Akshaya Tritiya importance katha in Hindi | अक्षय तृतीया 2019 महत्त्व कथा |

अक्षय तृतीया का मतलब, 2019 महत्त्व कथा पूजा विधि | Akshaya Tritiya 2019 date, meaning, importance, story History in Hindi | अक्षय तृतीया 2019 में कब है

दोस्तो, हिन्दू धर्म एक ऐसा त्यौहार है जहाँ हर एक दिन त्यौहार के रूप में मनाया जाता है| ऐसा ही एक दिन है अक्षय तृतीया| लेकिन इस दिन की ख़ास बात यह है, यह दिन अपने आप में ही एक शुभ दिन है|

इस दिन आप कोई भी शुभ काम बिना शुभ मुहुर्त देख कर कर सकते हैं| किसी भी तरीके का पत्रा देखने की और पंडितजी से शुभ मुहूर्त निकलवाने की जरुरत नहीं है|

अक्षय तृतीया 2019 में कब है

वैसे तो अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) बैशाख मास शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है| आप ऐसा समझ लें वैशाख के महीने की अमावस्या के तीसरे दिन

अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 2019 में अक्षय तृतीया 7 मई को है|

अक्षय तृतीया शुभ मुहूर्त का समय

अक्षय तृतीया पूजा मुहूर्त (Akshaya Tritiya Pooja Muhurt)

सुबह 05:40 से दोपहर 12:17 बजे तक।

मुहूर्त की अवधि : 6 घंटे 37 मिनट

तृतीया तिथि का आरंभ = 7 मई 2019, मंगलवार रात 03:17 बजे।
तृतीया तिथि समाप्त = 8 मई 2019, बुधवार रात 02:17 बजे।

अक्षय तृतीया के दिन सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त

सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त-

7 मई 2019, मंगलवार = प्रातः 03:17 बजे से 05:40 बजे तक।

अक्षय तृतीया चौघड़िया मुहूर्त 

रात्रि
03:17 से प्रातः 05:40 के बीच।
मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) = रात्रि
03:17 से प्रातः 05:40 बजे।

अक्षय तृतीया क्यों मनाई जाती है

Why we celebrate Akshaya Tritiya in Hindi

हिन्दू शास्त्रों में इस दिन को एक शुभ दिन और त्यौहार के रूप में मनाने का कोई विशेष कारण नहीं लिखा है| लेकिन इस दिन प्राचीन काल में कई शुभ और महत्वपूर्ण घटनाएं हुई हैं|

ये सभी शुभ घटनाएं वैशाख माह शुक्ल पक्ष की तृतीया को ही हुई थी| इसलिए इस दिन को एक महान शुभ दिन के रूप में मनाया जाता है|

इस दिन को अक्षय तृतीया इसलिए बोला जाता है क्योंकि अक्षय का मतलब होता है ‘जो कभी ख़त्म न हो’ इसलिए इस दिन अपने शुभ कार्य करने से और दान पुण्य करने से कई जन्मों तक के पुण्य की प्राप्ति होती है|

आइये उन सभी शुभ घटनाओं को जानते है जो प्राचीन काल में इस दिन घटित हुई थी|

अक्षय तृतीया का दिन भगवान् विष्णु के 6ठे अवतार भगवान् परशुराम कको समर्पित है| इसी दिन भगवान् परशुराम का जन्म हुआ था| इन्होने एक ब्राह्मण कुल में जन्म लिया था| इनके पिता का नाम ऋषि जमदगनी और माता रेणुका थी| ऋषि जमदगनी सप्त ऋषियों में एक ऋषि माने जाते हैं|

इसी दिन गंगा नदी स्वर्ग से धरती पर आईं थी| गंगा नदी उत्तर और पश्चिम भारत के एक बहुत बड़े भू भाग को जीवन प्रदान करती है| इसलिए इसे माता के रूप में पूजा जाता है| गंगा नदी के प्रथ्वी पर प्रथम बार अवतरण से भी इस दिन को एक शुभ दिन माना जाता है|

इसी दिन माँ अन्नपूर्णा का भी जन्म दिन मनाया जाता है| माँ अन्नपूर्णा अन्न की देवी है और अन्न मनुष्य का जीवन पालन हार| इस दिन माँ अन्नपुर्णा की पूजा करने से कभी भी रसोई में भोजन की कमी नहीं रहती है|

इसी दिन महर्षि वेदव्यास ने महाभारत लिखना प्रारंभ किया था|

इस शुभ दिन ही युधिष्ठिर को अक्षय पात्र की प्राप्ति होती थी| इस अक्षय पात्र में कभी भी अन्न समाप्त नहीं होता था| इसी से युधिष्ठिर अपनी प्रजा की आपूर्ति किया करते थे|

दक्षिण भारत में अक्षय तृतीया का विशेष महत्त्व है| माना जाता है इसी दिन देवता कुबेर (धन के देवता) ने भगवान् विष्णु की तपस्या करके उन्हें प्रसन्न किया था| वरदान स्वरुप कुबेर ने धन का देवता बनने की इच्छा जाहिर की| भगवान् ने कुबेर को माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए बोला| अंततः माता लक्ष्मी जी की कृपा से कुबेर धन के देवता बने और माता लक्ष्मी वैभव की| इसी दिन लक्ष्मी यंत्र की पूजा की जाती है, जिसमें भगवान् विष्णु, लक्ष्मी और कुबेर की तस्वीरें होती है|

