भगवान विष्णु के 10 अवतार | Lord Vishnu 10 Incarnation in Hindi

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Bhagwan Vishnu ke 10 Avatar (dashavtar) list in Hindi | Lord Vishnu 10 Incarnation in Hindi

जब जब इस धरती पर धर्म की हानि हुई है, भगवन विष्णु स्वयं इस धरा पर अवतरित हुए हैं| विष्णु पुराण में भगवान् विष्णु के विभिन्न रूपों में अवतारों का वर्णन  दिया गया है|

वैसे तो भगवान् विष्णु के प्रमुख 10 अवतार (Vishnu ke 10 Avatar) ही बताये गए हैं, लेकिन इस प्रकृति के शुरुआत से लेकर अब तक 24 अवतारों के बारे में बताया हुआ है|

लेकिन हम यहाँ भगवान् विष्णु के प्रमुख 10 अवतार की ही बात करेंगे|

भगवान् श्री कृष्ण ने जब युद्ध स्थल पर अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया| उस समय भी भगवान् ने बोला की जब जब इस संसार में धर्म की हानि और अधर्म का बोलबाला होगा, तब तब इस संसार में, मैं अवतरित होऊंगा|

यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युथानम् अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे-युगे॥

भगवान् विष्णु के 10 अवतार

 

1. मत्स्य अवतार:-

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भगवान् विष्णु का प्रथम अवतार मत्स्य अवतार माना जाता है| एक पौराणिक कथा के अनुसार संसार को प्रलय से बचाने के लिए ही भगवान् विष्णु ने मछली के रूप में अवतार लिया था|

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार ‘हयग्रीव’ दैत्य ने ब्रह्मा जी के यहाँ से चारों वेदों को चुरा लिया| इससे संसार में चारों ओर अज्ञान और अन्धकार छा गया|

चारों और अज्ञान और अन्धकार इतना फेल गया की इस संसार का अंत कर पुन: धर्म की स्थापना ही एक मात्र रास्ता था|

हिन्दू धर्म के अनुसार इस प्रथ्वी पर अधर्म जब अपनी चरम सीमा पर होता है, प्राकर्तिक प्रलय के माध्यम से संसार के चक्र की पुन: स्थापना होती है और भगवान् स्वयं इस संसार में अवतरित होते हैं|

इसी समय भगवान् ने मछली के रूप में मत्स्य अवतार लिया और इस संसार में पुण्य आत्मा, पशु, और औषधि को बचा कर धर्म की पुन: स्थापना की|

अंतत हयग्रीव राक्षस का अंत कर वेदों की स्थापना करके पुन: धर्म की स्थापना की|

2. कूर्म अवतार:-

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हिन्दू धर्म के धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान् विष्णु ने समुद्र मंथन को सम्पूर्ण करने के लिए कूर्म अवतार लिया| इसे कच्छप अवतार भी कहा जाता है|

विष्णु पुराण के अनुसार एक बार इंद्र ने दुर्वासा ऋषि का अपमान कर दिया| इससे क्रुद्ध होकर दुर्वासा ऋषि ने इंद्र को श्राप दे दिया, जिससे इंद्र का सिंघासन और राज पाठ छूट गया|

उस समय तीनों लोकों पर राक्षसों का आधिपत्य हो गया और देवताओं को अपनी रक्षा के लिए इधर उधर छुपना पड़ रहा था|

सारे देवता भगवान् विष्णु के पास गया और इस संकट से बचने की प्रार्थना की|

विष्णु जी ने देवताओं को सुझाव दिया की आप समुद्र मंथन करो वहां से जो अमृत निकले उसे सभी देवता उस अमृत रस का पान कर लें|

जिससे सभी देवता अजर अमर हो जाएंगे और राक्षस आपका कुछ अहित नहीं कर पायेंगे|

लेकिन भगवान् विष्णु के कहा की आप राक्षसों की सहायता के बिना समुद्र मंथन नहीं कर पायेंगे| इसलिए आप उनसे दोस्ती कर लें|

