Chanakya History Facts Biography in Hindi | चाणक्य का इतिहास जीवनी और रोचक तथ्य

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Chanakya history facts biography in hindi

Chanakya history facts biography  in Hindi | चाणक्य का इतिहास जीवनी और रोचक तथ्य

चाणक्य (Chanakya) के बारे में जितनी जानकारी उपलव्ध है उसमें से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य आपके साथ शेयर कर रहे हैं| आशा करते हैं हमारी रिसर्च आपको जरूर पसंद आएगी|

Chanakya History in Hindi

चाणक्य के बारे में कुछ रोचक तथ्य और इतिहास

चाणक्य 4th शताव्दी के महान शिक्षक, दर्शनशास्त्री, अर्थशास्त्री और एक निपुण राजनीतिज्ञ थे|

चाणक्य (chanakya) को कोटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से जी जाना जाता है|

चाणक्य के जन्म के समय के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है| इतिहासकारों के अनुसार इनका जन्म करीब 371 BC में ब्राह्मण परिवार में हुआ था|

बुद्धिस्ट संस्करण के अनुसार चाणक्य का जन्म तक्षशिला में हुआ था, लेकिन जैन संस्करण के अनुसार इनका जन्म गोल्ला क्षेत्र के चनका गाँव (दक्षिण भारत) में हुआ था|

हम यहाँ आपको बता दें तक्षशिला क्षेत्र भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान में चला गया है|

चाणक्य (Chanakya) के पिता का नाम चनक और माता का नाम कनेस्वरी था|

हालाँकि कुछ जानकर जैसे K.C ojha का मानना था| विष्णुगुप्त एक अलग व्यक्ति थे, इनके अनुसार विष्णुगुप्त चाणक्य की किताब के संपादक और एडिटर थे|

ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के संस्कृत के प्रोफेसर थॉमस बुर्रो (Thomas Burrow) ने भी कहा है, की कौटिल्य और विष्णुगुप्त दोनों अलग अलग व्यक्ति थे|

लेकिन पंचतंत्र एक महाकाव्य (जिसे 3rd सेंचुरी BCE में लिखा गया था) के अनुसार चाणक्य को ही विष्णुगुप्त बताया गया है|

इन्होने 2 किताबों अर्थशास्त्र और चाणक्य नीति का लेखन किया जिन्हें आज भी लोग जीवन के मार्गदर्शक के रूप में मानते हैं|

चाणक्य द्वारा लिखा गया ग्रन्थ अर्थशास्त्र मौर्य वंश के वाद विलुप्त हो गया किसी को इसके बारे में जानकारी नहीं थी| इनका यह ग्रन्थ 1905 में सामने आया|

1905 में कोई unknown ब्राह्मण ताड़ के पत्तों पर हाथों से लिखी गई एक किताब (palm leaf manuscripts) मैसूर में स्थित लाइब्रेरी के लाइब्रेरियन रुद्रपतना शमाशास्त्री को दे गए थे|

चाणक्य की म्रत्यु 283 BC पाटलिपुत्र में हुई थी|

अमेरिकी इतिहासकार थॉमस Thomas Trautmann के अनुसार चार प्राचीन ग्रंथों में चाणक्य का वर्णन मिलता है|

  • बुद्धिस्ट संस्करण (Buddhist Version):-
    महावम्सा (Mahavamsa)ग्रन्थ और इसका टीका (commentary) वंसत्थअप्पाकासिनी  (Vamsatthappakasini) जिसे पाली भाषा में लिखा गया है
  • जैन संस्करण (Jain Version):-
    परीशिष्टपरवन (Parishishtaparvan) जिसे हेमचन्द्र ने लिखा है|
  • कश्मीरी संस्करण (Kashmiri Version):-
    कथा सरिता सागर जिसे सोमदेव ने लिखा है और बृहत् कथा मंजरी जिसे क्षेमेन्द्र ने लिखा है|
  • विशाखा दत्ता संस्करण (Vishakha datt’s Version):-
    चाणक्य का वर्णन विशाखा दत्ता के द्वारा लिखे गए संस्कृत नाटक मुद्रा राक्षस में भी देखने को मिलता है| लेकिन इस नाटक के पात्र थोड़े बनावटी भी प्रतीत होते हैं| इसके वारे में हम आगे चर्चा करेंगे|