इसी दिन उड़ीसा के पूरी स्थान पर भगवान् जगन्नाथ के पट खुलते हैं और रथ यात्रा निकलती है|

इसी दिन भगवान् कृष्ण ने द्रोपदी को चीर हरण से बचाया था|

इसी दिन गरीव ब्राह्मण सुदामा पाने मित्र कृष्ण से मिलने गए थे| और भगवान् कृष्ण की कृपा से निर्धनता दूर हुई थी| इसलिए भी इस दिन को शुभ माना जाता है| इस दिन मुहूर्त से पूजा बात और दान करने से निर्धनता दूर होती है|

इसी दिन बंगाल में व्यापारी गणेशजी और लक्ष्मीजी की पूजा करते हैं और इसी दिन नए बही खाते की शुरुआत की जाती है| इसे हलखता कहते हैं|

जैन धर्म में अक्षय तृतीया का महत्त्व

जैन धर्म में भी अक्षय तृतीया का भी अपना अलग महत्त्व है| जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान् ऋषभदेव इसी दिन आदिनाथ के नाम से प्रसिद्द हुए|

ऋषभदेव जैन भिक्षु थे| इन्होने ही आहराचार्य परम्परा को प्रारंभ किया था| अहराचार्य जैन मुनियों को भोजन पहुचाने की व्यवस्था है|

इस दिन जैन लोग उपवास रखते हैं और गन्ने के रस से उपवास तोड़ते हैं इसे पारणा कहते हैं|

अक्षय तृतीया का हिन्दू धर्म समाज के लिए महत्त्व

जैसा की हमने पहले बताया यह दिन सबसे शुभ दिन माना जाता है| इस दिन शादी विवाह, घर प्रवेश, नए व्यापार का मुहुर्त, और किसी भी अन्य शुभ कार्य को बिना कोई मुहुर्त देखे किया जा सकता है|

अक्षय तृतीया पूजन विधि (Akshaya Tritiya Pooja Vidhi)

इस दिन भगवान् विष्णु और लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है| विष्णुजी को चावल का भोग लगाया जाता है| यह गर्मी का मौसम है इसलिए आम, इमली और अन्य गर्मी के फल चढाने की परम्परा है|

भारत के कई स्थान पर मिटटी के घड़े में पानी इमली और गुण मिलकर भगवान् का भोग लगाते हैं और आम जनता में प्रसाद के रूप में चढाते हैं|

अक्षय तृतीया की कथा

एक बार की बात है, एक गाँव में धर्मदास नाम का एक व्यक्ति अपने परिवार के साथ एक गाँव में रहता था| धर्मदास एक गरीब माध्यम परिवार से ताल्लुक रखता था|

हालाँकि धर्मदास की आय अधिक नहीं थी| वह अपने परिवार का लालन पालन करने के साथ साथ धार्मिक कार्य भी मन लगा कर करता था|

एक दिन एक ब्राह्मण ने उसे अक्षय तृतीया के दिन का महत्त्व बताया| धर्मदास ने निश्चय किया प्रत्येक साल वह इस दिन पूजा पाठ करेगा और दान करेगा|

अक्षय तृतीया के दिन विधि पूर्वक विष्णु और लक्ष्मी जी का पूजन किया और अपने सामर्थ्य से भी अधिक आटा, दाल, गेंहू, सत्तू, चावल, सोना चांदी का दान किया|

हालाँकि घर के सदस्यों ने कई बार धर्मदास को इतना दान पुण्य करने से टोका लेकिन धर्मदास का संकल्प मजबूत था|

इसी प्रकार हर साल अक्षय तृतीया पर विधि पूर्वक विष्णु और लक्ष्मीजी का पूजन और व्रत रखता और हर्दय से दान पुण्य करता था|

समय निकलता गया, यही धर्मदास म्रत्यु उपरान्त अगले जन्म में कुशावती नाम से राजा बने| कुशावती को अपने पूर्व जन्म के संस्कार अब ही याद थे|

वैभव सम्पान होने के उपरान्त भी कभी उन्होंने अहंकार नहीं था| अब भी वो ह्रदय से गरीवों की सेवा और दान पुण्य करते थे|

हे नर नारायण और लक्ष्मी से आपने धर्मदास पर कृपा की हम सब पर भी वैसे ही कृपा करना

बोलो विष्णु भगवान् की जय

लक्ष्मी मैया की जय

अक्षय तृतीया पर क्या दान करें

इस दिन किसी भी वास्तु को दान कर सकते हैं| गर्मी के मौसम में आने वाले सभी तरह के फल जैसे आम, खरबूज, तरबूज, इमली आदि दान किये जाते है|

धनी लोग सोना चांदी कपडे का दान करते हैं|

गर्मी का मौसम होने की वजह से कई लोग इलेक्ट्रॉनिक कूलर, पंखे, हाथ वाले पंखे भी दान करते हैं|

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