देवताओं ने वैसा ही किया, देवता और राक्षस मिलकर मंद्राचल पर्वत को उखाड़ा और समुद्र तट तक लेकर आये| मंद्राचल पर्वत को मथानी बनाया गया और वासुकी सर्प को नेति बनाकर समुद्र मंथन करने लगे|

लेकिन मन्द्राचल पर्वत समुद्र में डूबने लगा, इसे देख भगवान् विष्णु ने एक विशाल कछुए के रूप में अवतार लेकर मंद्राचल पर्वत को अपनी पीठ पर टिका लिया|

इससे मंद्राचल पर्वत डूबने से बच गया और समुन्द्र मंथन सम्पन्न हो गया| और अंततः मंथन के द्वारा निकले अमृत को पीकर देवता अज़र अमर हो गए|

समुद्र मंथन की सम्पूर्ण कथा के लिए यहाँ क्लिक करें

3. वराह अवतार:-

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भगवान् विष्णु का तीसरा अवतार वराह के रूप में था| पौराणिक कथा के अनुसार एक बार राक्षस हिरण्याक्ष ने प्रथ्वी को रसातल (पाताल लोक) में छुपा दिया|

इससे पूरे ब्रह्माण्ड में हा हा कार मच गया| सारे देवता गण ब्रह्मा विष्णु और महेश के सामने प्रस्तुत होकर रक्षा की प्रार्थना करें लगे|

तब भगवान् विष्णु ने ब्रह्मा की नाक से वराह के रूप में अवतार लिया| और प्रथ्वी को ढूढने निकल पड़े| वराह बह्ग्वान ने अपनी थूथनी से सूंघ कर प्रथ्वी का पता लगा लिया|

भगवन वराह रसातल पहुंचे और अपने दोनों सींघों पर प्रथ्वी को रखकर ऊपर आने लगे| वहां हिरण्याक्ष ने इनका रास्ता रोका|

भयंकर युद्ध हुआ और भगवान् वराह ने हिरण्याक्ष को मार गिराया| और रसातल से प्रथ्वी को निकलकर समुद्र के ऊपर स्थापित कर दिया|

4. भगवान् नृसिंह अवतार:-

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भगवान् विष्णु ने नृसिंह के रूप में अवतार लेकर राक्षस हिरण्यकशिपु का वध किया था और इस जगत को उसके अत्याचारों से बचाया था|

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार के देत्य राजा हिरण्यकशिपु था, वह बहु बलवान और अत्याचारी था|

भगवान् से उसे मनुष्य, देवता, पक्षी, पशु, न दिन में, न रात में, न धरती पर, न आकाश में, न अस्त्र से न शस्त्र से, न मरने का वरदान प्राप्त था|

उसके राज में जो ही विष्णु की पूजा करता था उसे वो दण्डित करता है| वह स्वयं को ही भगवान् मानता था|

हिरण्यकशिपु के एक पुत्र हुआ प्रहलाद वह विष्णु का परम भक्त था| पिता को यह स्वीकार नहीं था|

जब प्रहलाद ने अपने पिता के लाख मना करने पर भी भगवान् विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी, तो हिरण्यकशिपू ने उसे म्रत्यु दंड दे दिया|

हिरण्यकशिपू ने कई बार प्रहलाद को मारने की कोशिश की लेकिन वह बच गया|

हिरण्यकशिपू की एक बहन थी होलिका उसे आग में न जलने का वरदान प्राप्त था| प्रहलाद को होलिका के साथ आग में बैठाया गया|

लेकिन भगवान् विष्णु की कृपा से प्रहलाद बच गए तो खुद होलिका उसमें जल गई|

आखिर हार कर हिरण्यकशिपू ने खुद ही प्रहलाद को मारने की कोशिश की, तब ही भगवान् विष्णु, नृसिंह के अवतार में प्रकट हुए और अपने नाखूनों से हिरण्यकशिपू के उदर को चीर दिया|

