर्षा नैव पतति चातकमुखे मेघस्य किं दूषणम्
यत्पूर्वं विधिना ललाट लिखितं तन्मार्जितुं कः क्षमः।।6।।

दोहा – 6

पात न होय करीन में यदि दोष बसन्तहि कान तहाँ है।
त्यों जब देखि सके न उलूकदिये तहँ सूरज दोष कहाँ है ।।
चातक आनन बूंदपरै नहिं मेघन ठूषन कौन यहाँ है।
जो कछु पूरब माथ लिखाविधि मेटनको समरथ कहाँ है ।।6।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं भाग्य में जो लिखा है वही होना तय है, चाणक्य उदहारण देते हुए कहते हैं, बांस के पेड़ में पत्ते नहीं होते इसमें बसंत का क्या दोष, उल्लू दिन में नहीं देख सकता इसमें सूर्य का क्या दोष, चातक पक्षी के मुहं में वर्षा की पहली बूँद न पड़े इसमें बादल का क्या दोष, जो भाग्य में लिखा है, उसे कोन मिटा सकता है|

English Meaning:- Chanakya says, if there is no leaves in the bamboo trees what fault of spring, if owl can not see in during daytime what fault sun is, if no raindrops fall into the mouth of chatak bird what fault the cloud is, what lord brahma have written in the fate of a human who can change it. it bound to happen.

संस्कृत श्लोक – 7

सत्संगतेर्भवति हि साधुता खलानां
साधूनां न हि खलसंगतेः खलत्वम्।
आमोदं कुसुमभवं मृदेव धत्ते
मृद्गन्धं न हि कुसुमानि धारयन्ति।।7।।

दोहा – 7

तिरु- सत्रांसों खलन साधु खभाव वै ।
साधू न हृष्टपन सा परेहू लेवे ।।
माटीहि बास कछु फूल न धार पावे ।।
माटी सुवास कहुँ फूल नहिं बसावे ।।7।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं, साधू और सज्जन पुरुषों का विश्वास द्रणसंकल्पित होता है, आचार्य उदहारण देते हुए कहते हैं, सत्संगति से दुष्ट भी अपनी दुष्टता छोड़ देते हैं|

लेकिन दुष्टों की संगती में सज्जन अपनी सज्जनता नहीं छोड़ते, मिटटी, फूलों की खुशबु को ग्रहण कर लेती हैं, लेकिन फूल कभी भी मिटटी की खुशबू को ग्रहण नहीं करते|

English Meaning:- Chanakya says, saintly and noble one never leave their goodness. acharya explain it with example and says, wicked develop good qualites in the company of noble, but noble one never leave their goodness in the company of wicked. the earth fragrances with a flower that falls upon it, but flower never take the odor of the earth.

संस्कृत श्लोक – 8

साधूनां दर्शनं पुण्यं तीर्थभूताः हि साधवः।
कालेन फलते तीर्थः सद्यः साधु समागमः।।8।।

दोहा – 8

साधू दर्शन पुण्य है, साधु तीर्थ के रुप ।।
काल पाय तीथ फले, तुरतहि साधु अनूप ।।8।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि साधुओं के दर्शन से पुण्य मिलता है। साधु तीर्थों के समान होते हैं। तीर्थों का फल कुछ समय बाद मिलता है, किन्तु साधु समागम तुरन्त फल देता है।

English Meaning:- Acharya chanakya says, saintly man is like visiting a sacred place, seeing a saintly man gives the immediate benefit but visiting a sacred place takes time. so it is more better to visit saintly one than sacred place.

संस्कृत श्लोक – 9

विप्रास्मिन्नगरे महान् कथय कस्ताल द्रुमाणां गणः
को दाता रजको ददाति वसनं प्रातर्गृहीत्वा निशि।
को दक्षः परिवित्तदारहरणं सर्वेऽपि दक्षाः जनाः
कस्माज्जीवति हे सखे! विषकृमिन्यायेन जीवाम्यहम्।।9।।

दोहा – 9

कह्यो या नगर में महान है कौन ? विप्र ! तान के वृक्षन के कतार हैं। दाता कहो कौन हैं?
रजक देत साँझ आनि धोय शुभ वस्त्र को जो देत सकार है। दक्ष कही कौन है? प्रत्यक्ष
सबहीं हैं दक्ष रहने को कुशल परयो धनदार कौन है? कैसे तुम जीवत कहो मोसों मीत विष कृमिन्याय हैं।
कैसे तुम जीवत बताय कहो मोसों मीत विष कृमिन्याय कर लीजै निराधार है ।।9।।

