पूजा में कमल पुष्प का विशेष महत्व क्यों..?

वेसे तो साफ़ मन से की गई पूजा उत्तम होती है, लेकिन अगर आप कमल के पुष्पों से पूजा करते है तो उस पूजा का महत्व और बढ जाता है | भारतीय आध्यात्मदर्शन में कमल के पुष्प को अत्यंत पवित्र, पूजनीय एवं सुंदरता, सदभावना, शांति-सम्रधि और बुराइयो से मुक्ति का प्रतीक माना गया है | यह ऐश्वर्य तथा सुख का सूचक है | इसीलिए कमल को पुष्पराज भी कहा जाता है | पौराणिक आख्यानकों में भगवान् विष्णु की नाभि से कमल का उत्पन्न होना और उस पर विराजमान ब्रह्माजी द्वारा स्रष्टि की रचना करना कमल की महत्ता को स्वयं सिद्ध करता है | कमल को महालक्ष्मी, ब्रह्मा, सरस्वती आदि देवी-देवताओं ने अपना आँसन बनाया है | यह लक्ष्मी व श्रीदायक है | कमल के फूल से अनेक देवी-देवताओं की पूजा की जाती है अनेक प्रकार के यज्ञो और अनुष्ठानो में कमल के पुष्पों को निश्चित संख्या में अर्पित करने का शास्त्रों में विधान बताया गया है |

भगवान् विष्णु ने सहस्त्र नीलकमलो से भगवान् शिव की पूजा की थी, फलतः उन्हें सुदर्शन चक्र की प्राप्ति हुई थी | इसी प्रकार श्रीराम ने सहस्त्र लाभकमलो से देवी शक्ति की उपासना की थी, फलतः रावण पर विजय मिली थी |

कमल का फूल कीचडऔर जल में ही उत्पन्न होता है, लेकिन उससे निर्लिप्त रहकर, हमें पवित्र जीवन जीने की प्रेरणा देता है | यह इस बात का प्रतीक है कि अवांछनीय तत्वों के परिमार्जन द्वारा श्रेष्ठता को प्राप्त किया जा सकता है | इसीलिए कमल का-सा खिलना अत्यंत शुभ और मांगलिक माना जाता है |

मंदिरों के शिखर बंद कमल के आकार के बनाए जाते है | पृथ्वी की आकृति भी कमल के सामान बताई गई है | कुंडलिनी जागरण के लिए योगी जिन आठ चक्रों को भेदते है, उन्हें विभिन्न दलो के कमल कहते हैं, क्योकिं उनको भेदकर ही ब्रह्माका ज्ञान और उसकी प्राप्ति होना बताया गया है |

शतपथ-ब्राम्हण में ‘योनिर्वे पुष्करम’ अर्थात् स्त्री के गर्भाशय के अग्र भाग को भी कमल कहा गया है, जो उत्पत्ति से इसकी समध्रमिता को सिद्ध करता है | बौध्दधर्म ललितविस्तार ग्रंथ में कमल को अष्टमंगल माना गया है | इस प्रकार देखें, तो कमल के इतने विशिष्ट अर्थ हैं कि इसे भारतीय-संस्कृति का विश्वकोश मानना गलत न होगा |

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