इस तरह इन्होने राक्षस के अत्याचारों से इस जगत की रक्षा की|

5. वामन अवतार:-

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यह कथा है सतयुग जब प्रहलाद के पौत्र राजा बलि ने सम्पूर्ण तीनों लोकों पर राज कर लिया| तब सारे देवता भगवान् विष्णु से मदद माँगने गए|

भगवान् विष्णु ने कहा की में देव माता अदिति के गर्भ से स्वयं जन्म लूँगा और आपके कष्टों का निवारण करूंगा|

भगवान् विष्णु ने वामन रूप में माँ अदिति के गर्भ से जन्म लिया|

एक बारे की बात है राजा बलि एक महान यज्ञ कर रहा था| राजा बलि एक महान दानी राजा था, कभी कोई उसके चौखट से खली नहीं गया था|

भगवान् बामन, राजा बलि के यज्ञ स्थान पर पहुँच कर भिक्षा माँगने लगे|

राजा ने कहा हे ब्राह्मण, बतायें आपकी क्या इच्छा है| बामन भगवान् ने कहा, मुझे सिर्फ तीन पग धरती अपने सम्राज्य में से दान में दे दो|

इस पर राजा बलि ने कहा, जहाँ आप तीन पैर रखें वो जमीन आपको हो जाएगी|

लेकिन बामन भगवान् ने कहा आप पहले तिर्वाच्या (संकल्प) कर लें, की आप बाद में अपने बचन से मुकुर न जाएँ|

देत्यों के गुरु शुक्रचार्य जी भगवान् विष्णु को पहचान गये थे| इसलिए वो मक्खी बनकर, कमंडल की नाली में घुस गए|

जब संकल्प करने का समय आया तो कमंडल से पानी ही नहीं निकल रहा था|

यह देखकर बामन भगवान् ने कमंडल की नाली में डंडी डाल दी, जिससे शुक्राचार्य जी की एक आँख फूट गयी|

संकल्प करने के बाद बामन भगवान् ने एक पग से ही स्वर्ग को नाप लिया, और दुसरे पग से प्रथ्वी को, लेकिन जब तीसरा पग रखने के लिए कोई स्थान नहीं मिला|

तब राजा बलि ने कहा, प्रभु आप तीसरे पग से मुझे नाप लें| तब बामन अवतार ने अपना तीसरा पैर राज बलि के ऊपर रख दिया जिससे राजा बलि पाताल लोक पहुँच गए|

राजा बलि की बचन बद्ध संकल्प से प्रसन्न हो कर बाद में भगवान् विष्णु ने बलि को पातळ लोक का राजा बना दिया और स्वर्ग वापस देवताओं को दे दिया|

6. परशुराम अवतार:-

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भगवान् विष्णु, ने त्रेता युग में भगवान् परशुराम के रूप में अवतार लिया| यह ऐसा समय था जब कई क्षत्रिय राजाओं का अत्याचार चरम सीमा पर था|

इन्ही से आम जन की रक्षा के लिए परशुराम के रूप में स्वयं भगवान् विष्णु अवतरित हुए|

पौराणिक कथा के अनुसार, महिस्मती सम्राज्य में एक कार्तवीर्य अर्जुन (सहस्त्रबाहू) नाम का राजा था| वह बहुत अत्याचारी और पापी था|

उसे भगवान् से शहस्त्र भुजाओं का वरदान प्राप्त था| एक बार वह परशुराम के पिता महर्षि जमदग्नि के आश्रम में आया और कामधेनु गाय के चमत्कार देखकर आश्चर्य चकित हो गया|

और कामधेनु गाय को जबरदस्ती उठाकर अपने साथ ले जाने लगा| उस समय परशुराम आश्रम में नहीं थे|