हिंदी अर्थ:- एक अजनवी ब्राह्मण से प्रश्न करता है इस नगर में सबसे बड़ा कोन है, ब्राह्मण कहता है ताड़ के पेड़ सबसे बड़े हैं, अजनबी दूसरा प्रश्न करता है इस नगर में सबसे बड़ा दानी कोन है, ब्राह्मण कहता है, इस नगर का धोबी जो सुबह कपडे ले जाता है और शाम को दे जाता है|

तीसरा प्रश्न चतुर व्यक्ति कोन है, जो दूसरों का धन तथा स्त्री हरने कुशल है वह चतुर है, तब अजनबी ब्राह्मण से पूछता है तब आप इस नगर में कैसे रह लेते हो|

ब्राह्मण कहता है में इस शहर में उस कीड़े के सामान हूँ जो गन्दी नाली में रहकर भी जीवित रहता है|

अभिप्राय यह है, जिस शहर में सज्जन लोग नहीं, सभी जगह भ्रष्टाचार और दुष्टों का राज है ऐसी जगह सज्जन पुरुष का रहना केवल एक कीड़े के समान है जो गंदे नाली में भी जीवित रहता है|

English Menaing:- A stranger reaches a city and asked a brahman, who is biggest in this city, brahman reply The tree of palm,

He asked second question who is great charitable in this city, brahman reply A washman who takes away the clothes in morning and return back in eveaning.

He asked thrid question who is clever in this city, brahman reply every one here is ablest busy in stealing others money and wife.

then stranger asked how you survive here. Brahman reply I am survived here as a warm survive in a dirty and filthy place.

संस्कृत श्लोक – 10

न विप्रपादोदक पंकिलानि न वेदशास्त्रध्वनिगर्जितानि।
स्वाहास्वधाकारध्वनिवर्जितानि श्मशानतुल्यानि गृहाणितानि।।10।।

दोहा – 10

विप्रचण के उक से. होत जहाँ नहिं कीच । वे
दध्वनि वाहा नहीं, वे गृह मर्घट नीच ।।10।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं ऐसा घर जहाँ ब्राह्मणों और विद्वानों का आदर नहीं होता, जिस घर में वेदों के मन्त्रों की ध्वनि, अध्ययन, भगवान्की  कथा, यज्ञ नहीं होते, ऐसा घर शमशान के सामान है|

English Meanning:- The house where wise and brahman are not respected, vedic mantras not recited, is like a crematorium itself.

Chanakya Niti Chapter 12 with meaning in Hindi English (11-19)

संस्कृत श्लोक – 11

सत्यं माता-पिता ज्ञानं धर्मो भ्राता दया सखा।
शान्तिः पत्नी क्षमा पुत्रः षडेते मम बान्धवाः।।11।।

दोहा – 11

सत्य मातु पितु ज्ञान, सखा दया भ्राता धरम ।
तिया शांति सुत जान छमा यही अट् बन्धु मम ।।11।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं एक बारे एक साधू से पूछा गया आपके रिश्तेदार कोन हैं, साधू ने जबाव दिया, सत्य मेरी माता है, ज्ञान मेरे पिता हैं, धर्म मेरा भाई है, दया मेरी मित्र है, और क्षमा मेरा पुत्र और शांति मेरी पत्नी है|

आचार्य चाणक्य मनुष्य के गुणों को सगे सम्बन्धियों से तुलना करते हुए कहते हैं, सत्य मनुष्य की माँ के समान है, ज्ञान पिता के समान, धर्म भाई के समान, दया मित्र के सामान, शांति पत्नी के सामान और क्षमा करना पुत्र के सामान है| यह 6 गुण ही मनुष्य को अपने रिश्तेदार समझने चाहिए|

English Meaning:- Once Sadhu was asked who is your family, he replied, truth is my mother, spiritual knowledge is my father, Dharma is my brother, kindness is my friend, forgiveness is my son and peace is my wife.

संस्कृत श्लोक – 12

वयसः परिणामे हि यः खलाः खल एव सः।
सुपक्वमपि माधुर्यं नोपायतीन्द्र वारुणम्।।12।।

दोहा – 12

है अनित्य यह देह, विभव सदा नाहिं नर है।
निकट मृत्यु नित हेय, चाहिय कीन संग्रह धरम ।।12।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य दुष्टता की प्रवर्ती की चर्चा करते हुए कहते हैं, की उम्र का दुष्टता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता. दुष्ट चाहे बुढा हो जाए लेकिन अपनी दुष्टता नहीं छोड़ता| जैसे इंद्रवरुण फल चाहे कितना भी पक जाए लेकिन उसकी कड़वाहट दूर नहीं होती|

English Meaning:- Acharya says, wicked remain wicked even if he gets old, age does not affect wickedness. As indraVarun fruit get ripened even than its bitterness does not vanish.