लेकिन चारों संस्करण में एक बात कॉमन है| धनानंद ने चाणक्य को अपमानित किया, चाणक्य ने धनानंद के राज्य को नष्ट करने की प्रतिज्ञा ली|

चाणक्य ने अपने राजनितिक चतुराई से चन्द्रगुप्त को धनानंद की जगह राजा बनाया| लेकिन पात्रों के नाम और धटना क्रम में मतभेद है|

चाणक्य का प्रारंभिक जीवन:-

जैसा की ऊपर बताया चाणक्य का जन्म लगभग BC में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ| जैन लेखक हेमचन्द्र के अनुसार इनका जन्म गोल्ला क्षेत्र के चनक गाँव में हुआ था| इनकी माता का नाम चनेश्वरी और पिता का नाम चानिन (चनक) था|

चाणक्य ने अपनी शिक्षा दीक्षा तक्षशिला में पूरी की| यह अर्थशास्त्र, राजनीती, युद्ध कौशल और ज्योतिष विज्ञानं में महारत हांसिल थी|

अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद तक्षशिला विश्वविधालय में ही ये शिक्षक के पद पर नियुक्त हो गए| यहाँ इन्होने राजनितिक विज्ञानं और अर्थशास्त्र पढ़ाया|

बाद का समय:-

एक समय चाणक्य नन्द वंश के राजा धना नन्द के दरवार में गए| चाणक्य ज्ञानी विद्वान ब्राह्मण थे| लेकिन वेश भूषा से थोड़े कुरूप थे|

चाणक्य की कुरूपता का राजा धना नन्द ने उपहास उड़ाया और उन्हें अपने आसन से उठने के लिए बोला| इस व्यवहार से चाणक्य बहुत दुखी और अपमानित हुए|

चाणक्य ने धनानंद के राज्य को जड़ मूल नष्ट करने की प्रतिज्ञा ली और अपनी शिखा (चोटी) को तब तक न बाँधने का निर्णय ले लिया|

चाणक्य की मुलाकात चन्द्रगुप्त से हुई| चाणक्य ने चन्द्रगुप्त को नीतिशास्त्र और युद्ध शास्त्र में पारंगत किया| और अपने धन से एक सेना का निर्माण किया|

एक अन्य राजा के साथ मिलकर चन्द्रगुप्त चाणक्य ने धनानंद के राज्य पर भीषण आक्रमण किया और उसे मौत के घाट उतारकर उसके राज्य पर
कब्ज़ा कर लिया

जैसा की हमने पहले बताया अलग अलग प्राचीन ग्रंथों में चाणक्य, चंद्रगुप्त और धनानंद के अलावा बाकि पात्रों के नाम अलग अलग हैं|

इस तरह पाटलिपुत्र में नन्द वंश का अंत हुआ और चन्द्रगुप्त मौर्य के राज्य अभिषेक के बाद मौर्य वंश की स्थापना की|

कुछ इतिहासकारों का मानना है चन्द्रगुप्त ने चाणक्य की गाइडेंस में सिकंदर के सेनापति को गांधार अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध में हराया था|
चन्द्रगुप्त का सम्राज्य पूरे उत्तर भारत में सिन्धु नदी से बंगाल की खाड़ी तक फेला हुआ था|

हेमचन्द्र के द्वारा लिखे गए जैन संस्करण में लिखे तथ्यों के अनुसार चाणक्य चन्द्रगुप्त को भोजन के साथ धीमा जहर देता था| जिससे कभी दुश्मन के द्वारा दिए गए जहर का उस पर कोई असर न हो|

एक बार चन्द्रगुप्त की पत्नी दुर्धरा ने अपने पति के खाने की झूठन खा ली| दुर्धरा गर्भवती थी और कुछ ही दिनों में delivery (प्रसव) होने वाली थी|

जहर ने अपना असर दिखाया जिससे दुर्धरा का कुछ ही मिनट में निधन हो गया| बच्चे को बचाने के लिए चन्द्रगुप्त ने दुर्धरा का पेट काट कर बच्चे को बचा लिया| यही शिशु चन्द्रगुप्त का पुत्र बिन्दुसार था जो चन्द्रगुप्त के बाद मौर्य वंश का अगला शासक बना|

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दोस्तो चाणक्य से सम्बंधित जानकारी (chanakya history facts biography in hindi) आपको जरूर पसंद आई होगी|

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