परशुराम जब वापस आये तो यह सुन बहुत क्रोधित हुए| और अपना फरसा और बाण लेकर शहस्र बाहु को दण्डित करने निकल पड़े|

शहस्त्र बाहू और परशुराम में भयंकर युद्ध हुआ और अंततः भगवान् परशुराम ने शहस्त्र बाहू का वध कर दिया|

ऐसा पौराणिक कथाओं में वर्णित है, परशुराम जी ने 21 बार इस प्रथ्वी को क्षत्रिय विहीन कर दिया था|

सम्पूर्ण जानकरी के लिए पढ़ें – भगवान् परशुराम जी की सम्पूर्ण कथा

7. श्री राम अवतार:-

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त्रेता युग में भगवान् विष्णु ने श्री राम के रूप में अवतार लिया| इस समय लंका में रावण नाम के राक्षस का बहुत आतंक था|

इसके अलावा भी बहुत से राक्षसों का प्रथ्वी पर आतंक था जहाँ वे ऋषि मुनियों के यज्ञ में बाधा उत्पन्न करते थे|

राम के रूप में अवतार लेकर भगवान् विष्णु मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाये, जिन्हें आदर्श रूप में आज भी हिन्दू समाज में पूजा जाता है|

8. श्री कृष्ण अवतार और बलराम अवतार:-

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भगवान् कृष्ण ने द्वापर युग में श्री कृष्ण के रूप में अवतार लिया| श्री कृष्ण का जन्म मथुरा के एक कारागार में हुआ था|
इनके पिता का नाम वासुदेव और माता का नाम देवकी था|

इस समय कंस नाम के राक्षस का बहुत अत्याचार था| अवतार लेकर कंस का वध कर ब्रज वासियों को कष्ट मुक्त किया|

महाभारत के युद्ध में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया, जो वर्तमान में भी पूरे विश्व के लिए प्रेरणा का श्रोत है|

नोट:- वैष्णव सूची में बलराम जी को विष्णु का आठवां अवतार माना गया है, बलराम जी को, भगवान् विष्णु के वाहन शेषनाग का भी अवतार माना गया, यहाँ कृष्ण को सभी अवतारों का श्रोत माना गया है|

9. बुद्ध/विठोबा/जगन्नाथ अवतार:-

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भगवान् विष्णु के 9वे अवतार के रूप में बुद्ध को माना जाता है| यहाँ भगवान् विष्णु एक उपदेशक के रूप में धरती पर अवतरित हुए और अहिंसा का पाठ पढाया|

महाराष्ट्र और गोवा में विठोबा को 9वां अवतार माना जाता है, कई मंदिरों में 9वे अवतार के रूप में विठोबा भगवान् को दिखाया गया है|

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ओड़िसा के साहित्य और इतिहास में भगवान् जगन्नाथ को 9वां अवतार माना गया है|

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10. कल्कि अवतार:-

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भगवान् विष्णु का आखिरी अवतार कल्कि को माना गया है, यह अवतार कलियुग के आखिरी में होगा| पुराणों के अनुसार, कलियुग में अधर्म बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा और अधर्मियों का नाश करने के लिए कल्कि का अवतार होगा|

कल्कि अवतार का चित्रण पुराणों में दिया हुआ है, कल्कि सफ़ेद घोड़े पर धूमकेतु की तरह चमकती हुई तलवार के साथ आयेंगे और अधरिमियों का नाश करके धर्म की पुन: स्थापना करेंगे|

इसके बाद ही दुवारा से सत्य युग प्रारंभ हो जाएगा|

दोस्तों भगवन विष्णु के 10 अवतार (Bhagwan Vishnu ke 10 Avatar) की जानकारी आपको जरुर पसंद आई होगी| आपके कुछ सवाल हों तो आप कमेंट में चर्चा कर सकते हैं|

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