संस्कृत श्लोक – 13

निमन्त्रणोत्सवा विप्रा गावो नवतृणोत्सवाः।
पत्युत्साहयुता नार्याः अहं कृष्ण-रणोत्सवः।।13।।

दोहा – 13

पति उत्सव युवतीन को, गोवन को नवघास ।।
नेवत विजन को हे हरि, मोहिं उत्सव रावास ।।13।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य कहते हैं, जिस प्रकार ब्राह्मण के लिए यजमान से निमंत्रण पाना प्रसन्नता लाता है वहां उसे स्वादिष्ट भोजन और दान दक्षिणा मिलती है|

गाय के लिए हरी भरी घास का मिलना ही उत्सव है, पत्नी के लिए पति की प्रसन्नता उत्सव है, लेकिन एक सज्जन और साधू के लिए भीषण मुसीबतों और युद्धों में भी ख़ुशी और अनुराग उत्सव है|

English Meaning:- Arjuna says to krishna, as brahman rejoice on invitation to the feast, cows find pleasure eating tender grass, wives joy is in the husband happiness, but O Krishna, But I rejoice in Bttlefield.

संस्कृत श्लोक – 14

मातृवत् परदारेषु परद्रव्याणि लोष्ठवत्।
आत्मवत् सर्वभूतानि यः पश्यति सः पंडितः।।14।।

दोहा – 14

पर धन माटी के सरिस, परतिय माता भेष ।
आपु सरीखे जात सब, जो देखे सो देख ।।१४।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं, पराई स्त्री को माता के समान समझना चाहिए, दुसरे के धन पर बुरी नज़र नहीं रखनी चाहिए, उसे मिटटी के ढेले के सामान समझना चाहिए| और सभी प्राणियों के सुख दुःख को अपना मानने वाला, व्यक्ति ही समझदार विवेकशील और पंडित है|

English Meaning:- Chanakya says, who consider other’s wife as mother, considers other wealth as lump of mud, and happiness and pain of all other living being as his own
is a true pandit.

संस्कृत श्लोक – 15

धर्मे तत्परता मुखे मधुरता दाने समुत्साहता
मित्रेऽवञ्चकता गुरौ विनयता चित्तेऽपि गम्भीरता।
आचारे शुचिता गुणे रसिकता शास्त्रेषु विज्ञातृता
रूपे सुन्दरता शिवे भजनता त्वय्यस्ति भो राघव।।15।।

दोहा – 15

शास्त्र का विशेष ज्ञान रूप भी सुहावन है
शिवजी के भजन का सब काल ध्यान है।
कहे पुष्पवन्त ज्ञानी राघव बीच मानों सब
ओर इकठोर कहिन को न मान है ।।15।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य भगवन राम के गुणों का वर्णन करते हुए कहते हैं कि धर्म में तत्परता, मुख में मधुरता, दान में उत्साह, मित्रों के साथ निष्कपटता, गुरु के प्रति विनम्रता, चित्त में गंभीरता, आचरण में पवित्रता, गुणों के प्रति आदर, शास्त्रों का विशेष ज्ञान, रूप में सुंदरता तथा शिव में भक्ति-ये सब गुण एक साथ हे राघव! आप में ही है।

English Meaning:- Acharya chanakya explain the good traits of bhagwan ram and says, Dedication towards dharma, sweetness in speech, desire of charity, truthfullness with friends, respect to the guru, tranquillity of mind, pure conduct, knowledge of sastras beauty, devotion to lord all the virtue are in ra1ghva only.

संस्कृत श्लोक – 16

काष्ठं कल्पतरुः सुमेरुरचलश्चिन्तामणिः प्रस्तरः
सूर्यस्तीव्रकरः शशिः क्षयकरः क्षारोहि निरवारिधिः।
कामो नष्टतनुर्बलिर्दितिसुतो नित्य पशुः कामगोः
नैतास्ते तुलयामि भो रघुपते कस्योपमा दीयते।।16।।

दोहा – 16

कल्पवृक्ष काठ अचल सुमेरु चिन्तामणिन भीर जाती जाजि जानिये ।
सुरज में याता अरु कलाहीन चन्द्रमा है सागरहू का जल खारो यह जानिये ।
कामदेव नष्टतनु अरु राजा बली दैत्यदेव कामधेनु गौ को भी पशु मानिये ।
उपमा श्रीराम की इन से कुछ तुले ना और वस्तु जिसे उपमा बखानिये ।।१६।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं कि कल्पवृक्ष एक लकड़ी है। सुमेरु केवल एक पहाड़ है, पारस केवल एक पत्थर है। सूर्य की किरणें तीव्र हैं। चन्द्रमा घटता और बढ़ता रहता है। समुद्र खारा है। कामदेव का शरीर नहीं है। बलि दैत्य है। कामधेनु पशु है। हे राम! मैं आपकी तुलना किसी से नहीं कर पा रहा हूं। आपकी उपमा इनसे दी जाती है, लेकिन आप तो इनसे भी कहीं महान हैं|

English Meaning:- The desire tree is just a wood, the golden Mount Meru is motionless, the wish-fulfilling gem paras is just a stone, the sun is scorching, the moon size increases and decreases, the boundless ocean is saline, the demigod of lust lost his body (due to Shiva’s wrath), Bali Maharaja, was born as demons, and Kamadhenu is a mere beast. O Lord of the Raghu dynasty Lord Rama, I cannot compare you to any one of these, your are more higher authority than these.

संस्कृत श्लोक – 17

विनयं राजपुत्रेभ्यः पण्डितेभ्यः सुभाषितम्।
अनृतं घूतकारेभ्यः स्त्रीभ्यः शिक्षेत् कैतवम्।।17।।

दोहा – 17

राजसुत से विनय अरु, बुध से सुन्दर बात ।
झूठ जुआनि कपट, स्त्री से सीखी जात ।।१८।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं, मनुष्य सभी से कुछ न कुछ सीख सकता है, राजपुत्रों से विनयशीलता, पंडितों से बोलने का ढंग, जुआरियों से असत्य भाषण और स्त्रियों से छल कपट की शिक्षा ली जा सकती है|

English Meaning:- Courtesy should be learned from princes, the art of conversation from
pandits, lying should be learned from gamblers and deceitful ways can be learned from women.

संस्कृत श्लोक – 18

अनालोच्य व्ययं कर्ता चानाथः कलहप्रियः।
आर्तः स्त्रीहसर्वक्षेत्रेषु नरः शीघ्रं विनश्यति।।18।।

दोहा – 18

बिन विचार खर्चा करें, झरे बिनहिं सहाय ।
आतुर सब तिय में है, सोइ न बेशि नसाय ।।18।।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य जीवन में न करने योग्य बातों को बताते हुए कहते हैं, बिना सोचे समझे अनाप शनाप खर्च करने वाला, अनाथ, झगलाडू स्वाभाव का, और प्रत्येक स्त्री के पीछे भागने वाला व्यक्ति शीघ्र ही नष्ट हो जाता है|

English Meaning:- The lavish spender, orphan, quarrel monger, the one who always behind all woman, soon ruin his life.

संस्कृत श्लोक – 19

जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः।
स हेतु सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च।।19।।

दोहा – 19

एक एक जल बुन्द के परत घटहु भरि जाय ।
सब विद्या धन धर्म को, कारण यही कहाय ।।19।।।

हिंदी अर्थ:- आचार्य चाणक्य कहते हैं जैसे एक-एक बूंद पानी डालने से घड़ा भर जाता है। इसी तरह विद्या, धर्म और
धन का भी संचय करना चाहिए। अभिप्राय यह है कि जैसे एक-एक बूंद डालते रहने से धीरे-धीरे घड़ा भर जाता है। इसी प्रकार धीरे-धीरे ज्ञान, धर्म तथा धन दौलत का भी संचय और इकठ्ठा किया जा सकता है| कोई भी कार्य करने में समय तो लगता ही है, बस उस कार्य को निरंतर करते रहे एक समय के बाद वह समापन पर आ जाएगा|

English Meaning:- Chanakya says as drop by drop of water pot is filled sooner or later. In the same manner we have to keep patience while acquiring knowledge, religion, and wealth. Everything takes time, be patience.

आशा करते हैं चाणक्य नीति ग्यारहवें अध्याय का हिंदी इंग्लिश अर्थ सहित (Chanakya Niti Chapter 12 with meaning in Hindi English) ज्ञान आपके जीवन में एक सकारात्मक उर्जा का संचार करे|

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